Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर इन कामों से करें परहेज, वरना रुक सकती है सुख-समृद्धि

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह त्योहार हर साल जनवरी महीने में मनाया जाता है और इसका विशेष धार्मिक, ज्योतिषीय और सामाजिक महत्व होता है। साल 2026 में मकर संक्रांति का पर्व सूर्यदेव के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाएगा। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का दिन कहा गया है। शास्त्रों में उत्तरायण काल को बेहद शुभ माना गया है और इसी कारण मकर संक्रांति को पुण्य, दान और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व कहा जाता है।

इस दिन गंगा स्नान, सूर्य पूजा, दान-पुण्य और विशेष भोजन का विधान है। माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन किए गए शुभ कर्म कई गुना फल देते हैं। लेकिन इसी के साथ यह भी कहा गया है कि अगर इस दिन कुछ खास नियमों की अनदेखी की जाए या गलतियां हो जाएं, तो सूर्यदेव रुष्ट हो सकते हैं और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि रुक सकती है। इसलिए मकर संक्रांति पर सिर्फ पूजा ही नहीं, बल्कि सही आचरण और संयम भी बेहद जरूरी होता है।

मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव क्यों होते हैं विशेष रूप से पूजनीय? | Makar Sankranti 2026

हिंदू धर्म में सूर्यदेव को ऊर्जा, स्वास्थ्य, तेज, आत्मबल और जीवन शक्ति का प्रतीक माना गया है। मकर संक्रांति का पर्व सीधे तौर पर सूर्य से जुड़ा हुआ है क्योंकि इसी दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष के अनुसार सूर्य का यह गोचर बहुत ही शुभ माना जाता है और इसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है।

मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव की पूजा करने से रोग, शोक और दरिद्रता का नाश होता है। इस दिन सूर्य को जल अर्पित करने, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। लेकिन अगर इस पावन दिन पर कुछ ऐसी गलतियां हो जाएं, जो शास्त्रों में वर्जित मानी गई हैं, तो सूर्यदेव की कृपा के बजाय नाराजगी भी झेलनी पड़ सकती है।

मकर संक्रांति 2026 पर पवित्र स्नान का महत्व

Makar Sankranti 2026

मकर संक्रांति के दिन स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी, तालाब या घर में ही स्वच्छ जल से स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद ही पूजा-पाठ और भोजन करना शुभ माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन बिना स्नान किए भोजन करना पुण्य को नष्ट कर सकता है और सूर्यदेव की कृपा से व्यक्ति वंचित रह सकता है।

स्नान के समय जल में तिल डालकर स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है। अगर संभव हो तो गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ होता है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर सूर्यदेव का ध्यान करना चाहिए। मकर संक्रांति पर स्नान न करना या देर से उठना एक बड़ी धार्मिक भूल मानी जाती है, जिससे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार नहीं हो पाता।

सूर्य को जल अर्पित करना क्यों है जरूरी?

मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव को जल अर्पित करना सबसे महत्वपूर्ण नियमों में से एक माना गया है। स्नान के बाद तांबे के लोटे में स्वच्छ जल, लाल फूल और थोड़ा सा गुड़ या तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि इससे सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति को स्वास्थ्य, यश और आत्मबल की प्राप्ति होती है।

अगर इस दिन सूर्य को जल नहीं दिया गया या सूर्य पूजा की उपेक्षा की गई, तो इसे बड़ा दोष माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार सूर्य की अनदेखी करने से जीवन में बाधाएं, मान-सम्मान में कमी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आ सकती हैं। इसलिए मकर संक्रांति के दिन सूर्य को जल अर्पित करना कभी नहीं भूलना चाहिए।

