GST Council Meeting 2025: कपड़े, जूते और टीवी भी हो सकते हैं सस्ते, जानें किस पर लगेगा 5% और 18% टैक्स

GST Council Meeting 2025: भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) काउंसिल की अहम बैठक आज से शुरू हो चुकी है। यह बैठक खासतौर पर टैक्स स्लैब में बदलाव और आम जनता के लिए राहत के उपायों पर केंद्रित है। वित्त मंत्रालय ने काउंसिल के सामने एक प्रस्ताव रखा है, जिसमें मौजूदा चार टैक्स स्लैब को घटाकर केवल दो स्लैब करने की बात कही गई है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो कपड़े, जूते, टीवी, एयर कंडीशनर और कई अन्य चीजों के दाम घट सकते हैं।

GST में बड़े सुधार का ऐलान | GST Council Meeting 2025

GST Council Meeting

15 अगस्त, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में जीएसटी में बड़े सुधार की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि यह सुधार आम जनता के लिए फायदेमंद साबित होगा। इस घोषणा के बाद वित्त मंत्रालय ने टैक्स स्लैब में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया और इसे GST काउंसिल के सामने रखा गया।

अब पहली बार इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बैठक हो रही है। उम्मीद की जा रही है कि बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है और नया सिस्टम दिवाली से लागू हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो आम जनता को कई चीजों की कीमतों में तुरंत राहत मिल जाएगी।

वर्तमान GST स्लैब

वर्तमान में भारत में चार जीएसटी स्लैब लागू हैं – 5%, 12%, 18% और 28%। इन स्लैब के आधार पर अलग-अलग वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स लगाया जाता है। 5% और 12% स्लैब आम तौर पर आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होता है, जबकि 18% और 28% स्लैब इलेक्ट्रॉनिक्स, कंस्ट्रक्शन मटेरियल और लक्जरी सामान पर लागू होते हैं।

सरकार का प्रस्ताव है कि इन चार स्लैब को घटाकर केवल दो स्लैब किए जाएँ – 5% और 18%। इसका मतलब है कि अब 12% और 28% टैक्स वाले उत्पाद 18% या 5% स्लैब में शामिल किए जा सकते हैं।

कौन-कौन सी चीजें हो सकती हैं सस्ती

अगर जीएसटी स्लैब में बदलाव होता है, तो कई जरूरी और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम घट सकते हैं। इसमें घी, मक्खन, पनीर और चीज जैसी डेयरी वस्तुएँ शामिल हैं। इसके अलावा पैकेज्ड फ्रोजन सब्जियां, बिस्कुट और नमकीन पर भी टैक्स कम होने की संभावना है।

फ्रूट जूस (नॉन-कार्बोनेटेड), छाते, कपड़े और जूते भी इस बदलाव से सस्ते हो सकते हैं। सोलर वॉटर हीटर और कृषि से जुड़े उपकरण भी टैक्स में कटौती के दायरे में आ सकते हैं। घर और कंस्ट्रक्शन से जुड़े उत्पाद जैसे एयर कंडीशनर, टीवी, सीमेंट, टाइल्स और पेंट भी कम टैक्स का लाभ पा सकते हैं।

इस बदलाव का असर न केवल आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, बल्कि रियल एस्टेट और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भी सकारात्मक प्रभाव दिख सकता है।

बीमा प्रीमियम पर भी राहत

सरकार की ओर से यह प्रस्ताव भी रखा गया है कि हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी पूरी तरह से हटा दी जाए। यानी इन सेवाओं को 0% टैक्स स्लैब में डाला जा सकता है। इससे लोग बीमा पॉलिसी खरीदने में बड़ी राहत महसूस करेंगे।

हालांकि, इस कदम से सरकार को सालाना करीब 9,700 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होने का अनुमान है। लेकिन इसे आम जनता की सुविधा और वित्तीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने के नजरिए से देखा जा रहा है।

GST कटौती का आम जनता पर असर

अगर GST स्लैब में बदलाव होता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा आम जनता को मिलेगा। रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं जैसे घी, पनीर, फ्रोजन सब्जी, कपड़े, जूते, टीवी और एयर कंडीशनर की कीमतों में कमी आएगी। इससे घर बनाने और उपकरण खरीदने में खर्च कम होगा।

