2025 के नोबेल पुरस्कार विजेता: हर साल अक्टूबर के पहले हफ्ते में दुनिया की निगाहें स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम और ऑस्लो की ओर जाती हैं। क्योंकि ये वो समय है जब नोबेल पुरस्कार विजेताओं की घोषणा होती है — वे लोग जो मानवता के लिए अपनी खोजों या योगदानों से नए आयाम खोलते हैं।

इस वर्ष (२०२५) की सबसे प्रमुख घोषणा नोबेल पुरस्कार (Physiology / Medicine) की रही। इस श्रेणी में इस वर्ष तीन वैज्ञानिकों — मैरी ई. ब्रंकओ (Mary E. Brunkow), फ्रेड राम्सडेल (Fred Ramsdell) और शिमोन सकागुची (Shimon Sakaguchi) — को यह सम्मान मिला है।
उनका खोज का विषय है: “परिधीय प्रतिरक्षा सहिष्णुता” (peripheral immune tolerance) — यानी हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे यह सुनिश्चित करती है कि वह हमारे ही शरीर की कोशिकाओं को हमला न कर दे।
प्रतिरक्षा प्रणाली और उसकी बारीकियाँ:
हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली हमें बाहरी रोगजनकों (बैक्टीरिया, वायरस इत्यादि) से बचाती है। लेकिन अगर यह गलती से हमारे खुद के स्वास्थ्य कोशिकाओं को ‘दुश्मन’ मान ले — तो समस्या खड़ी हो जाती है। इसी संवेदनशील संतुलन में Regulatory T-सेल्स (Regulatory T cells, या Treg cells) की भूमिका होती है — ये “सुरक्षा रक्षक” की तरह काम करती हैं, यह सुनिश्चित करती हैं कि इम्यून प्रतिक्रिया नियंत्रित रहे।
ब्रंकओ और राम्सडेल ने Treg कोशिकाओं की पहचान और कार्यप्रणाली में योगदान दिया, जबकि सकागुची ने यह खुलासा किया कि कैसे ये कोशिकाएं प्रतिरक्षा प्रणाली को आत्म-आक्रमण से रोकती हैं।
उनकी खोजों ने कई नए रास्ते खोले हैं — जैसे ऑटोइम्यून डिजीज (जहाँ शरीर की प्रतिरक्षा गलती से शरीर के अंगों पर हमला करती है) की समझ और उपचार के लिए।
अन्य नोबेल श्रेणियाँ — अभी तक…
अभी तक २०२५ के नोबेल पुरस्कारों की पूरी सूची घोषित नहीं हुई है। नोबेल कमेटी की परंपरा है कि परमाणु विभाजन (Physics), रसायन (Chemistry), साहित्य (Literature), शांति (Peace) आदि श्रेणियों की घोषणाएं अगले दिन किए जाते हैं।
उदाहरण के लिए:
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रसायन (Chemistry) श्रेणी की घोषणा ८ अक्टूबर को होगी।
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साहित्य (Literature) की घोषणा ९ अक्टूबर को होगी।
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शांति (Peace Prize) की घोषणा आमतौर पर १० अक्टूबर को होती है। (अभी २०२५ के विजेता घोषित नहीं हुए)
इसलिए, इस ब्लॉग की मुख्य जानकारी फिलहाल चिकित्सा / जीवविज्ञान श्रेणी की है।
नोबेल विजेताओं की प्रेरणा:
ये तीन वैज्ञानिक — ब्रंकओ, राम्सडेल और सकागुची — अपनी खोजों से यह बताते हैं कि वैज्ञानिक पथ केवल प्रयोगशाला में बीते घंटों का नाम नहीं है; यह मानव पीड़ा को कम करने, बीमारियों के इलाज के नए रास्ते खोलने और भविष्य को सुरक्षित बनाने का आग्रह है।
विज्ञान में उनकी यात्रा हमें दो बातें सिखाती है:
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धैर्य और निरंतरता — बड़ी खोजें एक दिन में नहीं होतीं। कई बार वर्षों तक प्रयोग, असफलताएँ और परीक्षण होते हैं।
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संबद्धता (Interconnectedness) — शरीर की प्रणालियाँ इतनी जटिल हैं कि एक खोज अनेक रोगों और उपचारों से जुड़ जाती है। एक प्रतिरक्षा खोज, कैंसर, ट्रांसप्लांट प्रतिक्रिया, ऑटोइम्यून रोग — इन सभी पर असर डाल सकती है।
२०२५ का नोबेल (चिकित्सा) पुरस्कार यह बताता है कि विज्ञान अभी भी मानव कल्याण के लिए नए मार्ग तलाश रहा है। इस खोज ने न सिर्फ प्रतिरक्षा प्रणाली की गुत्थियों को सुलझाया है, बल्कि रोगों के इलाज की दिशा को भी आगे बढ़ाया है।
जब बाकी श्रेणियों के विजेता भी घोषित हो जाएँगे, तो निश्चित रूप से हम एक और रंगीन तस्वीर पाएँगे — साहित्य की संवेदनाएँ, रसायन की जटिलता, शांति की आकांक्षाएँ — सब मिलकर एक बड़ी कहानी कहेंगे।
अगर तुम चाहो, तो मैं पूरी सूची (सभी श्रेणियों) के विजेताओं पर भी ८०० शब्द का हिंदी ब्लॉग तैयार कर सकता हूँ, जैसे ही वे घोषित हों। क्या करूँ?
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