How Tyre Pressure Affects Mileage: हाईवे पर निकलने से पहले टायर प्रेशर जरूर चेक करें, वरना…

How Tyre Pressure Affects Mileage: गाड़ी का माइलेज कम होना आजकल हर वाहन मालिक की बड़ी चिंता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, ऐसे में अगर गाड़ी अपेक्षित माइलेज नहीं देती तो खर्च और भी बढ़ जाता है। बहुत से लोग इंजन, ऑयल या ड्राइविंग स्टाइल को दोष देते हैं, लेकिन अक्सर एक छोटी-सी चीज़ नज़रअंदाज़ हो जाती है — टायर प्रेशर। सही टायर प्रेशर न केवल आपकी गाड़ी की माइलेज बढ़ाता है, बल्कि टायर की उम्र, ब्रेकिंग परफॉर्मेंस और सुरक्षा पर भी सीधा असर डालता है।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि टायर प्रेशर माइलेज को कैसे प्रभावित करता है, कितनी हवा सही होती है, कम या ज्यादा हवा के क्या नुकसान हैं और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

टायर प्रेशर और माइलेज का वैज्ञानिक संबंध | How Tyre Pressure Affects Mileage: 

जब टायर में हवा कम होती है, तो टायर का संपर्क क्षेत्र (contact patch) सड़क से ज्यादा फैल जाता है। इससे टायर और सड़क के बीच घर्षण (friction) बढ़ जाता है। इस स्थिति को तकनीकी भाषा में रोलिंग रेजिस्टेंस कहा जाता है। रोलिंग रेजिस्टेंस जितनी ज्यादा होगी, इंजन को गाड़ी आगे बढ़ाने के लिए उतनी ज्यादा ताकत लगानी पड़ेगी। ज्यादा ताकत का मतलब है ज्यादा ईंधन खपत।

कई ऑटोमोबाइल अध्ययनों के अनुसार, यदि टायर प्रेशर 1 PSI कम हो जाए, तो माइलेज लगभग 0.2% तक कम हो सकता है। अगर टायर 8–10 PSI कम हों, तो माइलेज में 2–3% या उससे ज्यादा गिरावट आ सकती है। यह प्रतिशत सुनने में छोटा लग सकता है, लेकिन साल भर में यह काफी अतिरिक्त ईंधन खर्च में बदल जाता है।

कम टायर प्रेशर के नुकसान

कम टायर प्रेशर सिर्फ माइलेज कम नहीं करता, बल्कि कई और समस्याएँ पैदा करता है। जब टायर में हवा कम होती है, तो टायर के किनारे (shoulders) ज्यादा घिसते हैं। इससे टायर जल्दी खराब हो जाता है और आपको समय से पहले नया टायर खरीदना पड़ सकता है।

इसके अलावा, कम हवा के कारण टायर ज्यादा गर्म होते हैं। हाईवे पर लंबी दूरी तय करते समय यह खतरनाक हो सकता है। ज्यादा गर्म टायर फटने (टायर ब्लास्ट) का खतरा बढ़ाते हैं। गाड़ी की हैंडलिंग भी खराब हो जाती है और ब्रेकिंग दूरी बढ़ सकती है।

क्या ज्यादा टायर प्रेशर रखने से माइलेज बढ़ता है?

कुछ लोग सोचते हैं कि ज्यादा हवा भरने से माइलेज और बेहतर होगा। आंशिक रूप से यह सच है कि थोड़ा अधिक प्रेशर रोलिंग रेजिस्टेंस कम कर सकता है, लेकिन कंपनी द्वारा सुझाए गए स्तर से ज्यादा हवा भरना सुरक्षित नहीं है।

ज्यादा टायर प्रेशर होने पर टायर का बीच वाला हिस्सा ज्यादा घिसता है। इससे टायर की उम्र घटती है। साथ ही सड़क पर पकड़ (ग्रिप) कम हो सकती है, खासकर बारिश या फिसलन वाली सड़क पर। ब्रेक लगाने पर गाड़ी फिसल सकती है। इसलिए “ज्यादा हवा = ज्यादा माइलेज” का फॉर्मूला हमेशा सही नहीं है। सही वही है जो निर्माता ने बताया है।

सही टायर प्रेशर कितना होना चाहिए?

