Nipah Virus kolkata in Alert: कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर में चमगादड़ों की RT-PCR जांच शुरू

Nipah Virus kolkata in Alert: हाल के वर्षों में दुनिया ने कई संक्रामक बीमारियों का सामना किया है, जिनमें निपाह वायरस (Nipah Virus) एक गंभीर और जानलेवा संक्रमण के रूप में उभरा है। भारत में जब भी निपाह वायरस का नाम आता है, तो आमतौर पर केरल की घटनाएँ याद आती हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि पश्चिम बंगाल निपाह वायरस से प्रभावित होने वाले शुरुआती क्षेत्रों में शामिल रहा है। ऐसे में राज्य में निपाह वायरस को लेकर जागरूकता और सतर्कता बेहद ज़रूरी हो जाती है।

निपाह वायरस क्या है?

निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसका मुख्य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ (फ्रूट बैट्स) माने जाते हैं, जिन्हें “फ्लाइंग फॉक्स” भी कहा जाता है। यह वायरस संक्रमित जानवरों, दूषित भोजन या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैल सकता है। निपाह वायरस संक्रमण की मृत्यु दर काफी अधिक होती है, जो इसे और भी खतरनाक बनाती है।

Nipah Virus kolkata in Alert

पश्चिम बंगाल और निपाह वायरस का इतिहास:

भारत में निपाह वायरस का पहला बड़ा प्रकोप 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र में देखा गया था। इसके बाद 2007 में नदिया ज़िले में भी इसके मामले सामने आए। इन दोनों घटनाओं में बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हुए और कई लोगों की जान चली गई। इन प्रकोपों की खास बात यह थी कि संक्रमण का फैलाव अस्पतालों में मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच तेज़ी से हुआ, जिससे मानव-से-मानव संक्रमण की पुष्टि हुई।

लक्षण क्या होते हैं?

निपाह वायरस के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 4 से 14 दिनों के भीतर दिखाई देते हैं। शुरुआती लक्षण साधारण लग सकते हैं, लेकिन बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है।

मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • तेज बुखार

  • सिरदर्द

  • मांसपेशियों में दर्द

  • उल्टी और कमजोरी

  • सांस लेने में तकलीफ

  • मानसिक भ्रम या बेहोशी

  • गंभीर मामलों में एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन)

कई मामलों में मरीज कोमा में भी जा सकता है।

Nipah Virus kolkata in Alert

संक्रमण कैसे फैलता है?

निपाह वायरस के फैलने के प्रमुख तरीके हैं:

  1. चमगादड़ों द्वारा दूषित फल या खजूर का कच्चा रस

  2. संक्रमित सूअर या अन्य जानवरों से संपर्क

  3. संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल (लार, खांसी, खून) से संपर्क

  4. अस्पतालों में पर्याप्त संक्रमण नियंत्रण उपाय न होना

पश्चिम बंगाल जैसे घनी आबादी वाले राज्य में यह खतरा और बढ़ जाता है।

इलाज और वैक्सीन की स्थिति:

फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई विशेष दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इलाज मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर किया जाता है, जिसमें मरीज को आईसीयू में निगरानी, सांस लेने में सहायता और अन्य सहायक उपचार दिए जाते हैं। इसी कारण समय पर पहचान और आइसोलेशन बेहद महत्वपूर्ण है।

कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर में चमगादड़ों की RT-PCR जांच शुरू:

निपाह वायरस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच राष्ट्रीय चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (NIMR) ने कोलकाता के दक्षिणी हिस्से में स्थित अलीपुर प्राणी उद्यान में मौजूद चमगादड़ों की रैंडम RT-PCR (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन) जांच शुरू कर दी है। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या ये चमगादड़ निपाह वायरस के वाहक हैं। सूत्रों के अनुसार, NIMR की एक विशेष टीम ने गुरुवार और शुक्रवार की सुबह तड़के चिड़ियाघर में पहुंचकर चमगादड़ों से खून और स्वैब के नमूने एकत्र किए और भोर होने से पहले वहां से रवाना हो गई।

यह कदम राज्य में निपाह वायरस के संभावित स्रोत की पहचान के लिए उठाया गया है। इससे पहले उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम, बारासात और बसीरहाट क्षेत्रों में भी चमगादड़ों की जांच की जा चुकी है। कोलकाता में अलीपुर चिड़ियाघर ही ऐसा स्थान है जहां बड़ी संख्या में चमगादड़ पाए जाते हैं, इसलिए इसे निगरानी के लिए अहम माना जा रहा है। निपाह को लेकर लोगों की आशंकाओं को दूर करने के उद्देश्य से एकत्र किए गए सभी नमूनों को RT-PCR परीक्षण के लिए राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) भेजा गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सतर्क और वैज्ञानिक निगरानी संभावित प्रकोप को रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है।

Nipah Virus kolkata in Alert

सरकार और स्वास्थ्य तंत्र की भूमिका:

पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए अब केंद्र और राज्य सरकारें निपाह वायरस को लेकर पहले से अधिक सतर्क हैं। संदिग्ध मामलों की तुरंत जांच, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल और आम जनता को जागरूक करना—ये सभी कदम बेहद जरूरी हैं। पश्चिम बंगाल में सीमावर्ती इलाकों और घने शहरी क्षेत्रों में विशेष निगरानी की आवश्यकता रहती है।

आम लोगों को क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?

निपाह वायरस से बचाव के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी कदम अपनाए जा सकते हैं:

  • गिरे हुए या कटे-फटे फल खाने से बचें

  • बिना ढके हुए खजूर के रस का सेवन न करें

  • बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें

  • हाथों की नियमित सफाई करें

  • बुखार या संदिग्ध लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

  • अफवाहों से बचें और केवल विश्वसनीय स्रोतों की जानकारी पर भरोसा करें

निपाह वायरस भले ही आम बीमारी न हो, लेकिन इसका असर बेहद गंभीर हो सकता है। पश्चिम बंगाल का इतिहास हमें यह याद दिलाता है कि यह खतरा काल्पनिक नहीं, बल्कि वास्तविक है। समय पर सतर्कता, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और जागरूक नागरिक ही इस तरह की महामारियों से हमें सुरक्षित रख सकते हैं। डरने की नहीं, बल्कि समझदारी और सावधानी से आगे बढ़ने की ज़रूरत है।

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