John Clarke को मिला 2025 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार: क्वांटम दुनिया के रहस्यों को सर्किट में लाने वाला वैज्ञानिक

John Clarke को मिला 2025 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार: विज्ञान की दुनिया में कुछ खोजें ऐसी होती हैं जो सिर्फ़ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी को भी छू जाती हैं। इस वर्ष २०२५ के नोबेल पुरस्कार भौतिकी (Physics) में John Clarke, Michel H. Devoret, और John M. Martinis को इसी तरह की एक अद्भुत खोज के लिए सम्मान मिला — macroscopic quantum mechanical tunnelling और energy quantisation को एक इलेक्ट्रिक सर्किट के अंदर दिखाने के लिए।

John Clarke को मिला 2025 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार
John Clarke को मिला 2025 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार

लेकिन इसके पीछे की कहानी, मेहनत और विज्ञान की “अजीब दुनिया” क्या है — आइए इस ब्लॉग में जानें।

John Clarke कौन हैं?

John Clarke एक ब्रिटिश-अमेरिकी भौतिक वैज्ञानिक हैं, जन्म १९४२ में Cambridge, इंग्लैंड में हुआ।  उन्होंने University of Cambridge से अपना BA, MA, और PhD किया। फिर उन्होंने University of California, Berkeley में काम करना शुरू किया और आज वहाँ emeritus professor की स्थिति में हैं। उनका क्षेत्र विशेष रूप से superconductivity और superconducting electronic devices है—मुख्य रूप से SQUIDs (Superconducting Quantum Interference Devices) के विकास में उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण है।

नोबेल पुरस्कार क्यों मिला?

नोबेल समिति ने Clarke, Devoret और Martinis को यह पुरस्कार दिया है:

“for the discovery of macroscopic quantum mechanical tunnelling and energy quantisation in an electric circuit.”

कुछ बातें जो इस खोज को खास बनाती हैं:

  • Quantum tunnelling: यह वह अजीब घटना है जहाँ एक कण (particle) किसी बाधा (barrier) को पार न कर पाने का कारण होने के बावजूद, “tunnel” करके बाधा के पार पहुँच जाता है। सामान्यतया यह अनुभव हम अणुओं (atoms) या उप-परमाणु (subatomic) कणों के मामले में करते हैं।

  • Energy quantisation: ऊर्जा “लगभग अनंत छोटे” मात्रा में ही बढ़ती-घटती है — यानी एक इलेक्ट्रिक सर्किट कुछ निश्चित (discrete) ऊर्जा स्तरों को ही स्वीकार करता है।

  • और यहाँ जो “अद्भुत” है, वह यह कि ये गुण macroscopic scale (हाथ में ले सकने जितना बड़ा सर्किट) में भी दिखे। यानी वह Quantum व्यवहार जो छोटी छोटी इकाइयों तक सीमित समझा जाता था, बड़े-बड़े सर्किट में भी काम करता है।

इसका महत्व (Why It Matters):

यह खोज सिर्फ शैक्षणिक सफलता नहीं है, बल्कि आने वाले समय की तकनीकों के लिए नींव है:

  1. Quantum computing: क्वांटम कम्प्यूटर्स जो अभी धीरे-धीरे विकास कर रहे हैं, उन्हें “qubits” की ज़रूरत होती है — ऐसी इकाइयाँ जो पर्याय-पर्याय (superposition), टनलिंग इत्यादि क्वांटम गुणों को बरकरार रख सकें। Clarke और उनकी टीम की खोज ने यह दिखा दिया कि ये गुण सिर्फ सूक्ष्म दुनियाँ में ही नहीं, बल्कि बड़े सर्किटों में भी प्रकट हो सकते हैं।

  2. सेंसर्स और मापन में संवेदनशीलता: SQUIDs जैसे यंत्रों से बेहद कम चुंबकीय क्षेत्र, जैव-संकेत (biosignals), या विद्युत संकेत मापने की संभावना बढ़ी है। Clarke ने SQUIDs के प्रयोगों को कई क्षेत्रों में लागू किया है — जैवचिकित्सा, भौगोलिक विज्ञान (geophysics), सामग्री परीक्षण, और अन्य विज्ञान क्षेत्रों में।

