Hanuman Ashtami 2025: भारत में हर साल पौष मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को हनुमान अष्टमी का पावन पर्व बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस बार वर्ष 2025 में भी यह तिथि भक्तों के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है। माना जाता है कि इस दिन हनुमानजी की उपासना करने से जीवन में चली आ रही बाधाएं दूर होती हैं और ग्रहों के क्रूर प्रभाव शांत होकर शुभ फल देने लगते हैं। देशभर के मंदिरों में सुबह से विशेष पूजा, अभिषेक और भंडारे का आयोजन किया जाता है। भक्त बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुँचकर बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
हनुमान अष्टमी केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि वह दिन है जब भक्त अपने आराध्य हनुमानजी की शक्ति, पराक्रम और संरक्षण को याद करते हुए जीवन की हर कठिनाई से विजय प्राप्त करने का संकल्प लेते हैं।
क्यों मनाई जाती है हनुमान अष्टमी: Hanuman Ashtami 2025

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग में हनुमानजी ने पाताल लोक जाकर अहिरावण का वध किया था। अहिरावण, जो रावण का मायावी भाई माना जाता है, उसने छल से भगवान राम और लक्ष्मण को पाताल लोक में कैद कर लिया था। यह कार्य इतना कठिन था कि देवता भी असहाय हो गए थे। ऐसे समय में हनुमानजी ने अपने धैर्य, बुद्धि और अतुलनीय शक्ति के बल पर पाताल लोक में प्रवेश किया और अहिरावण का वध कर प्रभु राम-लक्ष्मण को मुक्त कराया।
कथा यह भी बताती है कि पाताल लोक से लौटने के बाद हनुमानजी ने पौष कृष्ण अष्टमी के दिन पृथ्वी के नाभि केंद्र माने जाने वाले उज्जैन नगर में विश्राम किया। उसी समय से यह तिथि विजय उत्सव के रूप में मनाई जाने लगी और इसे हनुमान अष्टमी कहा जाने लगा। इस दिन को हनुमानजी की पराक्रम-गाथा, भक्ति और अटूट समर्पण के प्रतीक रूप में स्मरण किया जाता है।
हनुमान अष्टमी का ज्योतिषीय महत्व: शनि, राहु और मंगल के दुष्प्रभाव होंगे शांत
Hanuman Ashtami 2025: ज्योतिष के अनुसार हनुमानजी को शनि का दार्शनिक मित्र माना जाता है। कहा जाता है कि जब किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैया, राहु-दोष या मंगल की प्रतिकूल स्थिति होती है, तब उसके जीवन में मानसिक तनाव, बाधाएं, आर्थिक समस्याएं और दुर्भाग्य बढ़ जाता है। ऐसे कठिन समय में हनुमानजी की आराधना हर प्रकार की नकारात्मकता से मुक्ति का मार्ग खोलती है।
हनुमान अष्टमी के दिन शाम और प्रातःकाल में हनुमानजी को तेल, सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने से ग्रहों के क्रूर प्रभाव कम होने लगते हैं। मान्यता है कि हनुमान अष्टक, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का भक्तिभाव से पाठ करने पर वास्तविक संकटों से रक्षा होती है। हनुमानजी की कृपा वह दिव्य शक्ति है जो भक्त को साहस, ऊर्जा, संयम और सकारात्मकता से भर देती है।
देशभर में हनुमान अष्टमी का उत्सव: मंदिरों में विशेष पूजा और भक्तों की भीड़
Hanuman Ashtami 2025: हनुमान अष्टमी पर सुबह से ही मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हो जाता है। कई स्थानों पर महाअभिषेक का आयोजन किया जाता है, जिसमें गंगाजल, दूध, दही, शहद और तेल से हनुमानजी का अभिषेक किया जाता है। भक्त घंटों तक पंक्तियों में खड़े होकर आराधना करते हैं।
शाम के समय विशेष आरती, भजन संध्या और सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाता है। कई जगहों पर भंडारे और प्रसाद वितरण भी होता है, जिसमें भक्त बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। यह दिन सामूहिक भक्ति, सद्भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बन जाता है।
