Makar Sankranti Across India: भारत के अलग-अलग हिस्सों में कैसे मनाया जाता है यह पर्व

Makar Sankranti Across India: भारत त्योहारों का देश है और यहां हर पर्व न सिर्फ धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक विविधता का भी प्रतीक होता है। मकर संक्रांति ऐसा ही एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो पूरे देश में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और इसे सूर्य के उत्तरायण होने का संकेत माना जाता है। यही कारण है कि इसे कई जगह उत्तरायण भी कहा जाता है। मकर संक्रांति आमतौर पर 14 या 15 जनवरी को मनाई जाती है और यह एकमात्र ऐसा हिंदू त्योहार है, जो हर साल लगभग एक ही तारीख को आता है।

मकर संक्रांति का मुख्य महत्व कृषि, प्रकृति और सूर्य उपासना से जुड़ा हुआ है। यह फसल कटाई का समय होता है, इसलिए इसे किसान उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति किन-किन नामों से और कैसे मनाई जाती है।

उत्तर भारत में मकर संक्रांति:

उत्तर भारत में मकर संक्रांति को खास धार्मिक महत्व प्राप्त है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। विशेष रूप से गंगा स्नान को बहुत शुभ माना जाता है। प्रयागराज, हरिद्वार और वाराणसी जैसे स्थानों पर लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं।
इस दिन खिचड़ी, तिल-गुड़ से बने लड्डू और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। उत्तर प्रदेश में इसे कई जगह खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है।

पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी:

पंजाब और हरियाणा में मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह मुख्य रूप से सर्दियों के अंत और नई फसल के स्वागत का त्योहार है।
लोहड़ी की रात लोग अलाव जलाते हैं, उसके चारों ओर घूमते हैं और उसमें मूंगफली, रेवड़ी, तिल और मक्का डालते हैं। ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्धा किया जाता है। लोहड़ी खासकर नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए बहुत खास मानी जाती है।

Makar Sankranti Across India

गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण:

गुजरात में मकर संक्रांति को उत्तरायण कहा जाता है और यह पतंगबाजी के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस दिन पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है।
लोग छतों पर इकट्ठा होकर पतंग उड़ाते हैं और “काय पो छे” जैसे नारों की गूंज सुनाई देती है। खाने में उंधियू, तिल के लड्डू और मिठाइयाँ बनाई जाती हैं। राजस्थान के कई हिस्सों में भी पतंग उड़ाने की परंपरा है और इसे खुशी व उत्साह के साथ मनाया जाता है।

महाराष्ट्र में मकर संक्रांति:

महाराष्ट्र में मकर संक्रांति को आपसी सौहार्द और प्रेम का पर्व माना जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को तिलगुल (तिल और गुड़ की मिठाई) देते हैं और कहते हैं-
तिलगुल घ्या आणि गोड गोड बोला
इसका अर्थ है कि तिलगुल लो और मीठा-मीठा बोलो। महिलाएं नए कपड़े पहनती हैं, हल्दी-कुमकुम का आयोजन होता है और सामाजिक मेलजोल बढ़ता है।

दक्षिण भारत में पोंगल:

तमिलनाडु में मकर संक्रांति को पोंगल के रूप में चार दिनों तक मनाया जाता है। यह सबसे बड़ा कृषि उत्सव है।

  • भोगी पोंगल: पुराने सामान को त्यागने और नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक।

  • सूर्य पोंगल: सूर्य देव को धन्यवाद देने का दिन।

  • मट्टू पोंगल: गाय-बैलों की पूजा की जाती है।

  • कानुम पोंगल: परिवार और दोस्तों के साथ उत्सव।

इस दौरान चावल, दूध और गुड़ से बनी खास डिश पोंगल पकाई जाती है और सूर्य देव को अर्पित की जाती है।

कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना:

इन राज्यों में मकर संक्रांति को संक्रांति नाम से मनाया जाता है। घरों को रंगोली से सजाया जाता है, पशुओं की पूजा की जाती है और फसल उत्सव मनाया जाता है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह पर्व तीन दिनों तक चलता है, जिसमें भोगी, संक्रांति और कनुमा शामिल हैं।

असम में बिहू:

असम में मकर संक्रांति को माघ बिहू या भोगाली बिहू कहा जाता है। यह भी फसल कटाई का त्योहार है। लोग सामूहिक रूप से दावतें करते हैं, पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं और मेले आयोजित होते हैं।

पश्चिम बंगाल और ओडिशा:

पश्चिम बंगाल में इसे पौष संक्रांति कहा जाता है। इस दिन तिल और चावल से बनी मिठाइयाँ जैसे पिठा बनाई जाती हैं। ओडिशा में भी यह पर्व कृषि और सूर्य उपासना से जुड़ा हुआ है।

मकर संक्रांति भले ही अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाई जाती हो, लेकिन इसका मूल भाव एक ही है- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सूर्य उपासना और नई शुरुआत। यह पर्व भारत की सांस्कृतिक एकता और विविधता का सुंदर उदाहरण है, जहां एक ही त्योहार अलग-अलग रंगों में पूरे देश को जोड़ता है।

Makar Sankranti 2026 : भारत में एक ही दिन अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है मकर संक्रांति | Top | N18V

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