How Tyre Pressure Affects Mileage

हर गाड़ी के लिए सही टायर प्रेशर अलग होता है। यह गाड़ी के वजन, टायर के साइज और डिजाइन पर निर्भर करता है।

आमतौर पर:

  • छोटी कारों में 30–35 PSI

  • SUV में 32–38 PSI

  • बाइक में आगे 25–30 PSI और पीछे 30–36 PSI (मॉडल के अनुसार)

सही प्रेशर की जानकारी आपको इन जगहों पर मिल सकती है:

  • ड्राइवर साइड डोर के अंदर लगे स्टिकर पर

  • ओनर मैन्युअल में

  • कुछ गाड़ियों में फ्यूल कैप के अंदर

हमेशा कंपनी द्वारा सुझाए गए प्रेशर का पालन करें। अगर गाड़ी में ज्यादा यात्री या सामान है, तो प्रेशर थोड़ा अलग हो सकता है — यह भी मैन्युअल में लिखा होता है।

टायर प्रेशर कब और कैसे चेक करें?

टायर प्रेशर महीने में कम से कम एक बार जरूर चेक करना चाहिए। लंबी यात्रा से पहले भी प्रेशर जांचना जरूरी है।

एक महत्वपूर्ण बात — टायर प्रेशर हमेशा “कोल्ड टायर” में चेक करें। यानी जब गाड़ी कुछ घंटों से खड़ी हो। चलने के बाद टायर गर्म हो जाते हैं और प्रेशर बढ़ा हुआ दिख सकता है, जो सही रीडिंग नहीं होती।

तापमान का भी असर पड़ता है। आम तौर पर तापमान में हर 10 डिग्री सेल्सियस बदलाव पर टायर प्रेशर लगभग 1 PSI बदल सकता है। सर्दियों में प्रेशर कम हो जाता है, इसलिए ठंड में नियमित जांच जरूरी है।

TPMS क्या है और क्या यह भरोसेमंद है?

आजकल कई नई गाड़ियों में TPMS (Tyre Pressure Monitoring System) आता है। यह सिस्टम डैशबोर्ड पर टायर प्रेशर की जानकारी देता है। अगर प्रेशर बहुत कम हो जाए, तो यह चेतावनी देता है।

हालांकि TPMS मददगार है, फिर भी महीने में एक बार मैन्युअल गेज से जांच करना बेहतर होता है, क्योंकि कभी-कभी सेंसर में भी त्रुटि हो सकती है।

माइलेज सुधारने के लिए अतिरिक्त सुझाव

सिर्फ टायर प्रेशर ही नहीं, बल्कि कुछ और बातें भी माइलेज पर असर डालती हैं। जैसे:

  • व्हील अलाइनमेंट और बैलेंसिंग सही रखें

  • अचानक तेज एक्सेलेरेशन से बचें

  • ब्रेक कम से कम और स्मूद तरीके से लगाएँ

  • गाड़ी में अतिरिक्त अनावश्यक वजन न रखें

  • सही इंजन ऑयल का इस्तेमाल करें

लेकिन इन सबके बीच टायर प्रेशर सबसे आसान और सस्ता तरीका है माइलेज सुधारने का।

बाइक में टायर प्रेशर का असर

बाइक में टायर प्रेशर और भी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। कम हवा होने पर बाइक का संतुलन बिगड़ सकता है। माइलेज कम होने के साथ-साथ टायर जल्दी घिसते हैं। खासकर अगर आप रोज ऑफिस या लंबी दूरी तय करते हैं, तो सही प्रेशर बनाए रखना बहुत जरूरी है।

टायर प्रेशर एक छोटी-सी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण चीज है, जो आपकी गाड़ी के माइलेज, सुरक्षा और टायर की उम्र पर बड़ा असर डालती है। कम हवा से ईंधन ज्यादा खर्च होता है और टायर जल्दी खराब होते हैं। ज्यादा हवा भी नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए हमेशा निर्माता द्वारा बताए गए प्रेशर को ही बनाए रखें।

अगर आप महीने में सिर्फ 5 मिनट निकालकर टायर प्रेशर चेक करते हैं, तो साल भर में सैकड़ों या हजारों रुपये तक की बचत कर सकते हैं। यह एक छोटी आदत है, लेकिन बड़ा फायदा देती है।

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