Indore Building Collapse: इंदौर में तेज बारिश के बीच तीन मंजिला इमारत ढही, 2 की मौत, 12 घायल

Indore Building Collapse: इंदौर के रानीपुरा इलाके में रविवार की रात अचानक अफरा-तफरी मच गई। दौलतगंज क्षेत्र की एक पुरानी तीन मंजिला इमारत रात करीब 9 बजे भरभराकर ढह गई। इस खौफनाक हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। गनीमत रही कि बचाव दल की तत्परता और स्थानीय लोगों की मदद से मलबे में दबे 14 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें एक छोटा बच्चा भी शामिल है।

यह हादसा ऐसे समय हुआ जब शहर में लगातार तेज बारिश हो रही थी। बारिश से पहले ही इस इमारत की हालत जर्जर बताई जा रही थी, ऊपर से नींव के आसपास पानी भर जाने के कारण इसकी दीवारें और कमजोर हो गईं। अचानक तेज आवाज़ के साथ इमारत ज़मीन में समा गई और चारों तरफ़ धूल और चीख-पुकार मच गई।

बचाव अभियान की जंग | Indore Building Collapse

इमारत ढहने की खबर मिलते ही जिला कलेक्टर शिवम वर्मा, पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह और नगर आयुक्त हर्षिका सिंह मौके पर पहुँचे। साथ ही नगर निगम, पुलिस, एसडीईआरएफ (State Disaster Emergency Response Force) और नागरिक सुरक्षा दल तुरंत सक्रिय हो गए।

स्थानीय लोगों ने भी बचाव कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चारों तरफ़ अंधेरा और बारिश का माहौल होने के बावजूद राहतकर्मियों ने भारी मशीनरी—जैसे जेसीबी और एक्सकेवेटर—का इस्तेमाल करते हुए मलबा हटाया। बचाव अभियान करीब पांच से छह घंटे तक चला। आखिरकार 14 लोगों को मलबे से निकाला गया।

इनमें से 12 लोग घायल अवस्था में थे जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। वहीं, दो लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस पूरे अभियान ने दिखा दिया कि सामूहिक प्रयास और तेज़ कार्रवाई से कितनी जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

मृतकों और घायलों की पहचान

इस हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान फहीमुद्दीन और 20 वर्षीय अलीफा के रूप में हुई। फहीमुद्दीन की उम्र करीब 40 साल बताई जा रही है। अलीफा को अस्पताल लाया गया था लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घायल 12 लोगों में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। उनमें से कई को गंभीर चोटें आई हैं और कुछ ICU में भर्ती हैं। सबसे राहत की बात यह रही कि मलबे से एक छोटे बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

हादसे के कारण: क्यों गिरी इमारत?

Indore Building Collapse

प्रशासन और स्थानीय निवासियों के मुताबिक इस हादसे के पीछे कई वजहें सामने आई हैं।

सबसे पहली वजह लगातार हो रही तेज बारिश है, जिसके कारण इमारत की नींव के आसपास पानी जमा हो गया। इससे बेसमेंट कमजोर हो गया और दीवारों पर दबाव बढ़ता चला गया।

दूसरी बड़ी वजह निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है। बताया जा रहा है कि इमारत बिना मजबूत बीम और स्तंभों के बनाई गई थी। इस कारण इसकी ढांचागत क्षमता उतनी मजबूत नहीं थी जितनी होनी चाहिए थी।

तीसरी वजह यह कि इमारत पुरानी हो चुकी थी और उसके पिछले हिस्से में दरारें भी आ चुकी थीं। रख-रखाव की कमी और मरम्मत न होने के कारण यह इमारत किसी भी वक्त गिर सकती थी।

इन तमाम वजहों के मिल जाने से यह त्रासदी हुई। यह घटना हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि कमजोर और पुरानी इमारतें बड़े खतरे का कारण बन सकती हैं।

प्रशासन और नेताओं की भूमिका

घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने पूरी ज़िम्मेदारी के साथ काम किया। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि प्राथमिकता लोगों की जान बचाने की थी, और यही कारण है कि तेजी से मलबा हटाकर लोगों को अस्पताल पहुँचाया गया।

पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह और नगर आयुक्त हर्षिका सिंह रात भर घटनास्थल पर डटे रहे और हर गतिविधि की निगरानी की। घायलों को महाराजा यशवंतराव अस्पताल और अन्य स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज कर रही है और गंभीर घायलों पर विशेष नज़र रखी जा रही है।

साथ ही प्रशासन ने आसपास की अन्य पुरानी और जर्जर इमारतों की जाँच के आदेश दिए हैं। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिन घरों में खतरे की स्थिति है, उन्हें खाली कराया जाए या मरम्मत कराई जाए।

इंदौर शहर के लिए चेतावनी

यह हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे शहर के लिए चेतावनी है। इंदौर के पुराने इलाकों में कई इमारतें ऐसी हैं जो बरसों पुरानी हैं और उनमें दरारें भी पड़ी हुई हैं। इनमें से कई घर और दुकानें बिना किसी इंजीनियरिंग मानकों का पालन किए बनाए गए थे।

हर साल मानसून के दौरान जब तेज बारिश होती है, तो ऐसी इमारतें और अधिक कमजोर हो जाती हैं। नींव में पानी भरने से दीवारें गल जाती हैं और कभी भी ढहने का खतरा पैदा हो जाता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम को समय रहते इन इमारतों की जांच करनी चाहिए थी। लेकिन लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। अब लोग डरे हुए हैं और चाहते हैं कि जल्द से जल्द शहर की कमजोर इमारतों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित बनाया जाए।

इस घटना से मिलने वाले सबक

इस घटना से कई बड़े सबक मिलते हैं।

सबसे पहला सबक यह है कि पुरानी इमारतों की नियमित जांच बेहद ज़रूरी है। नगर निगम और संबंधित विभागों को समय-समय पर ऑडिट कराना चाहिए ताकि पता चले कि कौन सी इमारत सुरक्षित है और कौन सी खतरे में है।

दूसरा सबक यह है कि निर्माण के दौरान इंजीनियरिंग मानकों का पालन करना अनिवार्य होना चाहिए। बीम और स्तंभों के बिना बहुमंजिला इमारतें कभी सुरक्षित नहीं हो सकतीं।

तीसरा सबक यह है कि बारिश के मौसम में जल निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। अगर नींव के पास पानी जमा होता है तो इमारत की स्थिरता पर सीधा असर पड़ता है।

इसके अलावा, नागरिकों को भी जागरूक होना होगा। अगर किसी इमारत में दरारें दिखें, दीवारें झुकें या पानी रिसने लगे तो तुरंत प्रशासन को सूचना देनी चाहिए। देर करने से ऐसी घटनाएं जानलेवा साबित हो सकती हैं।

शहर के भविष्य के लिए ज़रूरी कदम

इंदौर स्मार्ट सिटी के रूप में पहचान बना रहा है, लेकिन स्मार्ट सिटी तभी पूरी होगी जब लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इसके लिए प्रशासन को कुछ ठोस कदम उठाने होंगे।

  • पुरानी और जर्जर इमारतों की लिस्ट बनाकर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर खाली कराना होगा।

  • नई इमारतों के लिए सख्त निर्माण नियम लागू करने होंगे ताकि कोई भी ठेकेदार मानकों से समझौता न कर सके।

  • नगर निगम को बारिश के मौसम से पहले ड्रेनेज सिस्टम सुधारने होंगे ताकि पानी जमा न हो।

  • आम लोगों को भी ऐसी घटनाओं के बारे में जागरूक करना होगा ताकि वे खतरे को पहचानकर समय पर कार्रवाई करें।

रानीपुरा की यह त्रासदी एक दर्दनाक हादसा है जिसमें दो निर्दोष जिंदगियां चली गईं और कई परिवार टूट गए। लेकिन यह सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि एक चेतावनी है। अगर इंदौर और देश के अन्य शहरों में पुरानी इमारतों की हालत का समय रहते आकलन न किया गया तो ऐसी घटनाएं बार-बार होंगी।

इस समय सबसे ज़रूरी है कि घायलों का इलाज पूरी गंभीरता से हो और पीड़ित परिवारों को मदद दी जाए। साथ ही प्रशासन को इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

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