Gallantry Awards 2025: ऑपरेशन सिंदूर की गूंज– वीर चक्र, युद्ध सेवा और सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदकों से सजे भारत के जांबाज

Gallantry Awards 2025: भारत अपने 79वें स्वतंत्रता दिवस की दहलीज पर है, और इस वर्ष का जश्न सिर्फ तिरंगे की शान और देशभक्ति के गीतों से ही नहीं, बल्कि उन असली नायकों के सम्मान से भी जुड़ा है, जिन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” में अद्वितीय साहस और वीरता का प्रदर्शन किया। यह ऑपरेशन सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के संकल्प और शक्ति का प्रतीक बन गया है।

इस अवसर पर भारतीय वायुसेना और थलसेना के कई जांबाजों को वीरता और विशिष्ट सेवा पुरस्कारों से नवाजा गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में देश के इन वीरों की आंखों में गर्व और भीड़ में मौजूद हर भारतीय के दिल में सम्मान की लहर थी।

ऑपरेशन सिंदूर: आतंक के ठिकानों पर सटीक प्रहार

2025 की शुरुआत में पाकिस्तान के मुरीदके और बहावलपुर में स्थित आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायुसेना ने ऐसा प्रहार किया जिसने दुश्मन की कमर तोड़ दी। ये ठिकाने लंबे समय से भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों के केंद्र थे। इस कार्रवाई में न केवल आतंकवादियों के मुख्यालय ध्वस्त हुए, बल्कि पाकिस्तान की सैन्य संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा।

भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने सीमा पार से मिले खुफिया इनपुट के आधार पर सटीक निशाना साधा। इस मिशन में हमारे पायलटों ने उच्च तकनीक, साहस और रणनीतिक सूझबूझ का प्रदर्शन किया। कार्रवाई के दौरान भारतीय वायुसेना ने कम से कम छह पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को मार गिराया, जो इस ऑपरेशन की सफलता और हमारी हवाई क्षमता का प्रमाण है।

वीर चक्र से सम्मानित योद्धा | Gallantry Awards 2025

ऑपरेशन सिंदूर में असाधारण शौर्य दिखाने वाले 9 भारतीय वायुसेना अधिकारियों को “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया। वीर चक्र भारत का तीसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है। ये वो योद्धा हैं जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन के दिल में खौफ पैदा कर दिया।

इनमें रंजीत सिंह सिद्धू, मनिष अरोड़ा (SC), अनिमेश पटनी, कुणाल कालरा, जॉय चंद्र, सार्थक कुमार, सिद्धांत सिंह, रिजवान मलिक और अर्शवीर सिंह ठाकुर शामिल हैं। इन पायलटों ने मुरीदके और बहावलपुर पर किए गए हवाई हमलों को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई।

युद्ध सेवा मेडल: रणनीतिक सफलता के नायक

13 भारतीय वायुसेना अधिकारियों को “युद्ध सेवा मेडल” से सम्मानित किया गया। इनमें वरिष्ठ अधिकारी एयर वाइस मार्शल जोसेफ सुआरेस, एयर वाइस मार्शल प्रज्वल सिंह और एयर कमोडोर अशोक राज ठाकुर के नाम प्रमुख हैं।

इन अधिकारियों ने न केवल हवाई हमलों की योजना बनाई, बल्कि ऑपरेशन को जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक अंजाम दिलाने के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन भी प्रदान किया। इनके नेतृत्व में पूरी टीम ने समन्वय और अनुशासन की मिसाल पेश की।

सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल: नेतृत्व की अद्वितीय मिसाल

Gallantry Awards 2025

चार भारतीय वायुसेना अधिकारियों को “सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल” से सम्मानित किया गया। इनमें वायुसेना उप-प्रमुख एयर मार्शल नरनदेश्वर तिवारी, पश्चिमी वायु कमान के कमांडर एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा और वायु अभियान के महानिदेशक एयर मार्शल अवधेश भारती शामिल हैं।

