Mohammad Deepak From Uttarakhand: उत्तराखंड के कोटद्वार में एक ऐसे व्यक्ति की कहानी जिसने दिखा दिया कि मानवता धर्म से ऊपर है। दीपक कुमार, एक जिम के मालिक, ने एक मुस्लिम दुकानदार को धमकाने वाले लोगों का सामना किया और इस बहादुरी भरे कदम के कारण सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। उन्होंने कहा, “मैं न हिंदू हूँ, न मुस्लिम, न सिख, और न ही ईसाई। मैं पहले और सबसे पहले एक मानव हूँ। क्योंकि जब मैं मर जाऊँगा, मुझे भगवान और मानवता के सामने जवाब देना होगा, किसी धर्म के सामने नहीं।”
Deepak, who fearlessly protected a Muslim shopkeeper from a violent Bajrang Dal mob, showed the kind of bravery our society needs.
Our group of friends wants to honor him. If anyone can share his contact, please do, we want to personally present him a token of appreciation.… pic.twitter.com/dULvkf9hsW
— Mohd Shadab Khan (@VoxShadabKhan) January 31, 2026
घटना का विवरण:
26 जनवरी, 2026 को दीपक कुमार अपने एक दोस्त की दुकान पर थे, जब उन्होंने देखा कि 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद को धमकाया जा रहा था। धमकाने वाले लोग खुद को बजरंग दल का सदस्य बता रहे थे और उन्हें अपनी दुकान का नाम “Baba School Dress” बदलने के लिए दबाव डाल रहे थे। “बाबा” शब्द आमतौर पर हिन्दू धार्मिक पुरुषों के लिए इस्तेमाल होता है, और धमकाने वालों का कहना था कि यह शब्द केवल हिन्दुओं के लिए सही है।
दीपक ने सीधे उनका सामना किया और पूछा, “दुकान 30 साल पुरानी है, क्या आप इसका नाम बदलेंगे?” जब उनसे उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने गर्व से कहा, “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।” यह वाक्य उनकी भारतीयता और सभी के प्रति समानता का संदेश था।
दीपक कुमार का संदेश:
दीपक का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। उन्होंने कहा, “हमारे देश को नफरत की नहीं, प्यार और अपनापन की जरूरत है। आप जितनी नफरत फैलाना चाहो, रोक नहीं सकते, लेकिन प्यार फैलाना बहुत बड़ा काम है।”
यह संदेश न केवल सामाजिक एकता का था बल्कि भारत में धर्म और मानवता की सर्वोच्चता को भी दर्शाता है।
पुलिस और कानूनी कार्रवाई:
वकील अहमद ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई। कोटद्वार पुलिस ने बजरंग दल के कथित दो सदस्यों, गौरव कश्यप और शक्ति सिंह गोंसाई, के खिलाफ FIR दर्ज की। उनके अलावा 30-40 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई, जिन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध किया और पुलिस कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया। आरोपों में मानवता को चोट पहुँचाने, धमकाने, और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसी धाराएं शामिल हैं।
सोशल मीडिया और प्रतिक्रिया:
दीपक के इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर उनकी बहादुरी के लिए कई मुस्लिम और अन्य लोग उनका धन्यवाद कर रहे हैं, वहीं कुछ हठधर्मी लोग उन्हें “देशद्रोही” कह रहे हैं। उनके संदेश ने देश में धार्मिक सहिष्णुता और समानता पर बहस को जन्म दिया।
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व:
इस घटना ने यह दिखाया कि:
- मानवता धर्म से ऊपर है।
- बहादुरी और सही कार्य के लिए खड़े होने से समाज में सकारात्मक संदेश फैल सकता है।
- सोशल मीडिया आज के समय में सामाजिक चेतना और बहादुरी को वैश्विक स्तर पर फैलाने का माध्यम बन गया है।
दीपक ने अपने कार्य से यह भी संदेश दिया कि सभी भारतीय, चाहे किसी भी धर्म के हों, समान हैं। उनका यह कदम अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है कि वे भी अन्याय के खिलाफ खड़े हों।

दीपक कुमार की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की बहादुरी नहीं है, बल्कि यह पूरी भारतीय समाज के लिए एक संदेश है कि प्यार और सहिष्णुता नफरत और धमकियों से कहीं अधिक शक्तिशाली हैं। यह घटना याद दिलाती है कि धर्म चाहे कोई भी हो, सबसे पहले हम सब इंसान हैं और मानवता का पालन करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
दीपक ने दिखाया कि अगर आप न्याय और समानता के लिए खड़े होते हैं, तो कोई भी समूह आपको डराने या रोकने में सक्षम नहीं होता। उनके शब्द, “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है”, आज एक प्रतीक बन चुके हैं जो धर्म, समाज और मानवता के बीच की दूरी को मिटाने का संदेश देते हैं।
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