इस बार मॉनसून में इतनी ज्यादा बारिश क्यों हो रही है? कारण और असर

इस बार मॉनसून में इतनी ज्यादा बारिश क्यों हो रही है: इस साल मॉनसून सीज़न ने सभी को चौंका दिया है। गाँव से लेकर शहर तक हर जगह असामान्य बारिश का पैटर्न देखने को मिल रहा है। खेतों में जलभराव, सड़कों पर पानी भरना और लगातार बदलते मौसम ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है। सवाल यह है कि आखिर इस बार बारिश इतनी ज़्यादा क्यों हो रही है? आइए विस्तार से समझते हैं।

इस बार मॉनसून में इतनी ज्यादा बारिश क्यों हो रही है
इस बार मॉनसून में इतनी ज्यादा बारिश क्यों हो रही है

मॉनसून की गहराई: सामान्य से अधिक बारिश का पैटर्न

भारत के कई हिस्सों में इस बार बारिश का स्तर औसत से कई गुना ज़्यादा दर्ज किया गया। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में कई दिनों तक सामान्य से कई सौ प्रतिशत अधिक बारिश हुई।

कई ज़िलों में जुलाई–अगस्त के दौरान बारिश पिछले वर्षों की तुलना में 30–40% तक ज़्यादा रही। कुछ क्षेत्रों में तो 3–4 गुना तक अधिक वर्षा देखी गई। यह केवल किसी एक दिन की बात नहीं बल्कि पूरे मॉनसून में बनी रहने वाली स्थिति रही।

बारिश की तह: कारण क्या हैं?

  1. चक्रवाती परिसंचरण और वायुमंडलीय दबाव
    इस बार उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर एक से अधिक ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवात बने रहे। इनके कारण समुद्र से लगातार नमी आती रही और बादल बनने की प्रक्रिया तेज़ हो गई।

  2. मॉनसून ट्रफ की स्थिति
    मॉनसून ट्रफ यानी वायुमंडलीय दबाव की वह रेखा, जो आमतौर पर मध्य भारत से होकर गुजरती है, इस बार अपने सामान्य स्थान पर स्थिर रही। इस वजह से मॉनसून की लहरें लगातार सक्रिय बनी रहीं और बारिश का क्रम थमा नहीं।

  3. पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव
    सामान्यतः पश्चिमी विक्षोभ ठंडी और शुष्क हवाएँ लाता है, लेकिन इस बार यह मॉनसून के साथ मिलकर सक्रिय हो गया। नतीजतन बारिश का असर और तेज़ हो गया।

  4. जलवायु परिवर्तन का असर
    वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मॉनसून अब और अधिक अस्थिर और चरम बन गया है। बढ़ते तापमान से हवा अधिक नमी धारण करती है और जब यह नमी गिरती है तो बहुत भारी बारिश होती है।

  5. क्लाउडबर्स्ट जैसी घटनाएँ
    पहाड़ी इलाकों में इस बार कई क्लाउडबर्स्ट दर्ज किए गए। क्लाउडबर्स्ट का मतलब है बहुत कम समय में 100 मिमी से अधिक बारिश होना। ऐसी घटनाएँ अचानक होती हैं और भारी नुकसान पहुँचाती हैं।

बारिश का असर: खेती और जीवन पर प्रभाव

  • खेती पर असर: खेतों में जलभराव होने से धान और कपास जैसी फसलें प्रभावित हुईं। कई जगह किसानों को दोबारा बीज बोने की नौबत आ गई।

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर पर दबाव: लगातार बारिश से सड़कों, पुलों और बिजली व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। कई गाँव और कस्बे बाहरी दुनिया से कट गए।

  • बाढ़ जैसी स्थिति: निचले इलाकों में पानी भर गया, जिससे परिवहन बाधित हुआ और लोगों को नाव या अस्थायी साधनों का सहारा लेना पड़ा।

  • स्कूल और कामकाज प्रभावित: लगातार बारिश की वजह से बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कत हुई और कई दिनों तक आम जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा।

इस साल की असामान्य बारिश कोई एक कारण से नहीं बल्कि कई कारणों के संयुक्त प्रभाव से हुई।

  • वायुमंडलीय चक्रवात,

  • पश्चिमी विक्षोभ,

  • मॉनसून ट्रफ की स्थिर स्थिति,

  • समुद्र से लगातार आती नमी,

  • और जलवायु परिवर्तन—
    इन सभी ने मिलकर बारिश की तीव्रता को बढ़ाया।

परिणामस्वरूप खेती, सड़कें, घर, और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुए। यह स्थिति हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमें अब जलवायु-लचीले ढाँचों, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और मौसम की सही चेतावनी प्रणालियों की ज़रूरत है। आने वाले वर्षों में ऐसी परिस्थितियाँ और भी अधिक हो सकती हैं, इसलिए आज से ही तैयारी करना आवश्यक है।

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