Noida Techie Yuvraj Drowns Amid Delayed Rescue: पिता ने संस्थागत विफलता को ठहराया जिम्मेदार

Noida Techie Yuvraj Drowns Amid Delayed Rescue: नोएडा में शुक्रवार की रात एक दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब 27 वर्षीय युवराज, जो गुरुग्राम की कंपनी Dunnhumby India में काम करते थे, घर लौटते समय अपने ग्रैंड विटारा वाहन के साथ निर्माणाधीन ट्रेंच में गिर गए। हादसे के बाद उनके पिता राज मेहता, जो कि सेवानिवृत्त SBI निदेशक हैं, का दर्द और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

राज मेहता का कहना है कि युवराज ने हादसे के बाद उन्हें कॉल करके मदद मांगी थी। उन्होंने याद किया, “उन्होंने कहा, ‘मेरा एक्सीडेंट हो गया है, मुझे बचा लो, पापा।’ मैंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जब मैं मौके पर पहुंचा, तो मैंने अपने बेटे की मदद के लिए चिल्लाती आवाजें सुनीं, लेकिन मैं कुछ नहीं कर सका। यह पहली बार था जब मुझे इतनी असहायता महसूस हुई।”

90 मिनट तक बेटे की मदद के लिए पुकार:

राज मेहता के अनुसार, युवराज ने लगभग 90 मिनट तक मदद की पुकार लगाई। उनकी आवाज धीरे-धीरे कमजोर होती गई और आखिरकार बंद हो गई। राज कहते हैं, “मैं नींद नहीं ले पा रहा हूं। मुझे लगातार उसकी आवाज सुनाई देती है। मैं न्याय के लिए लड़ूंगा और चाहता हूं कि उनकी मौत के लिए जिम्मेदार सभी लोग जिम्मेदार ठहराए जाएं।”

युवराज का शव सुबह लगभग 4.30 बजे बरामद किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण एंटे-मॉर्टम डूबने से हुए दम घुटने और उसके बाद कार्डियक अरेस्ट बताया गया।

Noida Techie Yuvraj Drowns Amid Delayed Rescue

बचाव कार्य में देरी और प्रशासनिक विफलता:

हादसे के समय लगभग 80 बचावकर्मी, जिसमें राज्य और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF और NDRF) शामिल थे, मौके पर पहुंचे, लेकिन युवराज को समय पर बचाया नहीं जा सका। राज मेहता ने कहा, “यदि त्वरित कार्रवाई होती, तो युवराज की जान बच सकती थी। पुलिस और बचाव दल को क्यों देर हुई? ऐसा खतरनाक स्थान क्यों खुला छोड़ दिया गया?” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 112 हेल्पलाइन पर विशेषज्ञ गोताखोर क्यों नहीं थे।

पुलिस और अग्निशमन विभाग ने क्रेन, सीढ़ियां और साधारण नाव का उपयोग किया, लेकिन घना कोहरा और दृश्यता की कमी के कारण बचाव कार्य प्रभावित हुआ। NDRF के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनका बेस गाज़ियाबाद में था, और घटना स्थल 40 किमी दूर था। कोहरे की वजह से उन्हें मौके पर पहुंचने में समय लगा।

मौके पर मौजूद लोगों की बातें:

कुछ लोगों ने बताया कि पुलिस और फायरब्रिगेड कर्मी ट्रेंच में कूदने से हिचकिचा रहे थे, क्योंकि वहां बाहर निकले लोहे के सरिए थे। प्रारंभिक बचाव दल को तैरने का प्रशिक्षण नहीं था, और उनका मुख्य कार्य आग पर काबू पाना था। SDRF और NDRF को घटना की सूचना मिलने के बाद बुलाया गया और उन्होंने मौके पर आकर शव को बरामद किया।

एक अधिकारी ने कहा, “अगर आप बचाव प्रयास के वीडियो देखें, तो 10 मीटर आगे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। हम नियमों के अनुसार ऑपरेशन कर रहे थे। रस्सी की सीमा केवल 25 मीटर थी, जबकि कार 30 मीटर से अधिक गहराई में गिर गई थी।”

पिता का दर्द और न्याय की मांग:

राज मेहता का कहना है कि यह हादसा केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि संस्थागत विफलता का परिणाम है। उन्होंने कहा, “मेरा बेटा हादसे में नहीं, बल्कि सिस्टम की कमी में मरा। जो भी इसके जिम्मेदार हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए। किसी भी पिता को यह दर्द नहीं झेलना चाहिए।”

राज और परिवार के अन्य सदस्य सोमवार को हरिद्वार गए और युवराज के लिए अंतिम संस्कार और अन्य संस्कार किए।

युवराज का हादसा न केवल एक परिवार के लिए असहनीय पीड़ा लेकर आया है, बल्कि प्रशासन और आपदा प्रबंधन की तत्परता पर गंभीर सवाल भी उठाता है। हादसे की समयबद्ध प्रतिक्रिया और विशेषज्ञ बचाव दल की तैनाती की कमी ने एक युवा जीवन को समाप्त कर दिया। यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि सुरक्षा और त्वरित बचाव की प्रक्रियाओं में सुधार की कितनी आवश्यकता है।

राज मेहता की आवाज़ न्याय की पुकार है- “मेरे बेटे की मौत का जिम्मेदार हर व्यक्ति और संस्थान जवाबदेह ठहराया जाए।” यह केवल एक पिता की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन के लिए चेतावनी भी है कि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

जिम्मेदार पक्ष:

  1. प्रारंभिक आपदा प्रतिक्रिया दल (पुलिस और फायर ब्रिगेड)

    • घटना स्थल पर पहुंचने में देरी हुई।

    • तैरने या गहरे पानी में बचाव की तैयारी नहीं थी।

    • सुरक्षा का प्रबंध (जैसे ट्रेंच को सुरक्षित बनाना या रोशनी/सिस्टम) नहीं था।

  2. राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF और SDRF)

    • NDRF टीम को तुरंत बुलाया गया, लेकिन दूरी और कोहरे की वजह से मौके पर आने में समय लगा।

    • शुरुआती 30–45 मिनट में विशेषज्ञ गोताखोर उपलब्ध नहीं थे, जिससे युवराज को समय पर बचाया नहीं जा सका।

  3. स्थानीय प्रशासन और परियोजना प्रबंधक

    • निर्माणाधीन ट्रेंच सुरक्षित नहीं रखी गई।

    • खतरनाक स्थान पर कोई चेतावनी या बैरिकेडिंग नहीं थी।

नोएडा में युवराज की दुखद मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि संस्थागत और प्रशासनिक विफलताओं का उदाहरण है। प्रारंभिक बचाव में देरी, विशेषज्ञों की अनुपस्थिति और खतरनाक स्थान की असुरक्षा ने एक युवा जीवन को समाप्त कर दिया। उनके पिता राज मेहता का दर्द और न्याय की पुकार इस घटना की गंभीरता को और स्पष्ट करती है।

यह घटना प्रशासन और आपदा प्रबंधन सिस्टम में सुधार की आवश्यकता को उजागर करती है। भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए त्वरित और कुशल बचाव, सुरक्षा उपाय और जिम्मेदार प्रशासनिक निगरानी अनिवार्य हैं।

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