Flag Hoisting in Ayodhya: अयोध्या- धर्म, संस्कृति, अध्यात्म और भारतीय पहचान का ऐसा संगम जो सदियों से भारतीय समाज का केंद्र रहा है। रामायणकाल से लेकर आधुनिक भारत तक, यह नगरी केवल एक स्थान नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र रही है। हाल के वर्षों में राम मंदिर निर्माण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय चेतना के नए आयामों के साथ अयोध्या की महिमा और भी बढ़ी है। इसी क्रम में अयोध्या में आयोजित ध्वजारोहण समारोह विशेष चर्चा में रहता है, खासकर जब इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक और शीर्ष नेतृत्व, जैसे कि संगठन प्रमुख मोहन भागवत, शामिल होते हैं।

अयोध्या में ध्वजारोहण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक वैचारिक और सांस्कृतिक संदेश होता है- “राष्ट्र सर्वोपरि”।
यह ब्लॉग अयोध्या, ध्वजारोहण, RSS और मोहन भागवत के विचारों को विस्तार से समझने का प्रयास करता है।
अयोध्या: राम की नगरी का नया रूप
अयोध्या को सदियों से सांस्कृतिक राजधानी की तरह सम्मान दिया जाता रहा है। प्राचीन ग्रंथों, पुराणों और लोककथाओं में अयोध्या को देवभूमि के रूप में वर्णित किया गया है।
आधुनिक समय में राम मंदिर निर्माण के साथ अयोध्या एक बार फिर विश्व के सामने अपनी पहचान के साथ उभरी है।
नए घाट, भव्य राम पथ, दीपोत्सव जैसे कार्यक्रम, और लगातार चल रहे आध्यात्मिक आयोजन अयोध्या को वैश्विक आकर्षण का केंद्र बना रहे हैं।
अयोध्या में “लाइव” कार्यक्रम, विशेष प्रसारण, धार्मिक अनुष्ठान और राम मंदिर से जुड़ी गतिविधियाँ लगातार प्रसारित होती रहती हैं, जिन्हें देश–दुनिया में लाखों लोग देखते हैं।
☀️ Ayodhya sees a second pran pratishtha like moment today
Grand ‘dhwajarohan’ flag hoisting ceremony is underway at the Ram Janmabhoomi Temple with nearly 7000 guests in attendance
PM Modi hoists a massive saffron flag atop the 191-ft shikhar. The 10-ft by 22-ft flag carries… pic.twitter.com/Ydut5pQpnN
— Nabila Jamal (@nabilajamal_) November 25, 2025
ध्वजारोहण का महत्व: राष्ट्र और धर्म का संगम
भारत में ध्वजारोहण स्वतंत्रता, साहस, त्याग और आत्मगौरव का प्रतीक है। मंदिरों, संगठनों, गुरुकुलों और सांस्कृतिक केंद्रों में जब राष्ट्रीय ध्वज लहराता है, तो वह यह संदेश देता है कि
“धर्म और राष्ट्र एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं।”
अयोध्या में ध्वजारोहण का महत्व और बढ़ जाता है क्योंकि यह स्थान भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है। यहां राष्ट्रीय ध्वज का फहराया जाना भारतीय मूल्यों, कर्तव्य और एकता की भावना को और मजबूत करता है।
RSS और अयोध्या: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का आधार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पिछले कई दशकों से समाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में सक्रिय रहा है।
अयोध्या आंदोलन में भी संघ का बड़ा योगदान रहा, चाहे वह जनसंपर्क हो, समाज को जागरूक करना हो या सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना हो।
RSS हमेशा से यह मानता रहा है कि
“राष्ट्र केवल भूगोल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना है।”
और अयोध्या इसी सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है।
स्वयंसेवकों के शिविर, सेवा कार्य, स्वच्छता अभियान, संस्कृत शिक्षा, और धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता से RSS लगातार अयोध्या के सामाजिक ढांचे को मजबूत कर रहा है।
मोहन भागवत के विचार: आत्मविश्वास से भरा भारत
RSS सरसंघचालक मोहन भागवत समय–समय पर अयोध्या से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं।
उनके विचार हमेशा स्पष्ट रहे हैं:
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भारत की शक्ति उसकी संस्कृति में है
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समाज में समरसता आवश्यक है
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मंदिर केवल आस्था का नहीं, अनुशासन का केंद्र होना चाहिए
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राष्ट्र निर्माण में हर नागरिक की भूमिका है
ध्वजारोहण जैसे कार्यक्रमों में भागवत का शामिल होना यह संदेश देता है कि
“राष्ट्रवाद केवल भाषणों का विषय नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है।”
उनके भाषणों में अक्सर यह बात प्रमुख रहती है कि भारत को आत्मनिर्भर, जागृत और संगठित बनाना समय की आवश्यकता है।
Flag hoisting is taking place on Tuesday, November 25, 2025, at the Shri Ram Mandir built in Ayodhya, the city of Shri Ram, the seventh avatar of Shri Hari, the protector of the entire creation…..
