Ganesh Chaturthi 2025: हर साल की तरह इस बार भी गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। 10 दिनों तक चलने वाला यह महापर्व महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, उत्तर भारत समेत विदेशों में बसे भारतीयों के बीच भी बेहद लोकप्रिय है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। मान्यता है कि गणेश जी की उपासना करने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
गणेश चतुर्थी 2025 की तिथि और मुहूर्त | Ganesh Chaturthi 2025 Date and Time
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेश महोत्सव की शुरुआत होती है और चतुर्दशी तिथि को गणेश विसर्जन के साथ इसका समापन होता है। पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 25 अगस्त दोपहर 12:34 बजे से शुरू होकर 26 अगस्त दोपहर 01:54 बजे तक रहेगी। इसी कारण 26 अगस्त को हरतालिका तीज मनाई जाएगी।
वहीं चतुर्थी तिथि का उदयकाल 27 अगस्त 2025 को सूर्योदय के समय होगा। इसी कारण गणेश महोत्सव की शुरुआत 27 अगस्त 2025, बुधवार से होगी। यह पर्व 6 सितंबर 2025 तक चलेगा, जब गणेश विसर्जन यानी अनंत चतुर्दशी का आयोजन होगा।
2025 में गणेश उत्सव का कैलेंडर
- 25 अगस्त 2025: तृतीया तिथि आरंभ (12:34 PM)
- 26 अगस्त 2025: तृतीया तिथि समाप्त (01:54 PM), हरतालिका तीज व्रत, चौरचन पर्व
- 27 अगस्त 2025: गणेश चतुर्थी और गणेश प्रतिमा स्थापना
- 06 सितंबर 2025: अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन
गणेश चतुर्थी पर बनने वाले शुभ योग

इस बार गणेश चतुर्थी पर कई विशेष और दुर्लभ योग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार शुभ योग, शुक्ल योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और भद्रावास योग का निर्माण हो रहा है। इन योगों में भगवान गणेश की पूजा करने से साधक को विशेष फल की प्राप्ति होगी और सभी कार्य सफल होंगे।
साथ ही इस बार चंद्रमा की पूजा का पर्व चौरचन भी 26 अगस्त को बिहार और मिथिला क्षेत्र में मनाया जाएगा। इस दिन संध्या के समय चंद्र देव की उपासना की जाती है।
गणेश चतुर्थी 2025 पंचांग
- सूर्योदय: सुबह 06:28 बजे
- सूर्यास्त: शाम 06:14 बजे
- चंद्रोदय: सुबह 08:52 बजे
- चंद्रास्त: शाम 08:28 बजे
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 03:58 से 04:43 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 01:58 से 02:49 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:14 से 06:36 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:28 से 12:13 बजे तक
इन मुहूर्तों में से किसी में भी गणपति स्थापना और पूजा करना शुभ माना जाएगा।
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का संबंध
गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले हरतालिका तीज का पर्व आता है। यह व्रत विशेषकर महिलाओं द्वारा किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। 2025 में हरतालिका तीज 26 अगस्त को मनाई जाएगी और इसके अगले दिन से गणेश उत्सव की शुरुआत होगी।
महाराष्ट्र में गणेश उत्सव का महत्व
अगर गणेश चतुर्थी की बात हो और महाराष्ट्र का नाम न लिया जाए, तो पर्व अधूरा रह जाएगा। छत्रपति शिवाजी महाराज के समय से ही गणेश उत्सव का विशेष महत्व रहा है। बाद में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन का रूप दिया। तभी से गणेश उत्सव महाराष्ट्र की पहचान बन चुका है।
मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक और कोल्हापुर जैसे शहरों में गणेश पंडालों की भव्यता देखने लायक होती है। यहां लालबागचा राजा, सिद्धिविनायक, गणपति पांडालों की प्रसिद्धि पूरे देश और विदेश तक है।
गणेश चतुर्थी पूजन विधि

गणेश चतुर्थी के दिन घर में गणेश जी की प्रतिमा को पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापित करना शुभ माना जाता है। पूजन विधि इस प्रकार है:
सबसे पहले घर को साफ-सुथरा कर प्रतिमा स्थापित करने के स्थान को गंगाजल से पवित्र करें। लकड़ी के पाटे पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर गणेश जी की प्रतिमा रखें। इसके बाद प्रतिमा के सामने दीपक और धूप जलाएं।
गणेश जी को सिंदूर, दूर्वा, मोदक, फल और पुष्प अर्पित करें। धूप-दीप और नैवेद्य के साथ गणपति आरती करें।
पूजन मंत्र: “ॐ गं गणपतये नमः” का जप करते हुए भगवान को प्रणाम करें।
पूजन के बाद परिवार के सभी सदस्य भगवान से सुख-समृद्धि और विघ्न-नाश की प्रार्थना करें। प्रतिदिन सुबह और शाम आरती करना आवश्यक है।
गणेश पूजा का महत्व और लाभ
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा करना आवश्यक माना जाता है। मान्यता है कि गणेश जी की आराधना करने से ज्ञान, बुद्धि, विवेक, धन, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। साथ ही जीवन के सभी प्रकार के संकट और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
गणेश चतुर्थी के दिन भक्त अपने घरों और मंदिरों में गणेश प्रतिमा की स्थापना कर 10 दिनों तक उनका पूजन करते हैं। प्रतिमा को फूलों, लाइटों और भजन-कीर्तन से सजाया जाता है।
गणेश चतुर्थी पर क्या न करें
गणेश चतुर्थी के दिन कुछ नियम और परंपराओं का पालन करना आवश्यक है। मान्यता है कि इन वर्जनाओं का पालन करने से पूजा सफल होती है और भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं।
- गणेश चतुर्थी के दिन कांटे वाली सब्जियों जैसे बैंगन और भिंडी का सेवन न करें।
- इस दिन चंद्र दर्शन से बचना चाहिए, क्योंकि चंद्रमा को देखना कलंक और विवाद का कारण माना जाता है।
- पूजा के दौरान और प्रतिमा स्थापना के बाद घर में झगड़ा या नकारात्मक माहौल नहीं होना चाहिए।
- मांस, मदिरा और नशे का सेवन इस दिन पूर्ण रूप से वर्जित है।
- प्रतिमा स्थापना के बाद गणेश जी को अकेला न छोड़ें, सुबह-शाम दीपक और धूप जलाकर पूजा करते रहें।
विसर्जन का महत्व
गणेश उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन के साथ होता है। मान्यता है कि विसर्जन का अर्थ है — भगवान को धरती से उनके धाम तक विदा करना। भक्त भाव-विभोर होकर नारे लगाते हैं — “गणपति बप्पा मोरया, पुढ़च्यावर्षी लवकर या”।
#WATCH | Mumbai, Maharashtra | First look of Lalbaugcha Raja unveiled ahead of Ganesh Chaturthi pic.twitter.com/JjjuW03eXR
— ANI (@ANI) August 24, 2025
गणेश चतुर्थी का पर्व केवल धार्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव भी है। यह पर्व हमें एकता, भक्ति और उत्साह का संदेश देता है। 2025 में गणेश चतुर्थी 27 अगस्त से 06 सितंबर तक पूरे भारत और दुनिया भर में भारतीय समुदाय द्वारा उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। इस दौरान घर-घर और पंडालों में गूंजेगा — “गणपति बप्पा मोरया”।
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