Navratri 2025 Day 4: जानें मां कूष्मांडा की पूजा विधि, शुभ रंग, मंत्र और महत्व

Navratri 2025 Day 4: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति की आराधना का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। साल में दो बार चैत्र और शारदीय नवरात्रि का आयोजन होता है। इस बार शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर 2025 से शुरू होकर 7 अक्टूबर 2025 तक मनाई जाएगी। नवरात्रि के हर दिन देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। चौथे दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की उपासना का विधान है।

सनातन परंपरा के अनुसार मां कूष्मांडा ही ब्रह्मांड की सृष्टि की रचयिता मानी जाती हैं। इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। मां कूष्मांडा के पूजन से जीवन में ऊर्जा, उत्साह, स्वास्थ्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

मां कूष्मांडा का स्वरूप और विशेषता | Navratri 2025 Day 4

Navratri 2025 Day 4

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं। उनके दाएं हाथ में कमल, धनुष, बाण और कमंडल है जबकि बाएं हाथ में गदा, चक्र और जपमाला है। मां का वाहन सिंह है। उनका स्वरूप बेहद तेजस्वी और दिव्य बताया गया है।

कहा जाता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब मां कूष्मांडा ने अपने ईश्वरत्व से ब्रह्मांड की रचना की। यही वजह है कि इन्हें ब्रह्मांड की जननी भी कहा जाता है।

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा क्यों?

नवरात्रि के पहले तीन दिन मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी और मां चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। चौथे दिन शक्ति साधना के इस पर्व में साधक मां कूष्मांडा का पूजन करते हैं।

मान्यता है कि मां कूष्मांडा की पूजा से साधक को जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य का वरदान मिलता है। इसके अलावा उनके आशीर्वाद से घर में सुख-समृद्धि आती है और साधक का आत्मविश्वास मजबूत होता है।

नवरात्रि 2025 Day 4: मां कूष्मांडा की पूजा विधि

मां कूष्मांडा की पूजा विधि बेहद सरल और फलदायी मानी गई है। इस दिन भक्त सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। पूजा घर को साफ करके पूर्व या ईशान कोण में चौकी पर पीले कपड़े का आसन बिछाएं। उस पर मां कूष्मांडा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।

इसके बाद गंगाजल या किसी पवित्र जल से मूर्ति का शुद्धिकरण करें। माता को फूल, अक्षत, रोली, चंदन, धूप, दीप, वस्त्र और मिठाई अर्पित करें। पूजा में विशेष ध्यान रखा जाता है कि भोग में पीले रंग की मिठाई ही लगाई जाए, क्योंकि मां को पीला रंग बेहद प्रिय है।

पूजन के समय दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी कवच का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अंत में मां कूष्मांडा की आरती करें और हाथ जोड़कर क्षमा याचना करें।

मां कूष्मांडा की पूजा में प्रयोग होने वाला शुभ रंग

नवरात्रि के चौथे दिन पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि मां कूष्मांडा को पीला रंग अत्यधिक प्रिय है।

इस दिन भक्तों को पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए और मां को पीले फूल, पीली मिठाई, पीली चूड़ियां, पीला सिंदूर और पीले फल अर्पित करने चाहिए। ऐसा करने से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं और साधक को आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

मां कूष्मांडा की पूजा का मंत्र

देवी की उपासना में मंत्रों का विशेष महत्व है। श्रद्धा और विश्वास के साथ जपे गए मंत्र साधक को मानसिक शांति और दिव्य ऊर्जा प्रदान करते हैं।

मां कूष्मांडा की पूजा में निम्न मंत्रों का जाप किया जा सकता है:

  • ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः
  • कूष्मांडा: ऐं ह्रीं देव्यै नमः

इन मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

मां कूष्मांडा की कृपा से क्या मिलता है फल

हिंदू मान्यताओं के अनुसार मां कूष्मांडा की पूजा से साधक को असाधारण ऊर्जा मिलती है। कहा जाता है कि उनकी कृपा से शरीर में स्वास्थ्य और मन में प्रसन्नता बनी रहती है।

उनके आशीर्वाद से घर में धन, वैभव और ऐश्वर्य का संचार होता है। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य से जुड़ी समस्याएं हैं, उन्हें भी मां कूष्मांडा की साधना से लाभ मिलता है।

नवरात्रि व्रत और मां कूष्मांडा

नवरात्रि में व्रत करने का विशेष महत्व है। व्रत के दौरान भक्त दिनभर फलाहार या केवल दूध और फल का सेवन करते हैं। कुछ लोग केवल जल ग्रहण करके भी माता की आराधना करते हैं।

चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करते समय व्रत का संकल्प जरूर लेना चाहिए। यह संकल्प साधक की मनोकामनाओं की पूर्ति करता है और उसकी आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाता है।

नवरात्रि 2025 Day 4: तिथि और शुभ मुहूर्त

नवरात्रि 2025 का चौथा दिन 2 अक्टूबर 2025, गुरुवार को पड़ रहा है। इस दिन शुभ मुहूर्त प्रातःकाल से लेकर दिनभर रहेगा। हालांकि पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त और प्रातःकाल का समय सबसे उत्तम माना गया है।

मां कूष्मांडा से जुड़ी मान्यता और कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और हर तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी अद्भुत शक्ति से सूर्य और ब्रह्मांड की रचना की।

मां की मुस्कान से अंडाकार ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई और इसीलिए उन्हें कूष्मांडा कहा गया। यह कथा दर्शाती है कि मां की कृपा से साधक का जीवन भी अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होता है।

          नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा की पूजा और आराधना के लिए अत्यंत शुभ है। इस दिन भक्त अगर पूरे विधि-विधान के साथ मां की पूजा करें, पीले रंग का प्रयोग करें और श्रद्धा से मंत्र जप करें, तो उन्हें निश्चित ही मां की कृपा प्राप्त होती है।

मां कूष्मांडा की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि, ऊर्जा और स्वास्थ्य का संचार होता है। नवरात्रि 2025 में चौथे दिन की पूजा से हर साधक के जीवन में नए प्रकाश और उत्साह का आगमन होगा।

ऐसे और भी Spirituality टॉपिक के ऊपर लेखों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें! Khabari bandhu पर पढ़ें देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरें — बिज़नेस, एजुकेशन, मनोरंजन, धर्म, क्रिकेट, राशिफल और भी बहुत कुछ।

Navratri Vrat Niyam in Hindi 2025: नवरात्रि व्रत में इन गलतियों से बचें, मिलेगा मां का आशीर्वाद

Navratri Vrat Niyam 2025: नवरात्रि व्रत में भूलकर भी न खाएं ये चीजें, वरना अधूरा रह जाएगा उपवास

Jivitputrika Vrat 2025: कब है जीवित्पुत्रिका व्रत, 13 या 14 सितंबर? जानें सही तिथि, महत्व और पूरी कथा

Leave a Comment

Exit mobile version