This is the reawakening of New India’s conscious spirit, cultural heritage, and… pic.twitter.com/n5Cs9eb3tJ— Maria (@mariaagold) November 25, 2025
अयोध्या लाइव कार्यक्रमों का प्रभाव:
अयोध्या के लाइव प्रसारण—चाहे वह रामलला की आरती हो, मंदिर निर्माण की प्रगति हो, दीपोत्सव हो या ध्वजारोहण—देश में एक नई ऊर्जा पैदा करते हैं।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से करोड़ों लोग आध्यात्मिक रूप से अयोध्या से जुड़ते हैं।
सोशल मीडिया और टीवी पर लाइव कार्यक्रमों की वजह से अयोध्या अब केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र भी बन गई है।
ध्वजारोहण का लाइव प्रदर्शन लोगों में देशभक्ति और सांस्कृतिक गर्व की भावना को मजबूत करता है।
ध्वजारोहण समारोह का संदेश:
अयोध्या में होने वाला ध्वजारोहण कई संदेश देता है:
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राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिकता का मिलन
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सांस्कृतिक विरासत का सम्मान
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एकता और अखंडता का संकल्प
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समाज के हर वर्ग की भागीदारी
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नए भारत की पहचान—संगठित, जागरूक और गर्वित
RSS के स्वयंसेवक जब अनुशासनबद्ध ढंग से कार्यक्रम में भाग लेते हैं, तो यह दिखाता है कि संगठन राष्ट्र और संस्कृति को साथ लेकर चलने में विश्वास करता है।
अयोध्या का भविष्य: विश्व–स्तरीय आध्यात्मिक केंद्र
राम मंदिर के पूर्ण रूप से खुलने के बाद अयोध्या भारत का सबसे बड़ा आस्था–स्थल बन चुकी है।
ध्वजारोहण जैसे समारोह आने वाले समय में यहां के सांस्कृतिक कैलेंडर का स्थायी हिस्सा बनने वाले हैं।
यहां होने वाले कार्यक्रम-
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पर्यटन बढ़ाएंगे
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अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे
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स्थानीय युवाओं को रोजगार देंगे
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और दुनिया को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश देंगे
RSS और अन्य संगठनों की सहभागिता अयोध्या को आत्मनिर्भर और संगठित समाज के मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।
अयोध्या में ध्वजारोहण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक गौरव का उत्सव है।
मोहन भागवत जैसे राष्ट्रीय विचारकों की उपस्थिति से इसका महत्व और बढ़ जाता है।
RSS की भूमिका, अयोध्या की बदलती पहचान और राष्ट्र की चेतना का यह संगम नए भारत की ओर संकेत करता है-
एक ऐसा भारत जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा है और आधुनिक विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
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