Nepal Gen-Z Protest: नेपाल में जिस आंदोलन की चिंगारी सोशल मीडिया बैन से भड़की थी, उसने आज पूरे देश को हिला दिया है। यह आंदोलन, जिसे लोग ‘जेन-जी आंदोलन’ कह रहे हैं, अब केवल नेपाल की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसकी गूँज पड़ोसी भारत तक सुनाई देने लगी है। दिल्ली स्थित नेपाल एंबेसी पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सवाल यही उठता है कि आखिर यह आंदोलन है क्या, क्यों भड़का और कैसे इसने नेपाल को हिंसा, राजनीतिक संकट और अस्थिरता के दौर में धकेल दिया?
जेन-जी आंदोलन की शुरुआत | Nepal Gen-Z Protest

नेपाल सरकार ने 4 सितंबर को एक बड़ा कदम उठाते हुए फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सऐप समेत 26 प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया। वजह यह बताई गई कि इन कंपनियों ने तय समय-सीमा में नेपाल में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। मंत्रालय ने 28 अगस्त से सात दिन का समय दिया था, लेकिन किसी भी कंपनी ने आवेदन नहीं किया।
सरकार का दावा था कि यह कदम साइबर अपराध और फेक न्यूज रोकने के लिए उठाया गया। लेकिन युवा पीढ़ी—जिसे हम जेन-जी कह रहे हैं—ने इसे सीधे अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना। सोशल मीडिया पहले से ही युवाओं के लिए अभिव्यक्ति और विरोध का बड़ा माध्यम रहा है। यही वजह रही कि जैसे ही प्लेटफॉर्म्स बंद हुए, गुस्सा सड़कों पर उतर आया।
सोशल मीडिया से सड़क तक
सरकार का इरादा था कि सोशल मीडिया बैन से अफवाहें और नफरत फैलाने वाले कंटेंट रुकेंगे। लेकिन हुआ इसका उल्टा। युवाओं ने इसे सेंसरशिप और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन माना। उन्होंने विरोध का नया प्रतीक भी गढ़ा—“Nepo Kids”। यह ट्रेंड सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें नेताओं और बड़े अफसरों के बच्चों की आलीशान जिंदगी की तस्वीरें पोस्ट की गईं। संदेश साफ था: सत्ता और राजनीति कुछ खास परिवारों तक सिमट गई है और आम युवाओं के लिए न तो अवसर हैं और न ही रोजगार।
हिंसा और आगजनी में बदला आंदोलन
शुरुआत में यह आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन धीरे-धीरे इसका रूप हिंसक हो गया। 8 सितंबर को हालात इतने बिगड़े कि काठमांडू की संसद, सर्वोच्च न्यायालय, सिंहदरबार, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आवास तक को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया।
पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल के घर पर हमला हुआ, उनकी पत्नी की दर्दनाक मौत आगजनी में हो गई। कई पुलिसकर्मियों और सुरक्षाबलों पर हमले हुए। कुछ को निहत्थे पीटा गया, जिससे हालात और बिगड़ गए। राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को दौड़ा-दौड़ाकर मारने की घटनाओं ने माहौल को और अधिक भयावह बना दिया।
सेना की तैनाती और कर्फ्यू
स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख सरकार को सेना बुलानी पड़ी। राजधानी के कई हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया गया। ट्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक प्रदर्शनकारियों ने कब्जा कर लिया, जिसके चलते भारत समेत कई देशों की उड़ानों पर असर पड़ा। कई फ्लाइट्स को दिल्ली और लखनऊ डायवर्ट करना पड़ा।
सुरक्षा बलों ने जगह-जगह गोली चलाई। अनुमान है कि अब तक 19 से 23 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हैं। हेलीकॉप्टरों से मंत्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
राजनीतिक संकट और इस्तीफों की झड़ी
हिंसा और जनआक्रोश का असर राजनीति पर भी पड़ा। प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। गृह मंत्री रमेश लेखक और कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी ने भी पद त्याग दिया। इतना ही नहीं, संसद के 21 सांसदों ने भी सामूहिक इस्तीफा दिया।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल पर भी दबाव इतना बढ़ा कि खबरें आने लगीं कि उन्होंने भी पद छोड़ने का मन बना लिया है। राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर ने नेपाल को असमंजस की स्थिति में खड़ा कर दिया है।
नेपाली सेना की अपील
काठमांडू से जारी नोटिस में नेपाली सेना ने गहरी चिंता जताई है। सेना ने कहा कि वह देश की स्वतंत्रता, संप्रभुता, भौगोलिक अखंडता और राष्ट्रीय एकता की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सेना ने जनता, खासकर युवाओं, से संयम बरतने और सामाजिक समरसता बनाए रखने की अपील की है।
सोशल मीडिया बैन वापस, लेकिन गुस्सा बरकरार
लगातार हिंसा और मौतों के बीच सरकार को झुकना पड़ा। 9 सितंबर को नेपाल ने सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध हटा दिया। हालांकि, यह कदम युवाओं के गुस्से को शांत करने में नाकाम रहा। उनकी मांगें अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रह गईं। वे पारदर्शिता, न्याय, रोजगार और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मांग पर अड़े हुए हैं।
सरकार ने मुआवजे का ऐलान किया, घायलों के मुफ्त इलाज का वादा किया और 15 दिन के भीतर जांच आयोग गठित करने की बात कही। मगर भरोसा अब टूटा हुआ नजर आ रहा है।
दिल्ली तक गूँज — नेपाल एंबेसी पर बढ़ी सुरक्षा
नेपाल में हिंसा की खबरें भारत तक पहुंचीं। दिल्ली पुलिस को इनपुट मिला कि कुछ लोग मंडी हाउस स्थित नेपाल एंबेसी के बाहर प्रदर्शन कर सकते हैं। इसे देखते हुए एंबेसी पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी स्थिति शांत है, लेकिन पुलिस बल तैनात है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। फिलहाल किसी विरोध की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन हालात को देखते हुए एहतियातन कदम उठाए गए हैं।
भारत के नागरिकों को सतर्कता की सलाह
भारत सरकार ने नेपाल में मौजूद अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय नागरिक अनावश्यक यात्रा से बचें और वहां रह रहे लोग हालात से लगातार अपडेट रहें।
नेपाल के हालात का असर भारतीय यात्रियों और व्यापारियों पर भी पड़ा है। काठमांडू हवाई अड्डे के बंद होने से कई उड़ानें बाधित हुईं। इंडिगो समेत कई एयरलाइंस ने अपनी सेवाएं अस्थायी तौर पर रोक दीं।
जेन-जी आंदोलन यह साबित करता है कि नई पीढ़ी अब चुप नहीं बैठने वाली। नेपाल में यह संघर्ष केवल सोशल मीडिया बैन का विरोध नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार, असमानता और बेरोजगारी जैसे गहरे मुद्दों का विस्फोट है।
नेपाल में हालात अब भी नाजुक हैं। सरकार बदलने और बैन हटने के बावजूद आंदोलन थमा नहीं। यह दिखाता है कि असली मांग है राजनीतिक सुधार, पारदर्शिता और युवाओं की भागीदारी।
भारत के लिए यह आंदोलन चेतावनी भी है कि पड़ोसी देशों की आंतरिक हलचल का असर सीधे हमारी सीमाओं और सुरक्षा पर पड़ सकता है। दिल्ली में नेपाल एंबेसी पर बढ़ी सुरक्षा इसी बात का प्रमाण है।
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