First Made in India Semiconductor Chip: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 23 अगस्त को द इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में एक ऐतिहासिक ऐलान किया। उन्होंने कहा कि भारत का पहला मेड-इन-इंडिया सेमीकंडक्टर चिप 2025 के अंत तक बाजार में आ जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत तेजी से अपने 6G नेटवर्क को भी विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
यह घोषणा केवल एक तकनीकी प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक तकनीकी शक्ति बनने की दिशा में मजबूत कदम है।
क्यों अहम है सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग? | First Made in India Semiconductor Chip
सेमीकंडक्टर चिप्स को अक्सर आधुनिक दुनिया का “तेल” कहा जाता है। ये छोटे-छोटे चिप्स ही हमारे मोबाइल फोन, लैपटॉप, कारें, वॉशिंग मशीन, टीवी, हेल्थकेयर उपकरण, सैन्य सिस्टम और स्पेस टेक्नोलॉजी तक को चलाते हैं। आज दुनिया भर में सेमीकंडक्टर की भारी कमी (chip shortage) देखी जा रही है, जिसने ऑटोमोबाइल से लेकर स्मार्टफोन इंडस्ट्री तक को प्रभावित किया।
भारत अब तक इन चिप्स के लिए ताइवान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान जैसे देशों पर निर्भर था। लेकिन मोदी सरकार के इस कदम से भारत अपनी स्वदेशी चिप निर्माण क्षमता हासिल करेगा। इससे न केवल भारत की विदेशी निर्भरता घटेगी, बल्कि भारत ग्लोबल सप्लाई चेन का एक बड़ा केंद्र भी बन सकता है।
50–60 साल पहले क्यों चूक गया भारत?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि भारत यह काम पचास-साठ साल पहले शुरू कर सकता था, लेकिन उस समय की सरकारों ने अवसर खो दिए। नतीजा यह हुआ कि भारत जैसे विशाल देश को भी तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में दूसरों पर निर्भर रहना पड़ा।
मोदी ने कहा, “आज हमने उस स्थिति को बदल दिया है। सेमीकंडक्टर से जुड़ी फैक्ट्रियां भारत में बन रही हैं और 2025 के अंत तक पहला मेड-इन-इंडिया चिप बाजार में आ जाएगा।”
6G की दिशा में तेज़ी से कदम
भारत ने 4G और 5G टेक्नोलॉजी को अपनाने में देर तो की, लेकिन अब सरकार चाहती है कि अगली क्रांति यानी 6G नेटवर्क में भारत केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि लीडर बने।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “हम तेजी से मेड-इन-इंडिया 6G पर काम कर रहे हैं।”
6G नेटवर्क से डेटा स्पीड मौजूदा 5G से 100 गुना तक तेज़ हो सकती है। इसका इस्तेमाल केवल इंटरनेट स्पीड के लिए नहीं बल्कि मेटावर्स, रोबोटिक्स, स्मार्ट सिटीज़, एआई, होलोग्राफिक कॉलिंग, रिमोट सर्जरी और ड्राइवरलेस गाड़ियों जैसी उन्नत तकनीकों में होगा।
भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि भारत बहुत जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है।
उन्होंने कहा कि भारत का योगदान जल्द ही दुनिया की अर्थव्यवस्था में 20% तक पहुंच सकता है। इसका कारण है पिछले एक दशक में बनी मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता।
- कोविड जैसी बड़ी चुनौतियों के बावजूद भारत ने राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) को 4.4% तक लाने में सफलता पाई।
- भारतीय कंपनियां पूंजी बाजार से रिकॉर्ड फंड जुटा रही हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों और निर्यात पर ध्यान
मोदी ने यह भी कहा कि भारत आने वाले समय में 100 से ज्यादा देशों को इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) निर्यात करने की तैयारी कर रहा है।
यह कदम भारत को ग्रीन एनर्जी और टिकाऊ विकास के वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करेगा। EV इंडस्ट्री पहले से ही तेजी से बढ़ रही है और सरकार की नीतियां इसे और मजबूती दे रही हैं।
सुधारों (Reforms) की गति
मोदी सरकार ने पिछले एक दशक में कई बड़े सुधार किए हैं।
- इनकम टैक्स बिल: 60 साल बाद नया आयकर विधेयक लाया गया है, जिसे आसान भाषा में लिखा गया है ताकि आम आदमी को फायदा हो।
- शिपिंग और पोर्ट कानून: ब्रिटिश काल से चले आ रहे कानूनों को बदला गया है ताकि भारत की ब्लू इकोनॉमी और पोर्ट-आधारित विकास को बढ़ावा मिल सके।
- स्पोर्ट्स सेक्टर: सरकार ने नई नेशनल स्पोर्ट्स पॉलिसी बनाई है और भारत को बड़े खेल आयोजनों के लिए तैयार कर रही है।
मोदी ने कहा कि विपक्ष के विरोध के बावजूद सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ सुधार करती रहेगी।
क्यों ऐतिहासिक है यह घोषणा?
भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग केवल एक औद्योगिक पहल नहीं बल्कि एक रणनीतिक और भू-राजनीतिक गेम चेंजर है।
- अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी वर्चस्व की लड़ाई में सेमीकंडक्टर सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं।
- ताइवान, जो दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर निर्माता है, भू-राजनीतिक तनाव के बीच लगातार दबाव झेल रहा है।
- ऐसे समय में भारत का इस क्षेत्र में प्रवेश, न केवल उसकी आर्थिक मजबूती बल्कि उसकी वैश्विक राजनीतिक स्थिति को भी बदल सकता है।
चुनौतियाँ भी कम नहीं
हालांकि भारत के लिए यह राह आसान नहीं होगी।
- सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में भारी पूंजी निवेश और तकनीकी विशेषज्ञता चाहिए।
- यह इंडस्ट्री बेहद जटिल है और इसमें ग्लोबल सप्लाई चेन की अहमियत है।
- भारत को अपने स्किल्ड वर्कफोर्स, रेसर्च एंड डेवलपमेंट, और इंफ्रास्ट्रक्चर पर और ज्यादा निवेश करना होगा।
लेकिन अगर भारत इस चुनौती को पार कर लेता है, तो वह आने वाले दशकों में दुनिया का सेमीकंडक्टर हब बन सकता है।
नया भारत, नई उड़ान
प्रधानमंत्री मोदी की यह घोषणा भारत के लिए एक नए युग की शुरुआत है।
- 2025 के अंत तक मेड-इन-इंडिया चिप आना
- 6G नेटवर्क पर तेजी से काम
- इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात
- और सुधारों की निरंतर गति
ये सब मिलकर भारत को केवल एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में भी आगे ले जाएंगे।
भारत अब दुनिया को यह दिखाने के लिए तैयार है कि वह केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक तकनीकी शक्ति है।
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