Khaleda Zia Funeral: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन, बेगम खालिदा जिया का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनके निधन की खबर ने न केवल बांग्लादेश बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में हलचल मचा दी है। खालिदा जिया तीन बार प्रधानमंत्री रही हैं और उन्हें देश में लोकतंत्र बहाल करने में अहम भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। उनके निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार 31 दिसंबर 2025 को ढाका में आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी शामिल होंगे।
खालिदा जिया, बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और शेख हसीना की कट्टर प्रतिद्वंद्वी थीं। उनका राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। 1971 के स्वतंत्रता युद्ध के बाद बांग्लादेश ने कई तख्तापलट और सैन्य शासन देखे। खालिदा जिया के पति, राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने 1977 में सैन्य बल के जरिए सत्ता संभाली और 1978 में BNP की स्थापना की। उनका आकस्मिक निधन 1981 में एक तख्तापलट में हुआ। इसके बावजूद खालिदा जिया ने देश के राजनीतिक परिदृश्य में अपनी पकड़ बनाए रखी।
उनकी राजनीतिक यात्रा में कई विवाद और चुनौतियां भी थीं। 1991 में उन्होंने अपना पहला कार्यकाल संभाला और इसके बाद लगातार कई चुनावों में हिस्सा लिया। 2001 में BNP की सरकार ने आर्थिक सुधार और निवेश को बढ़ावा दिया। हालांकि, उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे और उनके बड़े बेटे तारिक रहमान पर भी कुछ मामलों में राजनीतिक विवाद रहे।
स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां और विदेश यात्रा | Khaleda Zia Health
खालिदा जिया को कई सालों से स्वास्थ्य समस्याएं थीं। उन्हें यकृत, गुर्दे, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और गठिया जैसी जटिल बीमारियां थीं। नवंबर 2025 में उन्हें ढाका के Evercare Hospital में भर्ती किया गया, जहां उनका इलाज चल रहा था। उनके परिवार ने लंबे समय तक उनके लिए विदेश में उपचार की अनुमति मांगी थी, लेकिन इसे कई बार अस्वीकृत कर दिया गया।
हालांकि, 2024 में शेख हसीना के हटने के बाद Nobel Peace Prize विजेता मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति दी। उन्होंने जनवरी 2025 में लंदन में उपचार करवा कर मई में बांग्लादेश लौट आई।
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और BNP में भूमिका
खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच वर्षों तक कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही। खालिदा जिया BNP की अध्यक्ष रहकर हमेशा देश की राजनीति में प्रभावशाली रही, जबकि हसीना और उनका Awami League दल लगातार सत्ता में रहा। खालिदा जिया ने अपनी पार्टी को मजबूत बनाया और कई बार चुनावों में प्रमुख भूमिका निभाई।
उनकी पार्टी ने 2014 और 2024 के चुनावों में भाग नहीं लिया, जिससे हसीना की सरकार को लंबी अवधि के लिए सत्ता मिली। राजनीतिक आलोचनाओं के बावजूद खालिदा जिया ने अपने समर्थकों के बीच लोकप्रियता बनाए रखी।
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर प्रभाव

खालिदा जिया की राजनीति में भारत के साथ कभी-कभी तनावपूर्ण संबंध रहे। उनके कार्यकाल के दौरान कुछ घटनाओं में भारत ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारतीय राज्यो के खिलाफ किया गया। इसके बावजूद, उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया। मोदी ने खालिदा जिया की महत्वपूर्ण योगदान और भारत-बांग्लादेश संबंधों में उनके प्रयासों की सराहना की।
मोदी ने 2015 में ढाका में उनकी मुलाकात को याद करते हुए कहा कि उनकी दृष्टि और विरासत हमारे साझेदारी मार्गदर्शन करती रहेगी।
Deeply saddened to learn about the passing away of former Prime Minister and BNP Chairperson Begum Khaleda Zia in Dhaka.
Our sincerest condolences to her family and all the people of Bangladesh. May the Almighty grant her family the fortitude to bear this tragic loss.
As the… pic.twitter.com/BLg6K52vak
— Narendra Modi (@narendramodi) December 30, 2025
S. जयशंकर का ढाका में अंतिम संस्कार में शामिल होना
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 31 दिसंबर को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया के राज्य अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। भारत-बांग्लादेश संबंधों में संवेदनशील दौर में विदेश मंत्री S. जयशंकर का खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। यह कदम दोनों देशों के बीच संवाद और सम्मानपूर्ण संबंधों की ओर संकेत करता है।
खालिदा जिया की विरासत
खालिदा जिया ने बांग्लादेश में लोकतंत्र के लिए कई संघर्ष किए। उन्होंने सैन्य तानाशाही के खिलाफ जन आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल और राजनीतिक निर्णयों ने बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य को आकार दिया।
उनकी पार्टी BNP और समर्थक उन्हें एक सशक्त महिला नेता और देश की लोकतांत्रिक विरासत की प्रतीक के रूप में याद रखेंगे।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
खालिदा जिया के निधन पर पाकिस्तान और चीन सहित कई देशों ने शोक व्यक्त किया। सभी ने उनके राजनीतिक योगदान और लोकतंत्र के लिए किए गए संघर्ष की सराहना की। बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइज़र मोहम्मद यूनुस ने कहा कि देश ने केवल एक नेता नहीं बल्कि एक महान stateswoman खो दी है।
खालिदा जिया का निधन दक्षिण एशियाई राजनीति में एक युग का अंत है। उनके अंतिम संस्कार में S. जयशंकर की उपस्थिति दोनों देशों के बीच कूटनीतिक महत्व को दर्शाती है। खालिदा जिया ने बांग्लादेश में लोकतंत्र और राजनीतिक सक्रियता के क्षेत्र में जो छाप छोड़ी है, वह सदियों तक याद रखी जाएगी।
इस दुखद अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी और भारत सरकार का संदेश है कि बांग्लादेश के साथ सहयोग और मित्रता को हमेशा बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है।
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