हनुमान अष्टमी पर पवित्र भावना से करें उपासना: जानें संपूर्ण पूजा विधि
हनुमानजी की सही विधि से पूजा करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होंगी, ऐसा शास्त्र में वर्णित है। हनुमान अष्टमी के दिन सुबह से ही वातावरण में पवित्रता और दिव्यता का संचार महसूस होता है। दिन की शुरुआत भगवान राम और हनुमानजी के ध्यान से की जानी चाहिए।
स्नान करके साफ वस्त्र धारण करने के बाद व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है। घर के मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करके चौकी पर लाल कपड़ा बिछाया जाता है और उस पर हनुमानजी की मूर्ति स्थापित की जाती है। हनुमानजी को विशेष रूप से सिंदूर, चमेली का तेल, अक्षत और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। कई भक्त इस दिन बजरंगबली को केसरिया चोला चढ़ाते हैं, जो अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजा के दौरान हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक और सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत फलदायी कहा गया है। यह पाठ मन को एकाग्र करता है और जीवन के संकटों को दूर करने की शक्ति देता है। पूजा के बाद बूंदी के लड्डू का भोग लगाया जाता है और संकटमोचन हनुमान आरती करके दिन का व्रत पूरा किया जाता है।
हनुमान अष्टमी का आध्यात्मिक संदेश
Hanuman Ashtami 2025: हनुमानजी का जीवन भक्तों के लिए प्रेरणा का अनंत स्रोत है। वह केवल शक्ति के देवता नहीं, बल्कि विनम्रता, भक्ति, सेवा भावना और लक्ष्य पर दृढ़ता का प्रतीक हैं। हनुमान अष्टमी का पर्व हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, विश्वास और समर्पण से हर चुनौती पर विजय पाई जा सकती है।
हनुमानजी की कृपा उन सभी पर बनी रहती है जो तन-मन-धन से अपने कर्तव्यों को निभाते हैं, ईमानदारी से कर्म करते हैं और भगवान राम के मार्ग पर चलते हैं। यह दिन व्यक्ति को नकारात्मक विचारों से दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा की ओर प्रेरित करता है।
आस्था और विश्वास का पर्व—राष्ट्रभर में मनाया जाने वाला हनुमानजी का उत्सव
भारत के अलग-अलग राज्यों में हनुमान अष्टमी विविध रूपों में मनाई जाती है। उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। उज्जैन में विशेष रूप से यह पर्व अत्यंत भव्य रूप में मनाया जाता है क्योंकि माना जाता है कि पाताल लोक से लौटने के बाद हनुमानजी ने उज्जैन में विश्राम किया था।
उधर दक्षिण भारत में भक्त तैलाभिषेक करके दिनभर हनुमान नाम जप करते हैं। उत्तर भारत में सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा का समूह गायन बड़े स्तर पर आयोजित किया जाता है। यह आस्था और भक्ति का उत्सव हर शहर, हर गांव में खुशी और शांति का संदेश फैलाता है।
हनुमानजी की कृपा से दूर होंगे संकट

Hanuman Ashtami 2025: आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में हनुमान अष्टमी जैसा पर्व मन को अद्भुत शांति देता है। भक्तों का मानना है कि बजरंगबली की उपासना से डर, रोग, बाधा, नकारात्मक विचार और कठिन परिस्थितियाँ धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं। हनुमानजी की कृपा से व्यक्ति में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
इस दिन किया गया पुण्य कार्य अनेक गुना फलदायी माना जाता है। व्रत, पूजा और मानसिक शांति का अभ्यास व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में मजबूत बनाता है। हनुमानजी संकटमोचन हैं और उनकी उपासना जीवन के हर संकट को छोटा कर देती है।
Disclaimer:
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना है। धार्मिक तथ्यों की पुष्टि संबंधित स्रोतों से करें।
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