India Tobacco Tax Hike 2026: बढ़ती कीमतें, बाजार पर असर और सार्वजनिक स्वास्थ्य

India Tobacco Tax Hike 2026: भारत सरकार ने एक बार फिर तंबाकू उत्पादों पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कर निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2025 को घोषणा की कि सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा। इसके साथ ही 1 फरवरी 2026 से प्रति 1,000 सिगरेट स्टिक पर अधिकतम 8,500 रुपये तक का नया उत्पाद शुल्क (Excise Duty) भी लागू होगा। इस फैसले का असर न सिर्फ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, बल्कि तंबाकू उद्योग, किसानों, खुदरा व्यापारियों और शेयर बाजार तक में इसकी गूंज सुनाई दे रही है।

India Tobacco Tax Hike 2026

कर बढ़ोतरी का उद्देश्य क्या है?

सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। भारत में तंबाकू सेवन से हर साल लाखों लोगों की मौत होती है और स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी बोझ पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी लंबे समय से तंबाकू उत्पादों पर ऊंचे कर लगाने की सिफारिश करता रहा है ताकि इनके उपयोग को हतोत्साहित किया जा सके। सरकार का मानना है कि कीमतें बढ़ने से खासकर युवा वर्ग और नए उपभोक्ताओं में तंबाकू सेवन कम होगा।

सिगरेट की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?

इस कर वृद्धि के बाद सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की खुदरा कीमतों में 15 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। खासतौर पर प्रीमियम और मिड-सेगमेंट ब्रांड्स पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, जो सिगरेट का पैकेट अभी 350–400 रुपये में मिलता है, उसकी कीमत 500 रुपये या उससे भी अधिक हो सकती है। इससे नियमित उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

शेयर बाजार में दिखा तत्काल असर:

इस घोषणा के तुरंत बाद शेयर बाजार में तंबाकू कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। देश की सबसे बड़ी तंबाकू कंपनी ITC के शेयर लगभग 10 प्रतिशत तक गिर गए, जिससे कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 50,000 करोड़ रुपये से अधिक घट गया। निवेशकों को डर है कि कीमतें बढ़ने से बिक्री घटेगी और कंपनियों की आय पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

India Tobacco Tax Hike 2026

किसानों और छोटे व्यापारियों की चिंता:

टॉबैको इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और अन्य उद्योग संगठनों ने इस फैसले पर गंभीर चिंता जताई है। उनके अनुसार, भारत में लगभग 40 मिलियन (4 करोड़) लोग तंबाकू की खेती, प्रोसेसिंग, परिवहन और खुदरा व्यापार से जुड़े हैं। अचानक कर बढ़ोतरी से मांग में गिरावट आएगी, जिसका सीधा असर किसानों और छोटे दुकानदारों की आय पर पड़ेगा। कई राज्यों में तंबाकू एक प्रमुख नकदी फसल है, और वहां के किसानों के पास तुरंत कोई वैकल्पिक आजीविका भी नहीं है।

अवैध व्यापार बढ़ने का खतरा:

एक और बड़ी चिंता अवैध और तस्करी वाले सिगरेट बाजार को लेकर है। टॉबैको इंस्टीट्यूट का दावा है कि भारत में पहले ही हर तीन कानूनी सिगरेट पर एक सिगरेट अवैध रूप से बेची जाती है। कीमतें बढ़ने से उपभोक्ता सस्ते अवैध विकल्पों की ओर जा सकते हैं, जिससे सरकार के राजस्व को नुकसान होगा और नकली व घटिया उत्पादों से स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ सकते हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि कर नीति के साथ-साथ सख्त प्रवर्तन और निगरानी भी जरूरी है।

सरकार के राजस्व पर असर:

हालांकि अल्पकालिक रूप से सरकार को कर बढ़ोतरी से ज्यादा राजस्व मिलने की उम्मीद है, लेकिन लंबे समय में अगर कानूनी बिक्री में गिरावट और अवैध व्यापार में बढ़ोतरी होती है, तो राजस्व लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। यह संतुलन बनाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, स्वास्थ्य सुधार और राजस्व संग्रह के बीच।

आम उपभोक्ता क्या करे?

जो लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, उनके लिए यह समय आत्ममंथन का है। बढ़ती कीमतें तंबाकू छोड़ने या कम करने का एक अवसर बन सकती हैं। भारत सरकार और कई गैर-सरकारी संगठन पहले से ही तंबाकू छोड़ने के लिए हेल्पलाइन, काउंसलिंग और निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

फरवरी 2026 से लागू होने वाली सिगरेट और तंबाकू पर कर बढ़ोतरी एक बड़ा और दूरगामी फैसला है। जहां एक ओर यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से सकारात्मक कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इससे लाखों लोगों की आजीविका, उद्योग की स्थिरता और अवैध व्यापार जैसे मुद्दे भी जुड़े हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन चुनौतियों से कैसे निपटती है और क्या यह नीति अपने मूल उद्देश्य, तंबाकू सेवन में कमी, को वास्तव में हासिल कर पाती है।

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