Maria Corina Machado Gave Her Nobel Peace Prize to Donald Trump: जनवरी 2026 में जब वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो व्हाइट हाउस पहुँचीं, तो यह सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं थी, बल्कि वैश्विक राजनीति में एक गहरा संदेश भी था। माचाडो अपने साथ वह चीज़ लाई थीं, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में होनी तय थी – नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल। उनका उद्देश्य स्पष्ट था: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वेनेजुएला के भविष्य को लेकर ठोस समर्थन हासिल करना।
हालाँकि, यह रणनीति कितनी सफल रही, इस पर सवाल अब भी बने हुए हैं।
This is absolutely nuts. It’s corruption in plain sight!
After the Washington Post reported that Trump lost interest in backing María Corina Machado to lead Venezuela because she accepted her Nobel Peace Prize rather than demanding it be given to Trump, she just told Sean… pic.twitter.com/qVwZnXKiVw
— Ed Krassenstein (@EdKrassen) January 6, 2026
नोबेल शांति पुरस्कार: सम्मान या राजनीतिक प्रतीक?
मारिया कोरीना माचाडो को वर्ष 2025 में लोकतंत्र, मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष के चलते नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार वेनेजुएला में निकोलस मादुरो की सत्तावादी सरकार के खिलाफ उनके लंबे संघर्ष की वैश्विक मान्यता था।
व्हाइट हाउस में माचाडो ने यह मेडल राष्ट्रपति ट्रंप को सौंपते हुए इसे “वेनेजुएला की जनता की ओर से आभार का प्रतीक” बताया। ट्रंप ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इसे “आपसी सम्मान का अद्भुत संकेत” करार दिया।

नोबेल समिति की प्रतिक्रिया:
इस घटनाक्रम के बाद ओस्लो स्थित नोबेल शांति केंद्र को सफाई देनी पड़ी। समिति ने स्पष्ट किया कि
“नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल भले ही किसी और को दिया जा सकता है, लेकिन ‘नोबेल शांति पुरस्कार विजेता’ की उपाधि हस्तांतरित नहीं की जा सकती।”
यह बयान इस पूरे घटनाक्रम को और विवादास्पद बना गया और सवाल उठने लगे कि क्या पुरस्कार को राजनीतिक समर्थन पाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
वेनेजुएला की सत्ता की जंग: माचाडो बनाम डेल्सी रोड्रिगेज
वर्तमान में वेनेजुएला में सत्ता को लेकर स्थिति बेहद जटिल है। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका ने डेल्सी रोड्रिगेज, जो मादुरो की पूर्व उपराष्ट्रपति थीं, को कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में समर्थन दिया। यह फैसला कई विपक्षी नेताओं के लिए चौंकाने वाला था।
दूसरी ओर, माचाडो और विपक्ष यह दावा करते रहे हैं कि एडमुनदो गोंजालेज़ 2024 के विवादित चुनावों में वास्तविक राष्ट्रपति-निर्वाचित हैं, जिसे पहले अमेरिका ने भी मान्यता दी थी।
ट्रंप प्रशासन का रुख: स्थिरता बनाम लोकतंत्र
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि डेल्सी रोड्रिगेज एक “स्थिर और व्यवहारिक विकल्प” हैं, जिनके साथ अमेरिका काम कर सकता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने बैठक के दौरान कहा कि ट्रंप माचाडो के साहस और नेतृत्व का सम्मान करते हैं, लेकिन
“इस समय राष्ट्रपति का मानना है कि माचाडो के पास वेनेजुएला का नेतृत्व करने के लिए पर्याप्त राजनीतिक समर्थन नहीं है।”
यही बयान इस मुलाकात का सबसे अहम निष्कर्ष माना जा रहा है।
फोटो-ऑप या कूटनीतिक सफलता?
बैठक के बाद माचाडो को ट्रंप के हस्ताक्षर वाला एक ब्रांडेड गिफ्ट बैग पकड़े हुए देखा गया। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और आलोचकों ने इसे “राजनीतिक फोटो-ऑप” करार दिया।
हालाँकि माचाडो ने बैठक को “ऐतिहासिक” और “असाधारण” बताया और कहा कि अमेरिका वेनेजुएला में संस्थाओं के पुनर्निर्माण, मानवाधिकारों की रक्षा और नए, निष्पक्ष चुनावों की आवश्यकता को समझता है।
वेनेजुएला का भविष्य: अनिश्चित लेकिन निर्णायक मोड़
इस पूरी घटना ने यह साफ कर दिया है कि वेनेजुएला का भविष्य अभी भी अनिश्चित है। एक ओर लोकतांत्रिक विपक्ष है, जो अंतरराष्ट्रीय समर्थन चाहता है, और दूसरी ओर अमेरिका का यथार्थवादी दृष्टिकोण, जो स्थिरता को प्राथमिकता देता दिख रहा है।
मारिया कोरीना माचाडो का नोबेल शांति पुरस्कार देना एक शक्तिशाली प्रतीकात्मक कदम था, लेकिन क्या यह कदम उन्हें सत्ता के करीब ले जा पाएगा – इसका जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है।
व्हाइट हाउस में हुई यह मुलाकात यह दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सम्मान, प्रतीक और पुरस्कार भी रणनीति का हिस्सा बन सकते हैं। लेकिन अंततः निर्णय ताकत, समर्थन और भू-राजनीतिक हितों से तय होते हैं।
माचाडो को भले ही फिलहाल स्पष्ट समर्थन न मिला हो, लेकिन उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वेनेजुएला की लोकतांत्रिक लड़ाई वैश्विक मंच पर अब भी जीवित है।
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