Nepal News: नेपाल में पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली पर रोक, जेनरेशन जेड विरोध प्रदर्शनों की जांच जारी

Nepal News: नेपाल में हाल ही में हुए जेनरेशन जेड विरोध प्रदर्शनों के दौरान शारीरिक और मानवीय नुकसान की जांच के लिए गठित एक जांच आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है।

इसके साथ ही आयोग ने संबंधित सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे पूर्व गृह सचिव गोकर्ण मणि दुवादी, राष्ट्रीय जांच विभाग के पूर्व प्रमुख हुतराज थापा और काठमांडू के पूर्व मुख्य जिला अधिकारी छबी रिजाल की विदेश यात्रा को भी प्रतिबंधित करें। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि ये सभी व्यक्ति जांच के दायरे में हैं और उन्हें किसी भी समय पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

सरकारी एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि बिना अनुमति के ये व्यक्ति काठमांडू घाटी नहीं छोड़ सकें।

जेनरेशन जेड(Gen-z) विरोध प्रदर्शन और हिंसा | Nepal News

8 और 9 सितंबर को जेनरेशन जेड(Gen-z) के विरोध प्रदर्शन के पहले दिन पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में नेपाल में कम से कम 19 लोग मारे गए थे। इसके बाद के दिनों में हिंसा और बढ़ गई।

कुछ घायलों की घावों के कारण मृत्यु हो गई, जबकि अन्य आगजनी और झड़पों में मारे गए। इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान जेनरेशन जेड के प्रदर्शनकारियों ने हत्याओं और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की मांग की।

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जांच आयोग का गठन और कार्य

पूर्व विशेष न्यायालय अध्यक्ष गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व में गठित जांच आयोग का मुख्य उद्देश्य जेनरेशन जेड विरोध प्रदर्शनों में हुए मानवीय और भौतिक नुकसान की जांच करना है। आयोग को यह भी काम सौंपा गया है कि वे घटनाओं के कारणों का पता लगाएं और निष्कर्षों तथा सिफारिशों के साथ एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह अपनी सिफारिशों के कार्यान्वयन के लिए एक ठोस कार्य योजना प्रस्तुत करे। इससे सरकार और जनता दोनों को जांच की निष्पक्षता और जवाबदेही का भरोसा मिलेगा।

नेपाल में राजनीतिक बदलाव

जेनरेशन जेड(Gen-z) विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बाद नेपाल में राजनीतिक परिदृश्य भी बदल गया है। वर्तमान में पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर रही हैं। इस अंतरिम सरकार का मुख्य कार्य अगले वर्ष 5 मार्च को प्रतिनिधि सभा के लिए चुनाव कराना है।

जांच आयोग का गठन सरकार और जेनरेशन जेड विरोध नेताओं के बीच बनी सहमति का हिस्सा था। इसका उद्देश्य विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बाद शांति बहाल करना और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना है।

जांच आयोग की सिफारिशों का महत्व

जांच आयोग की रिपोर्ट नेपाल के राजनीतिक और सामाजिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। आयोग की सिफारिशें उन सभी के खिलाफ हो सकती हैं जो हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन में शामिल रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और अन्य पांच नेताओं पर लगाई गई यात्रा प्रतिबंध की वजह यही है कि उन्हें जांच के दौरान हर समय उपस्थित रहना जरूरी है। यह कदम जनता और सरकार के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में लिया गया है।

भविष्य की चुनौतियां

नेपाल के लिए चुनौती यह है कि अंतरिम सरकार चुनावों तक स्थिति को स्थिर रखे और हिंसा से उत्पन्न सामाजिक तनाव को कम करे। जेनरेशन जेड प्रदर्शनकारियों की मांगें, मानवाधिकारों की रक्षा, और राजनीतिक जवाबदेही सरकार के लिए प्राथमिकता बन गई हैं।

साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठन इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। नेपाल की सरकार को जांच आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर सही कार्रवाई करनी होगी ताकि भविष्य में इसी तरह की हिंसा से बचा जा सके।

नेपाल में जेनरेशन जेड विरोध प्रदर्शनों के बाद पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली सहित पांच नेताओं पर विदेश यात्रा प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कदम जांच की निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

आयोग की जांच रिपोर्ट और सिफारिशें नेपाल की राजनीति और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगी। अंतरिम सरकार के नेतृत्व में देश को चुनावों तक स्थिर रखना और जनता का भरोसा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण कार्य होगा।

नेपाल की जनता और राजनीतिक नेतृत्व दोनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हिंसा, मानवाधिकार उल्लंघन और राजनीतिक अस्थिरता से बचा जा सके।

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