बिच्छू घास का सूप Nettle Soup: बिच्छू घास, जिसे अंग्रेज़ी में Nettle और वैज्ञानिक नाम Urtica dioica से जाना जाता है, एक जंगली पत्तीदार पौधा है। इसके पत्तों पर छोटे-छोटे बारीक रोम होते हैं जो त्वचा को छूने पर जलन और खुजली पैदा करते हैं। यही कारण है कि इसे “बिच्छू घास” कहा जाता है। लेकिन यह पौधा जितना बाहर से चुभने वाला है, उतना ही भीतर से औषधीय गुणों से भरपूर भी है। उत्तराखंड, हिमाचल और नेपाल जैसे पहाड़ी इलाकों में बिच्छू घास का इस्तेमाल सदियों से भोजन और औषधि दोनों रूपों में होता आया है। इन इलाकों की पारंपरिक रसोई में बिच्छू घास का सूप या स्थानीय भाषा में “कंडाली का झोल” विशेष स्थान रखता है।

इतिहास और परंपरा:
बिच्छू घास का इस्तेमाल केवल भारत में ही नहीं, बल्कि यूरोप, एशिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में होता रहा है। मध्ययुगीन यूरोप में लोग इसे वसंत ऋतु में “डिटॉक्स सूप” के रूप में पीते थे ताकि शरीर को सर्दियों के बाद नई ऊर्जा मिल सके। आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में इसे रक्तशोधक, पाचन सुधारक और हड्डियों को मजबूत करने वाला माना गया है।
उत्तराखंड में, पारंपरिक लोककथाओं के अनुसार, कठिन समय और अकाल के दौर में लोग जंगल से बिच्छू घास लाकर इसका सूप या सब्ज़ी बनाते थे। यह न केवल पेट भरने वाला था, बल्कि ताकत और गर्माहट भी देता था। आज भी “कंडाली का झोल” पर्वतीय भोजन संस्कृति का अहम हिस्सा है और स्थानीय त्योहारों या खास मौकों पर इसे खास तौर पर परोसा जाता है।
बिच्छू घास के पोषक तत्व:
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विटामिन A, C, K और B कॉम्प्लेक्स से भरपूर।
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आयरन और कैल्शियम की उच्च मात्रा, जो खून की कमी और हड्डियों की मज़बूती में मदद करती है।
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प्रोटीन और फाइबर से समृद्ध, जो पाचन तंत्र के लिए लाभकारी है।
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शरीर को डिटॉक्स करने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक।
सामग्री (4 लोगों के लिए):
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ताज़ी बिच्छू घास की पत्तियाँ – 200 ग्राम
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प्याज – 1 मध्यम (बारीक कटा हुआ)
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लहसुन – 4-5 कलियाँ
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अदरक – 1 छोटा टुकड़ा (कद्दूकस किया हुआ)
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टमाटर – 1 मध्यम (बारीक कटा हुआ)
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घी/तेल – 2 बड़े चम्मच
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जीरा – 1 छोटा चम्मच
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हल्दी – ½ छोटा चम्मच
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नमक – स्वादानुसार
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काली मिर्च पाउडर – ½ छोटा चम्मच
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पानी – 3 कप
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नींबू का रस – 1 छोटा चम्मच (वैकल्पिक)
बनाने की विधि:
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बिच्छू घास तैयार करना
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सबसे पहले दस्ताने या मोटे कपड़े का उपयोग करके बिच्छू घास की पत्तियाँ तोड़ें।
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इन्हें अच्छी तरह पानी से धोकर साफ कर लें।
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उबालते पानी में 3-4 मिनट डालकर ब्लांच कर लें। इससे इसकी चुभन खत्म हो जाएगी और पत्तियाँ नरम हो जाएँगी।
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मसाला भूनना
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कड़ाही या पैन में घी/तेल गरम करें।
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उसमें जीरा डालकर तड़काएँ।
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प्याज, लहसुन और अदरक डालकर सुनहरा भूरा होने तक भूनें।
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अब टमाटर, हल्दी और नमक डालकर मसाला तैयार करें।
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सूप बनाना
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ब्लांच की हुई बिच्छू घास की पत्तियाँ मसाले में डालें।
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2-3 मिनट तक हल्का भूनें।
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अब इसमें 3 कप पानी डालें और 10 मिनट तक धीमी आँच पर पकाएँ।
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जब सब कुछ अच्छी तरह गल जाए, तो इसे हैंड ब्लेंडर या मिक्सर में पीस लें।
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पीसने के बाद दोबारा गैस पर रखकर उबालें और काली मिर्च डालें।
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परोसना
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सूप को कटोरियों में डालें।
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ऊपर से नींबू का रस डालकर गरमा-गरम परोसें।
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चाहें तो मक्खन या ताज़ी क्रीम से सजाएँ।
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स्वाद और स्वास्थ्य लाभ:
बिच्छू घास का सूप हल्का, पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर होता है। इसका स्वाद पालक के सूप जैसा होता है, लेकिन इसमें हल्की मिट्टी और जंगलीपन की खुशबू आती है। नियमित रूप से इसे पीने से –
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खून की कमी दूर होती है।
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शरीर में ताकत और गर्माहट बनी रहती है।
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पाचन बेहतर होता है।
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सर्दी-जुकाम और थकान में राहत मिलती है।
बिच्छू घास का सूप सिर्फ़ एक डिश नहीं, बल्कि हिमालयी परंपरा और लोकज्ञान का प्रतीक है। जहाँ लोग साधारण दिखने वाली इस “चुभने वाली घास” को बेकार समझते हैं, वहीं पहाड़ के लोग इसे जीवनदायिनी मानते हैं। इसका सूप आज भी स्थानीय भोजन का हिस्सा है और धीरे-धीरे इसे स्वास्थ्य के प्रति सजग लोग भी अपनाने लगे हैं। अगर कभी आपको पहाड़ की यात्रा का मौका मिले, तो कंडाली का झोल ज़रूर चखें—यह स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का अनोखा संगम है।
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