India Bangladesh Relations Under Strain: भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर संकट

India Bangladesh Relations Under Strain: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। दिसंबर 2025 में ढाका में हुए विरोध प्रदर्शनों और बंगाल की खाड़ी में हुई समुद्री घटना ने द्विपक्षीय संबंधों पर नई चुनौती खड़ी कर दी है। यह तनाव ऐसे समय में सामने आया है, जब बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में निर्वासन में हैं।

ढाका में विरोध प्रदर्शन और भारतीय मिशनों की सुरक्षा:

17 दिसंबर को बांग्लादेश में जुलाई विद्रोह से जुड़े समूहों ने ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग और अन्य प्रमुख स्थानों की ओर मार्च किया। ये वही समूह हैं, जिनके आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी।
हालांकि बांग्लादेशी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को भारतीय मिशनों तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया, लेकिन भारत ने इस घटना को गंभीरता से लिया।

भारत की प्रतिक्रिया:

  • भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त को तलब कर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

  • सुरक्षा कारणों से भारत ने बांग्लादेश में अपने वीज़ा सेवा केंद्र अस्थायी रूप से बंद कर दिए।

  • भारत ने साफ कहा कि किसी भी राजनयिक मिशन की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मेज़बान देश की जिम्मेदारी होती है।

यह कदम भारत की उस चिंता को दर्शाता है, जिसमें वह अपने नागरिकों और कूटनीतिक संस्थानों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

India Bangladesh Relations Under Strain

समुद्र में टकराव: मछुआरों की मौत से बढ़ा तनाव

तनाव केवल ज़मीनी स्तर तक सीमित नहीं रहा। 14 दिसंबर को बंगाल की खाड़ी में एक गंभीर समुद्री घटना सामने आई, जब बांग्लादेश नौसेना के एक जहाज ने कथित तौर पर एक भारतीय मछली पकड़ने वाली नाव को टक्कर मार दी।

इस घटना के मुख्य बिंदु:

  • टक्कर के कारण दो भारतीय मछुआरों की मौत हो गई।

  • भारत ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बताया।

  • इसके जवाब में भारत ने कुछ बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नौकाओं को हिरासत में लिया, जिससे विवाद और गहरा गया।

मछुआरों से जुड़ी ऐसी घटनाएं पहले भी भारत-बांग्लादेश समुद्री सीमा पर होती रही हैं, लेकिन इस बार मामला इसलिए गंभीर हो गया क्योंकि इसमें नौसेना की सीधी संलिप्तता बताई जा रही है।

शेख हसीना का निर्वासन और राजनीतिक पृष्ठभूमि:

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में बांग्लादेश की राजनीति एक अहम भूमिका निभा रही है। जुलाई विद्रोह के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और वे फिलहाल नई दिल्ली में निर्वासन में रह रही हैं
कुछ बांग्लादेशी राजनीतिक गुट भारत पर आरोप लगा रहे हैं कि वह आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, जिससे भारत-विरोधी भावनाएं भड़क रही हैं।

भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि वह बांग्लादेश की संप्रभुता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करता है और किसी भी देश की आंतरिक राजनीति में दखल नहीं देता।

व्यापार और सीमाओं से जुड़ी मजबूरियाँ:

भारत और बांग्लादेश के बीच

  • 4,000 किलोमीटर से अधिक लंबी साझा सीमा

  • अरबों डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार

  • ऊर्जा, जल, परिवहन और सुरक्षा सहयोग

जैसे कई अहम पहलू जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी भी तरह का तनाव दोनों देशों के हितों को नुकसान पहुंचा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे तो इसका असर

  • सीमा व्यापार

  • मछुआरा समुदाय

  • क्षेत्रीय स्थिरता

पर पड़ सकता है।

दोनों देशों की अपील: संयम और संवाद

तनाव के बावजूद भारत और बांग्लादेश- दोनों ने संयम बरतने और बातचीत के ज़रिए समाधान निकालने की अपील की है।
भारत का कहना है कि

  • राजनयिक मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए

  • समुद्री घटनाओं की निष्पक्ष जांच हो

वहीं बांग्लादेश ने भी यह संकेत दिया है कि वह किसी भी तरह के टकराव से बचना चाहता है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में मौजूदा तनाव एक संवेदनशील लेकिन संभालने योग्य स्थिति है। विरोध प्रदर्शन, समुद्री टकराव और राजनीतिक अस्थिरता ने हालात को जटिल बना दिया है, लेकिन दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग और साझा हित यह उम्मीद जगाते हैं कि बातचीत से समाधान निकाला जाएगा।

दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए यह ज़रूरी है कि भारत और बांग्लादेश मतभेदों को टकराव में बदलने के बजाय राजनयिक समझदारी और संयम के साथ आगे बढ़ें।

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