H1B Visa 2025: अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले लाखों पेशेवरों के लिए H1B वीज़ा हमेशा एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। यह वीज़ा अमेरिकी नियोक्ताओं को विदेशी पेशेवरों को अपनी कंपनियों में काम करने की अनुमति देता है। हाल ही में H1B वीज़ा के शुल्क में भारी वृद्धि की खबर ने इस अवसर को प्रभावित कर दिया है। नई नियमावली के अनुसार, अब नियोक्ताओं को इस वीज़ा के लिए पहले से कहीं ज्यादा राशि चुकानी होगी। इस बदलाव का असर खासकर भारतीय पेशेवरों और आईटी कंपनियों पर होगा। इस ब्लॉग में हम H1B वीज़ा, उसके शुल्क और हाल की खबरों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

H1B वीज़ा क्या है?
H1B वीज़ा एक गैर-आप्रवासी अमेरिकी वीज़ा है, जो अमेरिकी नियोक्ताओं को विदेशी पेशेवरों को विशेष क्षेत्रों में काम करने की अनुमति देता है। इस वीज़ा के लिए आवेदकों को संबंधित क्षेत्र में स्नातक डिग्री या समकक्ष अनुभव होना आवश्यक है। यह वीज़ा आमतौर पर 3 साल के लिए जारी किया जाता है, जिसे 6 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसकी वार्षिक सीमा 85,000 तक सीमित है, जिसमें से 20,000 अतिरिक्त वीज़ा उन आवेदकों के लिए होते हैं जिनके पास अमेरिकी मास्टर डिग्री होती है।
H1B वीज़ा शुल्क में वृद्धि:
21 सितंबर 2025 से, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H1B वीज़ा आवेदनों पर $100,000 वार्षिक शुल्क लागू करने की घोषणा की है, जो पहले $215 था। यह शुल्क नियोक्ता द्वारा हर वर्ष देना होगा, और यह 6 वर्षों तक लागू रहेगा। इसका उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों को विदेशी श्रमिकों की बजाय अमेरिकी श्रमिकों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करना है।
शुल्क वृद्धि का प्रभाव:
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भारतीय पेशेवरों पर प्रभाव: भारत, जो H1B वीज़ा के लिए सबसे बड़ा स्रोत देश है, पर इस शुल्क वृद्धि का गहरा असर पड़ेगा। अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों की संख्या लाखों में है, और इस शुल्क में वृद्धि से उनके लिए वीज़ा प्राप्त करना और महंगा हो जाएगा।
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कंपनियों पर असर: भारतीय आईटी कंपनियाँ जैसे TCS, Infosys, और Wipro, जो H1B वीज़ा पर अमेरिकी परियोजनाओं में काम करती हैं, इस शुल्क वृद्धि से प्रभावित होंगी। उनके लिए लागत में वृद्धि होगी, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
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नियोक्ताओं की प्रतिक्रिया: Microsoft और Amazon जैसी कंपनियों ने H1B वीज़ा धारकों को अमेरिका में बने रहने की सलाह दी है, ताकि वे नए शुल्क से प्रभावित न हों।
शुल्क वृद्धि के कारण:
अमेरिकी सरकार का कहना है कि H1B वीज़ा कार्यक्रम का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे अमेरिकी श्रमिकों की नौकरियाँ खतरे में पड़ रही हैं। सरकार का उद्देश्य इस शुल्क वृद्धि के माध्यम से अमेरिकी श्रमिकों को प्राथमिकता देना और विदेशी श्रमिकों की संख्या को नियंत्रित करना है।
H1B वीज़ा अमेरिका में काम करने वाले पेशेवरों के लिए एक सुनहरा अवसर रहा है, खासकर भारतीय आईटी और तकनीकी पेशेवरों के लिए। हालांकि, हाल ही में लागू किए गए नए नियमों के तहत H1B वीज़ा शुल्क में भारी वृद्धि ने इस अवसर को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। $100,000 वार्षिक शुल्क की घोषणा न केवल नियोक्ताओं के लिए वित्तीय दबाव बढ़ाती है, बल्कि पेशेवरों के लिए भी अमेरिका में काम करना महंगा और कठिन कर देती है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों को प्राथमिकता देना और H1B वीज़ा प्रणाली के दुरुपयोग को रोकना है। भारतीय पेशेवरों और कंपनियों को अब अपनी रणनीतियों में बदलाव करना होगा, ताकि वे इस नए माहौल में भी अवसरों का सही उपयोग कर सकें। अंततः, H1B वीज़ा की महत्वता कम नहीं हुई है, लेकिन अब इसके लिए बेहतर योजना और तैयारी करना और भी जरूरी हो गया है।
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