ओडिशा के कटक में कर्फ्यू: तनाव के बीच प्रशासन सख्त, जनजीवन पर पड़ा असर

ओडिशा के कटक में कर्फ्यू: ओडिशा का ऐतिहासिक शहर कटक (Cuttack) इन दिनों पूरी तरह से बंद जैसा दिखाई दे रहा है। सड़कों पर सन्नाटा, बाजारों में ताले, और हर चौक पर तैनात पुलिसकर्मी — ऐसा नज़ारा शायद ही किसी ने पहले देखा हो। दरअसल, शहर में हाल ही में भड़की हिंसा और आपसी झड़पों के बाद प्रशासन ने कर्फ्यू लगाने का निर्णय लिया है।

ओडिशा के कटक में कर्फ्यू
             ओडिशा के कटक में कर्फ्यू

यह कदम शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है, लेकिन इससे आम लोगों के जीवन पर गहरा असर पड़ा है।

घटना कैसे शुरू हुई?

सूत्रों के अनुसार, कटक में दो समुदायों के बीच किसी धार्मिक जुलूस और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद शुरू हुआ। मामूली कहा-सुनी ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। पत्थरबाज़ी, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं के बाद स्थिति बेकाबू हो गई।

कुछ इलाकों में पुलिस को लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इसके बाद जिला प्रशासन ने हालात पर काबू पाने के लिए शहर के कुछ हिस्सों में धारा 144 लागू की और बाद में पूरे कटक में कर्फ्यू घोषित कर दिया गया।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई:

कटक के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “शहर में शांति सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
उन्होंने बताया कि इंटरनेट सेवाएँ अस्थायी रूप से बंद की गई हैं ताकि अफवाहें न फैलें। साथ ही, पुलिस ने कई संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च भी किया है।

अब तक करीब 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है और पुलिस लगातार निगरानी कर रही है।
प्रशासन ने अपील की है कि लोग घरों में रहें और किसी भी भड़काऊ संदेश या वीडियो पर भरोसा न करें।

शहर का हाल: सन्नाटा और डर:

कभी रौनक से भरा रहने वाला कटक आज डर के साये में है। दुकाने बंद हैं, स्कूल-कॉलेजों में छुट्टियाँ घोषित कर दी गई हैं।
रात के समय शहर पूरी तरह शांत रहता है — न वाहन, न लोगों की आवाजाही।

स्थानीय निवासी बताते हैं कि उन्होंने पहले कभी ऐसा माहौल नहीं देखा।
एक दुकानदार ने कहा, “हम रोज़ की कमाई पर जीते हैं। कर्फ्यू के कारण दुकान बंद करनी पड़ी है, अब घर चलाना मुश्किल हो रहा है।”

दूसरी ओर, एक अभिभावक ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की ज़रूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।

ज़रूरी सेवाएँ चालू लेकिन कठिनाई बरकरार:

हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि दूध, दवाइयाँ और अस्पताल जैसी जरूरी सेवाएँ जारी रहेंगी, लेकिन सड़कों पर गश्त करती पुलिस के कारण लोगों में अब भी डर का माहौल है।
कई लोग जरूरी सामान लेने के लिए भी बाहर निकलने से कतराते हैं।

राहत के तौर पर, जिला प्रशासन ने कुछ क्षेत्रों में पास सिस्टम लागू किया है, जिससे पत्रकारों, स्वास्थ्यकर्मियों और आपात सेवा से जुड़े लोगों को आवाजाही की अनुमति दी गई है।

शांति बहाल करने की कोशिशें:

शहर में शांति बहाल करने के लिए प्रशासन लगातार धार्मिक और सामाजिक संगठनों से बातचीत कर रहा है।
दोनों समुदायों के नेताओं ने शांति और आपसी भाईचारे की अपील की है।

कटक के स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं कि “कटक हमेशा से एकता का प्रतीक रहा है। यहां हिंदू-मुस्लिम, सभी त्योहार मिलजुलकर मनाए जाते हैं। कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ा है, लेकिन शहर की आत्मा अब भी जिंदा है।”

सोशल मीडिया पर सख्ती:

पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नज़र रखी हुई है।
कई ऐसे अकाउंट चिन्हित किए गए हैं जो अफवाहें फैलाने की कोशिश कर रहे थे।
इन पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने कहा है कि “किसी भी व्यक्ति को नफरत फैलाने वाली पोस्ट डालने पर बख्शा नहीं जाएगा।”

लोगों से अपील की गई है कि वे सिर्फ सरकारी सूचना पर ही भरोसा करें और फर्जी खबरों से दूर रहें।

उम्मीद की किरण:

हालांकि हालात गंभीर हैं, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति में सुधार आने लगा है।
कई इलाकों में पुलिस की मौजूदगी के बीच अब कुछ दुकाने खुलनी शुरू हो गई हैं।
स्थानीय प्रशासन उम्मीद कर रहा है कि अगले कुछ दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।

कटक के लोग अपने शांतिप्रिय स्वभाव और मिल-जुलकर रहने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। यही कारण है कि संकट के इस समय में भी शहर के कई निवासी एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं — कोई खाना बाँट रहा है, तो कोई जरूरतमंदों को आश्रय दे रहा है।

कटक में लगा कर्फ्यू सिर्फ एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि अफवाहें और नफरत कितनी जल्दी माहौल बिगाड़ सकती हैं।
यह समय एक-दूसरे पर उंगली उठाने का नहीं, बल्कि एकता और विश्वास बनाए रखने का है।

ओडिशा के इस ऐतिहासिक शहर ने अतीत में भी कई कठिनाइयाँ देखी हैं और हर बार मजबूती से उभरा है।
उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कटक फिर से अपने पुराने सौहार्द और रौनक भरे रूप में लौट आएगा — क्योंकि आखिरकार, हर कर्फ्यू के बाद सवेरा जरूर होता है।

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