Operation Sindoor: भारत ने एक बार फिर अपने बच्चों को इतिहास और वर्तमान के महत्वपूर्ण अध्यायों से जोड़ने की कोशिश की है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित दो नए मॉड्यूल पेश किए हैं। ये मॉड्यूल कक्षा 3 से 12 तक के बच्चों के लिए तैयार किए गए हैं। इसका उद्देश्य केवल सैन्य शक्ति का बखान करना नहीं है, बल्कि बच्चों को यह समझाना भी है कि आतंकवाद का सामना करने में भारत किस तरह एकजुट होता है और किस तरह शांति व मानवीय मूल्यों की रक्षा करता है।
पहलगाम हमला और पाकिस्तान की भूमिका | Operation Sindoor
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में मासूम नागरिक और सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। शुरू में पाकिस्तान ने इस हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया, लेकिन भारतीय एजेंसियों की जांच और खुफिया रिपोर्ट्स ने यह साफ कर दिया कि यह हमला पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के सीधे आदेश पर हुआ था।
NCERT की नई किताबों में भी साफ तौर पर लिखा गया है कि यह हमला पाकिस्तान की सेना और आईएसआई की साजिश थी। हालांकि, खास बात यह है कि इस हमले के खिलाफ पूरे देश ने, खासकर भारतीय मुस्लिम समुदाय ने, खुलकर आतंकवाद की निंदा की और पाकिस्तान को करारा जवाब दिया।
भारतीय मुसलमानों का विरोध और एकजुटता
हमले के बाद हैदराबाद, लखनऊ और भोपाल जैसे शहरों में मुस्लिम समुदाय ने काली पट्टी बांधकर विरोध किया। कश्मीर घाटी के कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। यह विरोध केवल एक प्रतीक नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और भारत की असली पहचान शांति और भाईचारा है।
NCERT के मॉड्यूल में इस बात को खास तौर पर शामिल किया गया है ताकि बच्चों को यह समझाया जा सके कि आतंकवाद के खिलाफ भारत में सभी धर्म और समुदाय एकजुट खड़े हैं।
ऑपरेशन सिंदूर: भारत की सैन्य प्रतिक्रिया
पहालगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। 7 मई 2025 को भारतीय सेना और वायुसेना ने मिलकर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इनमें से सात ठिकाने सेना ने तबाह किए, जबकि दो बड़े ठिकाने—मुरीदके और बहावलपुर—को भारतीय वायुसेना ने निशाना बनाया। ये ठिकाने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के मुख्यालय थे।
भारतीय सेना ने सुनिश्चित किया कि इस कार्रवाई में किसी भी निर्दोष नागरिक को नुकसान न पहुंचे। सभी लक्ष्यों की दो बार जांच की गई और केवल आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाया गया।
वीरता और रणनीति की गाथा
ऑपरेशन सिंदूर को केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं माना जा रहा है। इसे भारत की रणनीतिक सोच, तकनीकी क्षमता और वीरता की गाथा के रूप में देखा जा रहा है। इस ऑपरेशन में भारत की आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम, खासकर S-400 की अहम भूमिका रही। इसने दुश्मन के लड़ाकू विमानों और ड्रोन को दूर से ही मार गिराया।
मॉड्यूल में लिखा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर साहस, रणनीति और नवाचार का प्रतीक है। इसका नाम सिंदूर इसलिए रखा गया क्योंकि यह शहीदों की विधवाओं को सम्मान देने और उनके त्याग को याद करने का एक प्रतीक है।
बच्चों के लिए नया पाठ्यक्रम
NCERT ने कक्षा 3 से 8 के लिए मॉड्यूल का नाम रखा है— ‘ऑपरेशन सिंदूर—ए सागा ऑफ वेलर’ यानी वीरता की गाथा। वहीं, कक्षा 9 से 12 के लिए इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर—ए मिशन ऑफ ऑनर एंड ब्रेवरी’ यानी सम्मान और बहादुरी का मिशन कहा गया है।
इन दोनों मॉड्यूल्स का उद्देश्य है बच्चों को यह समझाना कि भारत ने हमेशा आतंकवाद का डटकर मुकाबला किया है। चाहे 1947, 1965, 1971 या 1999 के युद्ध हों, भारत ने हर बार अपने नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।
पिछले ऑपरेशनों से तुलना
पहालगाम हमले के बाद किए गए ऑपरेशन सिंदूर की तुलना 2019 के पुलवामा हमले के बाद हुए बालाकोट एयरस्ट्राइक से की जा रही है। दोनों ही घटनाओं में भारत ने यह साफ संदेश दिया कि आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मॉड्यूल में इस तुलना को विस्तार से समझाया गया है ताकि बच्चों को यह भी पता चले कि भारत की सैन्य नीति में निरंतरता है। जब भी भारत पर हमला हुआ, देश ने शांतिपूर्वक लेकिन सख्ती से जवाब दिया।
एकजुट भारत की तस्वीर
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पूरे देश में कैंडल मार्च और रैलियों का आयोजन हुआ। हर धर्म और समुदाय के लोगों ने मिलकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यह तस्वीर बताती है कि भारत की ताकत केवल उसकी सेना नहीं है, बल्कि उसका समाज भी है जो एकजुट होकर आतंकवाद का सामना करता है।
कश्मीर के स्थानीय लोगों ने भी आतंकियों के खिलाफ आवाज उठाई। सीमा के पास बसे गांवों ने भारतीय सेना का समर्थन किया और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
शिक्षा में सैन्य इतिहास की अहमियत
NCERT का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक स्कूलों में अक्सर सैन्य अभियानों की चर्चा कम ही होती थी। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि सुरक्षा और आजादी कितनी मुश्किल लड़ाइयों के बाद मिली है और इसे बनाए रखने के लिए देश को लगातार संघर्ष करना पड़ता है।
इन मॉड्यूल्स में केवल युद्ध और हमलों का जिक्र ही नहीं है, बल्कि यह भी बताया गया है कि भारत हमेशा से शांति का पक्षधर रहा है। हर बार जब भारत ने जवाबी कार्रवाई की है, तब उसने यह सुनिश्चित किया है कि निर्दोषों को नुकसान न हो।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए संदेश
ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित ये नए पाठ्यक्रम केवल एक कहानी नहीं हैं, बल्कि बच्चों को यह संदेश देने का जरिया हैं कि देश की सुरक्षा और एकता सबसे महत्वपूर्ण है। आतंकवाद से लड़ाई केवल सेना की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है।
यह पाठ्यक्रम यह भी दिखाता है कि भारत के मुसलमान, हिंदू, सिख, ईसाई—सब मिलकर आतंकवाद के खिलाफ खड़े हैं। यह एकजुटता ही भारत की असली ताकत है।
ऑपरेशन सिंदूर और पहालगाम हमले का जिक्र स्कूल की किताबों में शामिल करना केवल इतिहास का हिस्सा बनाना नहीं है, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को तैयार करना है। उन्हें यह सिखाना है कि जब भी देश पर संकट आता है, भारतवासी एकजुट होकर उसका सामना करते हैं।
यह मॉड्यूल बच्चों को वीरता, रणनीति, शांति और एकता का महत्व समझाएगा। भारत ने आतंकवाद को हर बार करारा जवाब दिया है और आगे भी देता रहेगा। यह सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि शहीदों के त्याग को सम्मान देने और देश की एकता को मजबूत करने का प्रतीक भी है।
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