सिर्फ घरेलू सामान ही नहीं, बल्कि कृषि उपकरण और सोलर वॉटर हीटर जैसी महंगी चीजें भी सस्ती हो सकती हैं। यह किसानों और गृहस्थों के लिए राहत का संदेश है।

बीमा प्रीमियम पर 0% टैक्स का प्रस्ताव भी आम लोगों के लिए वित्तीय सुरक्षा को आसान बनाएगा। लोग अपनी हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बिना अतिरिक्त टैक्स बोझ के खरीद सकेंगे।

व्यापार और उद्योग पर असर

GST स्लैब में बदलाव से केवल उपभोक्ताओं को फायदा नहीं होगा, बल्कि व्यापार और उद्योग को भी लाभ होगा। इलेक्ट्रॉनिक्स, रियल एस्टेट और निर्माण सामग्री के उत्पादन और बिक्री पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

उदाहरण के लिए, टीवी और एयर कंडीशनर जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की कीमतें कम होने से इनकी मांग बढ़ सकती है। इसी तरह, सीमेंट, टाइल्स और पेंट जैसे निर्माण सामग्री की कीमतों में कटौती से घर बनाने और निर्माण प्रोजेक्ट्स पर लागत कम होगी।

इससे नए प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ेगा और निर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

विशेषज्ञों की राय

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी स्लैब में कटौती का निर्णय आम जनता के लिए राहत और व्यवसाय के लिए बढ़ावा दोनों साबित होगा। टैक्स स्लैब को केवल दो में सीमित करने से कर प्रक्रिया भी सरल होगी और टैक्स कलेक्शन में पारदर्शिता आएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारतीय उपभोक्ताओं को महंगे सामान खरीदने में राहत देगा और रियल एस्टेट और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश और बिक्री को प्रोत्साहित करेगा।

भविष्य की संभावनाएँ

GST Council Meeting के बाद सरकार टैक्स स्लैब को 5% और 18% में सीमित करने का निर्णय कर सकती है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो दिवाली से पहले कई जरूरी वस्तुएँ सस्ती हो सकती हैं। आम लोग घर बनाने, बीमा पॉलिसी खरीदने और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण लेने में सीधे लाभ महसूस करेंगे।

यह बदलाव न केवल उपभोक्ताओं के लिए राहत लाएगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। उद्योगों के लिए उत्पादन बढ़ेगा, रियल एस्टेट सेक्टर में नई मांग आएगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

GST स्लैब बदलाव: सस्ती होने वाली चीज़ें और टैक्स तुलना

उत्पाद / सेवा वर्तमान GST (%) प्रस्तावित GST (%)
घी 12% 5%
मक्खन 12% 5%
पनीर 12% 5%
चीज (Cheese) 12% 5%
पैकेज्ड फ्रोजन सब्जियां 12% 5%
बिस्कुट / नमकीन 12% 5%
फ्रूट जूस (Non-carbonated) 12% 5%
छाते 18% 18% / 5%
कपड़े 12% / 18% 5% / 18%
जूते 12% / 18% 5% / 18%
सोलर वॉटर हीटर 28% 18%
कृषि उपकरण 18% 5% / 18%
एयर कंडीशनर 28% 18%
टीवी 28% 18%
सीमेंट 28% 18%
टाइल्स 18% 18%
पेंट 18% 18%
हेल्थ / लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम 18% 0%

GST Council Meeting 2025 की यह बैठक आम जनता और उद्योग दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर सरकार टैक्स स्लैब में कटौती करती है और केवल 5% और 18% स्लैब लागू करती है, तो कपड़े, जूते, टीवी, एयर कंडीशनर, सीमेंट, टाइल्स, पेंट और बीमा प्रीमियम जैसी चीजें सस्ती हो जाएँगी।

यह कदम आम जनता की जेब पर सकारात्मक असर डालेगा और वित्तीय सुरक्षा को आसान बनाएगा। साथ ही, उद्योग और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश और मांग बढ़ेगी। आम लोग अपने घर बनाने, उपकरण खरीदने और बीमा पॉलिसी लेने में आसानी महसूस करेंगे।

इस बदलाव से भारत में GST सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा। आने वाले महीनों में इस बैठक के फैसले की घोषणा भारतीय उपभोक्ताओं और व्यवसायियों दोनों के लिए नई उम्मीद लेकर आएगी।

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