ITR Refund Delays: इस साल रिफंड क्यों देर से मिल रहा है? जानें नए नियम, कारण और तुरंत रिफंड पाने के आसान समाधान

ITR Refund Delays: आयकर रिफंड को लेकर इस साल देशभर के करदाताओं में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हजारों लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं कि उनका ITR महीनों से “प्रोसेसिंग में” दिख रहा है। पिछले साल की तुलना में इस बार रिफंड आने में कहीं ज़्यादा देरी हो रही है, जबकि आयकर विभाग की तरफ़ से कोई स्पष्ट समयसीमा भी सामने नहीं आ रही।

आख़िर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या वाकई नियमों में कोई बदलाव हुआ है? और अगर आपको भी अपना रिफंड तुरंत चाहिए, तो आपको क्या सुधार करने चाहिए? इस पूरी खबर में आपको हर पहलू आसान भाषा में समझाया गया है।

रिफंड प्रोसेस इस साल इतना धीमा क्यों चल रहा है? ITR Refund Delays 

ITR Refund Delays

इस बार रिफंड में देरी का सबसे बड़ा कारण AIS और फॉर्म 26AS में दर्ज जानकारी तथा ITR में लिखी गई आय के बीच mismatch है। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों की आय कई स्रोतों से आती है—जैसे शेयर बाजार, डिविडेंड, फ्रीलांसिंग इनकम या विदेश से कमाई—उनके ITR अक्सर ऑटोमैटिक वेरिफिकेशन में पास नहीं होते और मैनुअल स्कैनिंग में भेज दिए जाते हैं। इससे प्रोसेसिंग स्वाभाविक रूप से धीमी हो जाती है।

इसके अलावा इस बार विभाग ने हाई-रिस्क रिटर्न और बड़ी रकम वाले रिफंड पर सख्त स्क्रूटनी शुरू की है। सीपीसी बेंगलुरु की नई प्रक्रिया के कारण हर डेटा को गहराई से चेक किया जा रहा है, ताकि धोखाधड़ी या गलत रिफंड से बचा जा सके।

CPC बेंगलुरु की कड़ी स्क्रीनिंग का क्या असर पड़ा है?

इस साल केंद्रीकृत प्रसंस्करण केंद्र (CPC) द्वारा अपनाई गई कड़ी जांच प्रणाली रिफंड में सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई है। जिन रिटर्न में असामान्य एंट्री हो, भारी-भरकम लेनदेन दर्ज हो, या जिनकी आय में विविधता हो—उन्हें अब गहराई से निरीक्षण में डाला जा रहा है।

इसके साथ ही, पिछले साल की तरह इस बार भी अंतिम तारीख के आसपास भारी संख्या में ITR फाइल हुए, जिससे सिस्टम पर लोड काफी बढ़ गया। ऐसे में सामान्य रिटर्न भी देरी का शिकार होने लगे हैं।

गलत बैंक विवरण रिफंड अटकाने की सबसे आम वजह

कई करदाताओं ने सोशल मीडिया पर बताया कि रिफंड जारी तो हो गया, लेकिन बैंक खाते में क्रेडिट नहीं हुआ। यह स्थिति दो कारणों से सामने आती है—पहला, बैंक खाता पुराना या इनएक्टिव होना और दूसरा, PAN से नाम mismatch होना।

कई बार बैंक विवरण सही तरीके से प्री-वैलिडेट नहीं होते, जिसके कारण रिफंड बैंकिंग प्रक्रिया में ही अटक जाता है। लोगों को इसका अंदाज़ा तब लगता है जब वे X (ट्विटर) पर दूसरों की शिकायतें पढ़ते हैं और बाद में पोर्टल जांचने पर पता चलता है कि “रिफंड फेल्ड” की स्थिति दिख रही है।

आयकर विभाग की प्रतिक्रिया: शिकायतों का निपटारा जारी

विभाग की सोशल मीडिया टीम लगातार यूज़र्स को जवाब दे रही है और उन्हें ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध ग्रिवेंस सिस्टम में शिकायत दर्ज करने की सलाह दे रही है।

कई लोगों की समस्याएँ शिकायत दर्ज करने के बाद हल भी हुई हैं, लेकिन देरी की समस्या अब भी बड़ी संख्या में करदाताओं को परेशान कर रही है।

रिफंड स्टेटस कैसे जांचें? जानिए सही तरीका

करदाता ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके “View Filed Returns” सेक्शन में जाकर स्थिति देख सकते हैं। इसमें प्रोसेसिंग स्टेज, कोई नोटिस, या बैंक विवरण संबंधी समस्या साफ़ दिखाई देती है।

साथ ही, “बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेशन” सेक्शन में जाकर यह सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता PAN से जुड़ा हो, सक्रिय हो और सही तरीके से प्री-वैलिडेटेड हो।

AIS में mismatch हो तो क्या करें?