मकर संक्रांति पर भोजन से जुड़ी सावधानियां

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मकर संक्रांति पर भोजन को लेकर भी विशेष नियम बताए गए हैं। इस दिन सात्विक भोजन करने की परंपरा है। तिल, गुड़ और खिचड़ी का सेवन विशेष रूप से शुभ माना जाता है। तिल को सूर्यदेव का प्रिय बताया गया है और इसी कारण इस दिन तिल से बनी चीजें खाने और दान करने का विशेष महत्व होता है।

इस दिन लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए। गलत भोजन करने से न केवल धार्मिक दोष लगता है, बल्कि इसका असर परिवार की शांति और स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। शास्त्रों में कहा गया है कि मकर संक्रांति के दिन जो व्यक्ति सात्विक और संयमित भोजन करता है, उसके जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है।

सूर्यास्त के बाद भोजन करने की मनाही

मकर संक्रांति के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन करना शुभ नहीं माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन सूर्यदेव का विशेष प्रभाव रहता है और सूर्यास्त के बाद भोजन करने से दिन भर के पुण्य का प्रभाव कम हो सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भोजन सूर्यास्त से पहले ही कर लेना चाहिए।

जो लोग इस नियम की अनदेखी करते हैं, उन्हें पुण्य फल में कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए मकर संक्रांति पर समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए और सूर्यास्त से पहले भोजन कर लेना चाहिए।

मकर संक्रांति पर बाल और नाखून काटना क्यों है अशुभ?

मकर संक्रांति जैसे पवित्र पर्व पर बाल काटना या नाखून काटना अशुभ माना गया है। इसे नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने वाला कार्य बताया गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन शरीर से जुड़ी ऐसी क्रियाएं घर की सुख-शांति को प्रभावित कर सकती हैं।

मान्यता है कि मकर संक्रांति पर बाल या नाखून काटने से घर में कलह, आर्थिक परेशानी और मानसिक अशांति बढ़ सकती है। इसलिए इस दिन इन कार्यों से बचना ही बेहतर माना गया है।

फसल या पौधों की कटाई से क्यों बचना चाहिए?

मकर संक्रांति प्रकृति और सूर्य से जुड़ा पर्व है। इस दिन फसलों या पौधों की कटाई करना शुभ नहीं माना जाता। कई क्षेत्रों में किसान इसी कारण मकर संक्रांति के दिन खेतों में कटाई का काम नहीं करते।

मान्यता है कि इस दिन फसल काटने से प्रकृति और सूर्यदेव की कृपा कम हो सकती है। यह पर्व धरती, सूर्य और जीवन के संतुलन का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन प्रकृति के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।

मकर संक्रांति 2026 पर सही आचरण क्यों है जरूरी?

मकर संक्रांति सिर्फ पूजा-पाठ का पर्व नहीं है, बल्कि यह संयम, दान और सकारात्मक सोच का भी संदेश देता है। इस दिन झूठ, क्रोध, अपशब्द और बुरे व्यवहार से दूर रहना चाहिए। जरूरतमंदों को दान देना, बुजुर्गों का सम्मान करना और परिवार के साथ समय बिताना इस पर्व की आत्मा मानी जाती है।

अगर व्यक्ति मकर संक्रांति के दिन गलत आचरण करता है या सूर्यदेव की उपेक्षा करता है, तो इसका असर पूरे वर्ष महसूस किया जा सकता है। इसलिए इस दिन संयम और श्रद्धा के साथ जीवन जीने की सीख दी गई है।

मकर संक्रांति पर सही नियम अपनाकर कैसे पाएं सूर्यदेव की कृपा?

मकर संक्रांति 2026 पर अगर आप पवित्र स्नान करें, सूर्य को जल अर्पित करें, सात्विक भोजन करें और गलतियों से बचें, तो सूर्यदेव की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है। यह दिन जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और समृद्धि लाने का अवसर देता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि मकर संक्रांति पर किया गया छोटा सा पुण्य भी बड़े फल देता है। इसलिए इस दिन नियमों का पालन करना और गलतियों से बचना अत्यंत आवश्यक है।

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