Neha Singh After the Robot Controversy: नेहा सिंह ने चुकाई बड़ी कीमत, रोबोट डॉग विवाद के बाद प्रोफेसरशिप से दिया इस्तीफ़ा

Neha Singh After the Robot Controversy: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में Galgotias University का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया और वजह बना एक “रोबोट डॉग”। लेकिन कहानी सिर्फ एक रोबोट तक सीमित नहीं रही। मामला बढ़ते-बढ़ते एक बड़े विवाद, राजनीतिक बहस और अंत में प्रोफेसर Neha Singh के इस्तीफ़े तक पहुँच गया।

आइए समझते हैं, पूरा मामला क्या है, आसान और साफ़ भाषा में।

Neha Singh After the Robot Controversy

क्या हुआ AI Impact Summit में?

India AI Impact Summit 2026 में देशभर की संस्थाएँ अपनी AI उपलब्धियाँ दिखा रही थीं। इसी मंच पर गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने एक रोबोटिक डॉग प्रदर्शित किया, जिसे “Orion” नाम से पेश किया गया।

प्रस्तुति के दौरान यह बताया गया कि इस रोबोट पर विश्वविद्यालय के छात्रों ने काम किया है और इसे विकसित किया गया है।

पहली नज़र में यह एक शानदार उपलब्धि लग रही थी। लेकिन कहानी ने यहीं मोड़ लिया।

असली ट्विस्ट कहाँ आया?

सोशल मीडिया पर कुछ टेक एक्सपर्ट्स और यूज़र्स ने पहचान लिया कि यह रोबोट असल में चीन की कंपनी Unitree Robotics का तैयार-मॉडल Unitree Go2 है, जो बाजार में उपलब्ध है। यानी हार्डवेयर यूनिवर्सिटी द्वारा नहीं बनाया गया था।

इसके बाद सवाल उठने लगे:

  • क्या इसे पूरी तरह यूनिवर्सिटी का “विकसित” प्रोजेक्ट बताया गया?

  • क्या शब्दों का इस्तेमाल गलत तरीके से हुआ?

  • या फिर बात को गलत समझा गया?

वीडियो वायरल हुआ, मीम्स बने, और विवाद तेज़ हो गया।

नेहा सिंह ने क्या कहा?

विवाद बढ़ने के बाद प्रोफेसर नेहा सिंह ने सफ़ाई दी कि उनका इरादा गलत जानकारी देने का नहीं था।
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने “developed” शब्द का इस्तेमाल किया, तो उनका मतलब छात्रों द्वारा रोबोट पर किए जा रहे रिसर्च और एक्सपेरिमेंट से था, न कि हार्डवेयर निर्माण से।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनकी बात स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पाई और जिस तरह से वीडियो वायरल हुआ, उससे गलतफहमी बढ़ी।

फिर क्या हुआ?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, समिट से विश्वविद्यालय का स्टॉल हटा दिया गया।
कुछ ही समय बाद नेहा सिंह ने अपना इस्तीफ़ा दे दिया और LinkedIn पर “Open To Work” स्टेटस अपडेट कर दिया।

यह कदम इस पूरे मामले को और बड़ा बना गया। सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई दिखी –
कुछ ने इसे संचार की गलती बताया,
तो कुछ ने इसे अकादमिक पारदर्शिता का मामला कहा।

नेहा सिंह कौन हैं?

नेहा सिंह कंप्यूटर साइंस बैकग्राउंड से आती हैं।
उन्होंने BITS Pilani (Hyderabad Campus) से पीएचडी की है और उनका शोध Computational Geometry और Mesh Generation जैसे तकनीकी विषयों में रहा है।

वे अगस्त 2023 से गलगोटियास यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थीं और AI व रोबोटिक्स से जुड़े कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करती थीं।

इस घटना से क्या सीख मिलती है?

यह मामला सिर्फ एक रोबोट डॉग का नहीं है।
यह तीन बड़ी बातों की याद दिलाता है:

शब्दों की ताकत:

टेक दुनिया में “developed” और “experimented on” जैसे शब्दों का मतलब अलग-अलग होता है। गलत शब्द बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है।

पारदर्शिता की ज़रूरत:

AI और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में विश्वसनीयता सबसे बड़ी पूंजी है।

सोशल मीडिया का असर:

एक छोटा वीडियो भी मिनटों में राष्ट्रीय मुद्दा बन सकता है।

AI Impact Summit में जो होना था, वह भारत की तकनीकी ताकत का प्रदर्शन था।
लेकिन एक संचार-गलती ने पूरी कहानी बदल दी।

नेहा सिंह का इस्तीफ़ा इस बात की याद दिलाता है कि आज के डिजिटल दौर में हर शब्द मायने रखता है।
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि रोबोट किसने बनाया-
सवाल यह है कि हम तकनीकी उपलब्धियों को कैसे पेश करते हैं।

तकनीक का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन उसके साथ ईमानदारी और स्पष्टता भी उतनी ही ज़रूरी है।

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