Omar Abdullah on Independence Day: जम्मू-कश्मीर के इतिहास में 15 अगस्त 2025 का दिन एक नया अध्याय जोड़ गया। श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में तिरंगा पूरे गौरव और शान के साथ लहराया, और यह सिर्फ एक औपचारिक ध्वजारोहण नहीं था—यह एक संदेश था कि जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र की वापसी हो चुकी है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आठ साल बाद स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराया और इस तरह वह 2017 के बाद पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बन गए जिन्होंने इस समारोह की अध्यक्षता की।

कैसे टूटा था सिलसिला – 2017 से 2025 तक का सफर
2017 में महबूबा मुफ्ती ने बतौर मुख्यमंत्री स्वतंत्रता दिवस समारोह की अध्यक्षता की थी। लेकिन 2018 में बीजेपी ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया, जिससे गठबंधन सरकार गिर गई और जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू हो गया।
इसके बाद 2018 और 2019 में राज्यपाल, और 2020 से 2024 तक उपराज्यपाल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर ध्वजारोहण करते रहे।
अगस्त 2019 में एक ऐतिहासिक फैसला हुआ—अनुच्छेद 370 को हटा दिया गया और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया। तब से लेकर पिछले साल तक यहां कोई निर्वाचित सरकार नहीं रही। 2024 के अंत में विधानसभा चुनाव हुए और उमर अब्दुल्ला केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने।
गार्ड ऑफ ऑनर और परेड की झलकियां | Omar Abdullah on Independence Day
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में माहौल बेहद उत्साहपूर्ण था। मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया, जिसके बाद उन्होंने परेड का निरीक्षण किया।
परेड में जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र अर्धसैनिक बल, एनसीसी कैडेट्स और स्कूली बच्चों की टुकड़ियां शामिल थीं। मंच से गुजरते हुए इन टुकड़ियों ने मुख्यमंत्री को सलामी दी।
जनता की भावनाएं – एक नए दौर की उम्मीद
बख्शी स्टेडियम में मौजूद हजारों लोगों के लिए यह सिर्फ ध्वजारोहण का कार्यक्रम नहीं था। यह एक प्रतीक था कि लंबे समय के बाद जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक सरकार वापस आई है।
लोगों की आंखों में उमंग और चेहरे पर मुस्कान थी। कई बुजुर्गों ने कहा कि उन्होंने इतने सालों बाद यह दृश्य देखा कि जनता द्वारा चुना गया मुख्यमंत्री तिरंगा फहरा रहा है।
क्यों खास है यह ध्वजारोहण
उमर अब्दुल्ला का यह कदम इसलिए भी खास है क्योंकि यह अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार हुआ है कि किसी निर्वाचित मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में स्वतंत्रता दिवस समारोह की अध्यक्षता की।
यह लोकतंत्र की मजबूती और केंद्र-राज्य संबंधों में संतुलन का संकेत देता है।
#WATCH | | Srinagar: J&K CM Omar Abdullah hoists the Tricolour at Bakshi Stadium in Srinagar on #IndependenceDay pic.twitter.com/9ggHapORiS
— ANI (@ANI) August 15, 2025
सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द – संवेदनशीलता का संदेश
इस बार समारोह में एक अहम बदलाव भी हुआ। मुख्य आकर्षण में से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने यह फैसला किश्तवाड़ में आई बाढ़ में मारे गए लोगों की स्मृति में लिया।
यह कदम इस बात का उदाहरण है कि सरकार जनभावनाओं का सम्मान करती है और दुख की घड़ी में संवेदनशील रवैया अपनाती है।
राजनीतिक मायने – एक मजबूत वापसी
राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो उमर अब्दुल्ला का यह ध्वजारोहण नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के लिए एक मजबूत राजनीतिक वापसी का संकेत है।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस ने लगातार अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए संघर्ष किया। अब, मुख्यमंत्री के रूप में उमर अब्दुल्ला का यह मंच पर आना उनके और उनकी पार्टी दोनों के लिए एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला क्षण है।
जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति में बदलाव
पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति में कई बदलाव आए हैं। केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों ने आतंकवाद पर सख्ती दिखाई है, और अब स्वतंत्रता दिवस जैसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा के साथ-साथ आम नागरिकों की भागीदारी भी बढ़ी है।
बख्शी स्टेडियम के अंदर और बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी, लेकिन इसके बावजूद आम लोगों की मौजूदगी ने माहौल को सकारात्मक बनाया।
भविष्य की चुनौतियां
हालांकि यह ध्वजारोहण ऐतिहासिक है, लेकिन जम्मू-कश्मीर की चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। रोजगार, विकास, शिक्षा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी भी बहुत काम बाकी है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में इन मुद्दों पर काम करने का वादा किया और कहा कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर को “शांति और प्रगति का प्रतीक” बनाया जाएगा।
एक नई शुरुआत
15 अगस्त 2025 को श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में लहराता तिरंगा सिर्फ एक राष्ट्रीय ध्वज नहीं था, बल्कि यह लोकतंत्र की वापसी, जनता की उम्मीदों और जम्मू-कश्मीर की नई सुबह का प्रतीक था।
आठ साल बाद किसी निर्वाचित मुख्यमंत्री ने यहां तिरंगा फहराया, और यह क्षण इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।
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