  3. Quantum cryptography और सुरक्षा: जब हम कम समय में अधिक सुरक्षित तरीके से जानकारी भेजने की बात करते हैं, तो क्वांटम युग की तकनीकें और मजबूत आधार देती हैं। ये खोज भविष्य में डेटा सुरक्षा, एन्क्रिप्शन, संवेदनशील सूचनाओं की रक्षा आदि में मददगार होंगी। नोबेल समिति ने भी कहा है कि यह खोज “अगली पीढ़ी की क्वांटम टेक्नोलॉजीज़” की नींव है।

Clarke की यात्रा: चुनौतियाँ और लगन

विज्ञान की राह, खासकर क्वांटम फिजिक्स जैसी गूढ़ और भारी-विचार वाली दिशा में, आसान नहीं होती। Clarke ने कई दशकों तक प्रयोग किए, उपकरण सुधारे, बार-बार प्रायोगिक त्रुटियाँ देखीं, और सिद्धांतों को मापने के लिए अत्यंत संवेदनशील यंत्र बनाए।

उनका काम सिर्फ “थ्योरी पे-पर” तक सीमित नहीं रहा — उन्होंने उन सिद्धांतों (theoretical predictions) को अनुभव (experiments) में लाकर दिखाया।

SQUIDs जैसे उपकरण बनाना और संचालित करना बेहद मांग वाला है — क्योंकि वे तापमान, ध्वनि, बाह्य विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप आदि से प्रभावित होते हैं। अच्छी प्रयोगशाला की स्थिति, उच्च-शुद्धता उपकरणों की ज़रूरत और वैज्ञानिक धैर्य की भूमिका बहुत बड़ी रही है।

इंसान के जीवन पर असर:

शायद आप सोच रहे हैं: यह खोज हमारी ज़िंदगी में अभी कैसे महसूस होगी?

  • कंप्यूटर और डेटा प्रोसेसिंग तथा सुरक्षित संचार (secure communication) में सुधार होगा।

  • मेडिकल इमेजिंग (जैसे बहुत संवेदनशील मैग्नेटिक सिग्नल्स को पहचानना) और बायो-सेन्सर्स (biosensors) अधिक परिशुद्ध बनेगी।

  • वैज्ञानिक शोध में छोटी-छोटी चीजें पकड़ पाएँगी, जैसे अंधेरे पदार्थ (dark matter) के संकेत या न्यूनतम चुंबकीय क्षेत्र।

  • भविष्य में क्वांटम कम्प्यूटिंग का रोज़मर्रा इस्तेमाल संभव हो सकता है — जिससे जटिल समस्याएँ (complex problems) हल होने में अभी से बहुत कम समय लगेगा।

John Clarke की इस उपलब्धि से हमें यह समझ आता है कि विज्ञान केवल बड़े-खनिज (big stuff) में नहीं, बल्कि छोटी-छोटी, अक्सर अनदेखी लगने वाली घटनाओं में भी छिपा होता है, जो बाद में बड़े बदलाव लाती हैं।

उन्होंने सिद्ध किया कि क्वांटम की विचित्रताएँ सिर्फ़ नन्हे-नन्हे अणुओं या कणों तक सीमित नहीं हैं — वे हमारे हाथ में रखे सर्किट में भी अनुभव की जा सकती हैं।

इस नोबेल पुरस्कार से हमें प्रेरणा मिलती है कि यदि लगन हो, प्रयोग हो, धैर्य हो और स्वाभाविक जिज्ञासा हो, तो विज्ञान के सबसे राज़ भी खुल सकते हैं। Clarke और उनकी टीम को इस खोज के लिए हार्दिक बधाई — और आने वाला विज्ञान हमें यह सिखाता रहेगा कि संसार कितना अद्भुत है जब हम उसे बेहतर देखने की कोशिश करें।

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