India Israel Relations: भारत की विदेश और आर्थिक नीति पिछले कुछ वर्षों में लगातार बहुपक्षीय और बहुस्तरीय रही है। जब एक ओर अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ विवाद बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत और इज़रायल के बीच एक बड़े आर्थिक समझौते की संभावनाएं तेज़ हो गई हैं। इस संभावित समझौते के पूरा होते ही भारत और इज़रायल के निवेशकों को सुरक्षा और स्थिरता की गारंटी मिलेगी, जबकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संरक्षणवादी रुख पर यह एक बड़ा झटका माना जाएगा।
इज़रायल के वित्त मंत्री बेज़ेलेल स्मोट्रिच 8 से 10 सितंबर तक तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर हस्ताक्षर की उम्मीद है, साथ ही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की नींव रखे जाने की संभावना भी प्रबल हो गई है।
India Israel Relations: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और नई दिशा
भारत और इज़रायल के संबंध 1992 में पूर्ण राजनयिक स्तर पर स्थापित हुए थे। इसके बाद दोनों देशों ने रक्षा, कृषि, विज्ञान, तकनीक, जल प्रबंधन और साइबर सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग को गहराया।
अब जब वैश्विक परिदृश्य में आर्थिक प्रतिस्पर्धा और संरक्षणवाद बढ़ रहा है, तो भारत और इज़रायल का एक-दूसरे के साथ आर्थिक साझेदारी को मज़बूत करना स्वाभाविक कदम माना जा रहा है। खासकर अमेरिका के साथ भारत के टैरिफ विवाद की पृष्ठभूमि में यह समझौता बेहद रणनीतिक हो सकता है।
स्मोट्रिच की भारत यात्रा: प्रमुख उद्देश्य और कार्यक्रम
इस यात्रा का सबसे बड़ा उद्देश्य है—भारत और इज़रायल के बीच आर्थिक और वित्तीय संबंधों को मजबूत करना।
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स्मोट्रिच नई दिल्ली में भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात करेंगे।
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वह मुंबई और गांधीनगर स्थित GIFT सिटी का भी दौरा करेंगे, जिसे भारत में ग्लोबल फाइनेंशियल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।
यह दौरा न केवल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर हस्ताक्षर के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है, बल्कि संभावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की रूपरेखा भी इसी दौरान तय हो सकती है।
द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT): मसौदा तैयार, अब हस्ताक्षर की बारी
सूत्रों के अनुसार, भारत और इज़रायल के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) के मसौदे पर पहले ही बातचीत पूरी हो चुकी है। अब केवल अंतिम हस्ताक्षर बाकी हैं।
इस संधि के लागू होने से दोनों देशों के निवेशकों को कई फायदे मिलेंगे:
- निवेशों को कानूनी सुरक्षा और स्थिरता मिलेगी।
- किसी विवाद की स्थिति में स्वतंत्र मध्यस्थता मंच उपलब्ध होगा।
- निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और पूंजी प्रवाह तेज़ होगा।
यह ध्यान देने योग्य है कि इज़रायल अब तक 15 से अधिक देशों के साथ ऐसे समझौतों पर हस्ताक्षर कर चुका है। इनमें जापान, फिलीपींस, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश शामिल हैं। भारत के साथ यह संधि इज़रायल की वैश्विक आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की संभावनाएं

हालांकि इस यात्रा के दौरान FTA पर औपचारिक हस्ताक्षर नहीं होंगे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसकी नींव रखी जा सकती है। यदि भारत और इज़रायल मुक्त व्यापार समझौते की ओर बढ़ते हैं तो दोनों देशों के बीच व्यापार कई गुना बढ़ सकता है।
भारत को हाई-टेक, रक्षा, साइबर और कृषि तकनीक से लाभ होगा, जबकि इज़रायल भारतीय बाजार में अपने लिए विशाल अवसर देख रहा है।
अमेरिका-भारत टैरिफ विवाद और ट्रंप फैक्टर
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक विवाद नया नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर कई तरह के टैरिफ और प्रतिबंध लगाए थे। भारत ने भी इसके जवाब में कुछ अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क बढ़ा दिए थे।
अब जब भारत इज़रायल जैसे देशों के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी कर रहा है, तो यह अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति के लिए चुनौती हो सकती है। ट्रंप पहले से ही संरक्षणवाद के समर्थक रहे हैं और यदि भारत-इज़रायल के बीच बड़ा आर्थिक समझौता होता है, तो यह अमेरिकी व्यापारिक हितों को झटका देगा।
भारत-इज़रायल व्यापार की मौजूदा स्थिति
- वर्तमान में भारत और इज़रायल के बीच व्यापार लगभग 10 अरब डॉलर के आसपास है।
- इसमें हीरे, रसायन, मशीनरी, उर्वरक और कृषि उत्पाद प्रमुख हैं।
- रक्षा और टेक्नोलॉजी में सहयोग पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है।
यदि BIT और FTA लागू होते हैं तो यह आंकड़ा आने वाले समय में दोगुना या तिगुना हो सकता है।
निवेशकों के लिए नए अवसर
इस समझौते से भारत और इज़रायल दोनों देशों के निवेशकों को बड़े अवसर मिलेंगे।
- भारत की स्टार्टअप इकॉनमी को इज़रायली टेक्नोलॉजी से नया बल मिलेगा।
- इज़रायल के लिए भारत एक बड़ा उपभोक्ता बाजार साबित होगा।
- दोनों देश मिलकर साइबर सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, और रक्षा उत्पादन में नए प्रोजेक्ट्स शुरू कर सकते हैं।
GIFT सिटी दौरे का महत्व
स्मोट्रिच का GIFT सिटी दौरा विशेष महत्व रखता है। गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र है। इज़रायल की वित्तीय कंपनियां और स्टार्टअप्स यहां निवेश और साझेदारी कर सकती हैं।
इससे भारत को वैश्विक वित्तीय हब बनने की दिशा में और ताकत मिलेगी।
भारत और इज़रायल के बीच संभावित द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) और आगे चलकर मुक्त व्यापार समझौता (FTA) न केवल दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक संदेश देगा कि भारत बहुपक्षीय साझेदारी में विश्वास करता है।
अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद के बीच यह कदम ट्रंप की नीतियों को सीधी चुनौती माना जाएगा। यह समझौता निवेशकों के लिए कानूनी सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करेगा और दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति देगा।
आने वाले समय में यदि FTA पर भी हस्ताक्षर होते हैं तो भारत-इज़रायल का आर्थिक संबंध एक नई ऊंचाई पर पहुंचेगा, जो वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर अहम असर डाल सकता है।
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