अगर AIS में गलत एंट्री दिख रही है—जैसे डुप्लिकेट लेनदेन, गलत TDS, गलत ब्याज की एंट्री या किसी कंपनी द्वारा गलत रिपोर्ट की गई राशि—तो तुरंत AIS पोर्टल पर जाकर फीडबैक सबमिट करें।

कई बार AIS डेटा कंपनियों या बैंकों द्वारा देर से अपडेट होने के कारण गड़बड़ दिखाई देता है। यदि mismatch गंभीर है, तो विशेषज्ञ Revised Return फाइल करने की सलाह देते हैं ताकि आगे कोई विवाद न हो और रिफंड प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सके।

क्या CPC अब छोटी गलतियाँ खुद ठीक कर सकता है?

टैक्स एक्सपर्ट के अनुसार, इस साल से CPC को छोटे तकनीकी एरर—जैसे माइनर मिसमैच या कैलकुलेशन एरर—को खुद ही ठीक करने का अधिकार मिल गया है। इससे सामान्य रिटर्न की प्रोसेसिंग काफी तेज हो सकती है।

हालांकि, जिन मामलों में रिफंड की राशि बड़ी हो या आय संरचना जटिल हो, उन पर अभी भी मैनुअल वेरिफिकेशन अनिवार्य है। इसलिए जटिल मामलों में देरी का सिलसिला जारी रह सकता है।

ITR Refund जल्दी पाने के आसान उपाय: क्या करें करदाता?

ITR Refund Delays

सबसे पहला और जरूरी कदम है—अपनी रिटर्न में लिखी गई आय को AIS और फॉर्म 26AS से मैच करना। यदि कहीं मिसमैच दिखे, तो तुरंत सुधार करें।

दूसरा महत्वपूर्ण कदम है विभाग की ओर से आने वाली किसी भी सूचना का समय पर जवाब देना। यदि आपने किसी नोटिस या इनक्वायरी का जवाब नहीं दिया, तो आपका रिटर्न तब तक रुका रहेगा जब तक विभाग उसे क्लियर नहीं करता।

तीसरी सलाह है—हमेशा ऐसा बैंक खाता चुनें जो सक्रिय हो, अपडेटेड हो और PAN से लिंक हो।

अगर रिफंड कई हफ्तों तक न आए तो ई-फाइलिंग पोर्टल पर “Grievance” सेक्शन में जाकर पूरी समस्या का विवरण देकर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। आवश्यकता होने पर आप एस्कलेशन का अनुरोध भी कर सकते हैं।

क्या आगे स्थिति में सुधार होगा?

टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि इस देरी का कारण कोई तकनीकी खराबी नहीं बल्कि डेटा मिलान प्रक्रिया को मजबूत बनाने का प्रयास है। यह कदम टैक्स प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए उठाया गया है।

जैसे-जैसे लंबित मामलों की संख्या कम होगी और नया सिस्टम स्थिर होगा, रिफंड प्रोसेस में तेजी आने की उम्मीद है। आने वाले महीनों में परिस्थिति और बेहतर हो सकती है।

ITR Refund FAQs : आयकर रिफंड से जुड़े आम सवालों के सरल जवाब

ITR Refund क्या होता है?

जब करदाता साल भर में जितना टैक्स देता है वह वास्तविक देय टैक्स से ज्यादा होता है, तो सरकार अतिरिक्त राशि उसे वापस करती है। इसी प्रक्रिया को आयकर रिफंड कहा जाता है।

रिफंड आने में कितना समय लगता है?

आमतौर पर रिटर्न प्रोसेस होने के बाद 7 से 45 दिन तक लगते हैं, लेकिन इस साल बदलावों और कड़ी जांच के कारण कई मामलों में अधिक समय लग रहा है।

रिफंड “प्रोसेसिंग में” क्यों दिख रहा है?

ज़्यादातर मामलों में AIS, 26AS और ITR में मिसमैच होने के कारण रिटर्न मैनुअल वेरिफिकेशन में चला जाता है।

AIS या 26AS में mismatch हो तो क्या करें?

AIS पोर्टल पर फीडबैक दें और आवश्यकता होने पर Revised Return दाखिल करें ताकि आगामी देरी से बचा जा सके।

                       ITR Refund में देरी परेशान करने वाली जरूर है, लेकिन इसे कम करने का तरीका आपके पास मौजूद है। यदि आप अपने दस्तावेज़ों, आय की जानकारी, बैंक विवरण और AIS डेटा को पूरी तरह अपडेट और मैच कर लेते हैं, तो आपका रिफंड जल्दी आने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

इस साल की कड़ी सत्यापन प्रक्रिया करदाताओं के हितों की रक्षा के लिए लागू की गई है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं—सही डेटा, साफ रिकॉर्ड और समय पर प्रतिक्रिया से आपका रिफंड बिना किसी बड़ी रुकावट के मिल सकता है।

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