इन वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे अभियान के दौरान नेतृत्व, दूरदर्शिता और साहस का परिचय दिया। उनके मार्गदर्शन में ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल अपने उद्देश्यों को पूरा किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सशक्त छवि को और मजबूत किया।

भारतीय थलसेना का गौरव

ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ वायुसेना तक सीमित नहीं रहा। भारतीय थलसेना ने भी इस मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कई मोर्चों पर दुश्मन को मात दी। इसके लिए थलसेना के जांबाजों को भी कई सम्मान प्रदान किए गए।

  • सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक: 2 अधिकारी

  • कीर्ति चक्र: 4 अधिकारी

  • उत्तम युद्ध सेवा पदक: 3 अधिकारी

  • वीर चक्र: 4 अधिकारी

  • शौर्य चक्र: 8 अधिकारी

  • युद्ध सेवा पदक: 9 अधिकारी

  • सेना पदक में बार: 2 अधिकारी

  • सेना पदक: 58 अधिकारी

  • मेंशन इन डिस्पैच: 115 अधिकारी

ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में थलसेना के योगदान को पूरे सम्मान के साथ याद किया जाएगा।

राष्ट्रपति का संदेश और सम्मान समारोह की गरिमा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मान समारोह में कहा,
“ऑपरेशन सिंदूर भारत की सामरिक क्षमता, साहस और एकजुटता का अद्वितीय उदाहरण है। हमारे जवानों ने यह साबित कर दिया कि भारत न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा कर सकता है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई भी कर सकता है।”

सम्मान समारोह में जब इन वीरों के नाम पुकारे गए, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। हर मेडल के पीछे एक कहानी थी—साहस, बलिदान और कर्तव्य के प्रति समर्पण की कहानी।

ऑपरेशन सिंदूर का ऐतिहासिक महत्व

ऑपरेशन सिंदूर को भारत के रक्षा इतिहास में एक ऐसे मोड़ के रूप में याद किया जाएगा, जब देश ने आतंकवाद के खिलाफ अपने इरादे को न केवल शब्दों में, बल्कि निर्णायक कार्रवाई में भी बदलकर दिखाया। यह ऑपरेशन भारत की “आत्मनिर्भर भारत” नीति के लिए भी एक मील का पत्थर है, क्योंकि इसमें इस्तेमाल किए गए कई हथियार और तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी थे।

जनता की भावनाएं और सैनिकों का गर्व

देशभर में लोग इन वीरों के सम्मान पर गर्व महसूस कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर #OperationSindoor और #VeerChakra जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों में इन वीरों की कहानियां सुनाई जा रही हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि उनकी आज़ादी किन बलिदानों से सुरक्षित है।

वीरता की अमर विरासत

ऑपरेशन सिंदूर के ये सम्मान केवल मेडल या रिबन नहीं हैं, बल्कि उन पलों का प्रतीक हैं जब भारत के सैनिकों ने अपने साहस और रणनीति से दुनिया को दिखा दिया कि भारत किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है।

यह सम्मान हर भारतीय को यह याद दिलाता है कि आज़ादी की रक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। आने वाले वर्षों में ऑपरेशन सिंदूर का नाम उन गौरवशाली पन्नों में दर्ज रहेगा, जिन्हें पढ़कर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा होगा।

ऐसे और भी National लेखों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें! Khabari bandhu पर पढ़ें देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरें — बिज़नेस, एजुकेशन, मनोरंजन, धर्म, क्रिकेट, राशिफल और भी बहुत कुछ।

President Address to Nation: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ऐतिहासिक संबोधन

अखंड भारत संकल्प दिवस: नितिन गडकरी बोले– एक दिन फिर होंगे हम एक | Akhand Bharat Sankalp Diwas

Stray Dogs Supreme Court Order: दिल्ली NCR में आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी कार्रवाई– 8 हफ्तों में 5,000 शेल्टर बनाना अनिवार्य

Leave a Comment