Faridabad RDX News: डॉक्टरों के फ्लैट से बरामद 360 किलो विस्फोटक ने हिलाया दिल्ली-NCR

Faridabad RDX News: दिल्ली-NCR की हवा में वैसे ही सर्दियों में धुंध और जहरीले कण घुल जाते हैं, लेकिन इस बार एक अलग तरह का “धमाका” चर्चा में है। हरियाणा के फरीदाबाद में हुई एक बड़ी पुलिस कार्रवाई ने पूरे देश को हिला दिया। जम्मू-कश्मीर पुलिस और हरियाणा पुलिस की संयुक्त टीम ने यहां से 360 किलो विस्फोटक, AK-47 राइफल, लाइव कारतूस, वायर, टाइमर और कई खतरनाक उपकरण बरामद किए।

Faridabad RDX News

शुरुआत में इसे RDX बताया गया, हालांकि बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह अमोनियम नाइट्रेट था – एक ऐसा रसायन जो बम बनाने में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं कि ये सामान मिला, असली चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब डॉक्टरों के फ्लैट से मिला!

कहां और कैसे खुला यह पूरा राज़: Faridabad RDX News

जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक स्पेशल टीम को जानकारी मिली कि आतंक से जुड़ा एक नेटवर्क दिल्ली-NCR में सक्रिय है। इस नेटवर्क में कुछ शिक्षित लोग, खासकर डॉक्टर, शामिल हैं।

पुलिस ने छानबीन शुरू की और गिरफ्तारी की कड़ी जुड़ती गई – सबसे पहले डॉ. आदिल अहमद राथर नाम के एक डॉक्टर को हिरासत में लिया गया। उसके घर से AK-47 राइफल और हथियारों का जखीरा मिला।

जब उससे पूछताछ हुई तो उसने बताया कि उसके साथी डॉ. मुझम्मिल शकील ने फरीदाबाद में एक फ्लैट किराए पर लिया हुआ है, जिसमें कुछ “सामग्री” रखी गई है।

इसके बाद जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस की संयुक्त टीम ने फरीदाबाद के धौज इलाके में छापा मारा। जब पुलिस ने फ्लैट का दरवाजा तोड़ा, तो अंदर जो नज़ारा था, उसने सभी के होश उड़ा दिए।

फ्लैट से मिला ‘मौत का सामान’:

फ्लैट से बरामद हुआ:

  • लगभग 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट

  • 1 AK-47 राइफल

  • पिस्तौलें और भारी मात्रा में कारतूस

  • वायरिंग, टाइमर और रिमोट डिवाइस

  • वॉकी-टॉकी सेट और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट

पुलिस ने बताया कि इस सामग्री का इस्तेमाल कई बड़े धमाकों में किया जा सकता था। टाइमर और वायरिंग देखकर यह साफ है कि आतंकी किसी “बड़े मिशन” की तैयारी में थे।

किसकी थी ये जगह और कौन था इसके पीछे:

जांच में पता चला कि यह फ्लैट डॉ. मुझम्मिल शकील के नाम पर किराए पर लिया गया था। पड़ोसियों को बताया गया था कि वह दिल्ली के किसी अस्पताल में डॉक्टर हैं।
उनका रहन-सहन बिल्कुल आम इंसान जैसा था – किसी को शक तक नहीं हुआ कि यह फ्लैट विस्फोटक सामग्री का गोदाम बन चुका है।

जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी डॉक्टरों के जम्मू-कश्मीर के पुलवामा और अनंतनाग जिलों से कनेक्शन हैं। पुलिस को शक है कि इनका संबंध पाकिस्तानी हैंडलर्स से था और यह किसी बड़े आतंकी नेटवर्क का हिस्सा हैं।

RDX नहीं, लेकिन खतरनाक अमोनियम नाइट्रेट:

शुरुआत में मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि 350 से 400 किलो RDX मिला है। लेकिन बाद में फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर सतेंद्र कुमार गुप्ता ने बयान जारी कर बताया कि यह RDX नहीं बल्कि अमोनियम नाइट्रेट है।

हालांकि फर्क नाम का है, खतरा वही है। अमोनियम नाइट्रेट को अगर फ्यूल ऑयल और डेटोनेटर के साथ मिलाया जाए तो यह RDX जितना शक्तिशाली विस्फोटक बन जाता है। इसका इस्तेमाल दुनिया भर में कई बड़े आतंकी हमलों में किया जा चुका है।

दिल्ली-NCR पर मंडरा रहा था बड़ा खतरा:

सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि यह विस्फोटक दिल्ली या किसी बड़े शहर में धमाका करने के लिए लाया गया था।
अगर समय रहते पुलिस कार्रवाई नहीं होती, तो राजधानी में कोई बड़ी त्रासदी घट सकती थी।

जांच में यह भी सामने आया कि इन डॉक्टरों ने कार के जरिए यह विस्फोटक सामग्री जम्मू से फरीदाबाद तक पहुंचाई थी।
उनकी कार से गुप्त खानों (hidden compartments) में छिपाई गई सामग्री मिली – जैसे किसी फिल्मी सीन की तरह।

पुलिस की तगड़ी कार्रवाई:

हरियाणा पुलिस ने तुरंत इलाके को सील किया और बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) को मौके पर बुलाया।
NSG (National Security Guard) की टीम भी जांच में शामिल हुई।
पुलिस ने आसपास के इलाकों की सीसीटीवी फुटेज खंगाली और पड़ोसियों से पूछताछ की।

अब यह केस NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) के हवाले किए जाने की संभावना है ताकि पूरा नेटवर्क उजागर किया जा सके।

पुलिस ने क्या कहा:

फरीदाबाद पुलिस के मुताबिक –

“मीडिया में यह खबर RDX बताकर फैलाई गई थी, लेकिन फोरेंसिक जांच में साफ हुआ कि यह अमोनियम नाइट्रेट है। जांच अभी जारी है, और कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।”

वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि यह एक संगठित आतंकी साजिश थी जिसमें कई प्रोफेशनल्स का इस्तेमाल ‘स्लीपर सेल’ के तौर पर किया जा रहा था।

जनता के लिए सबक:

यह मामला सिर्फ पुलिस की सफलता नहीं, बल्कि आम जनता के लिए चेतावनी भी है।
आज के समय में आतंक के नेटवर्क इतने गहराई तक फैल चुके हैं कि वे डॉक्टर, इंजीनियर या आम दिखने वाले लोगों की आड़ में छिप सकते हैं।

इसलिए ज़रूरी है कि अगर किसी मकान में संदिग्ध गतिविधि दिखे, कोई व्यक्ति अजीब समय पर आता-जाता हो, या कोई कार लंबे समय तक बंद खड़ी हो – तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
एक छोटी सी सतर्कता किसी बड़ी त्रासदी को रोक सकती है।

अब आगे क्या?

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर यह 360 किलो विस्फोटक कहां से आया, किसके कहने पर लाया गया, और किस जगह इस्तेमाल होना था
सूत्रों के अनुसार, इसके तार कश्मीर से लेकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक फैले नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।

कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मोबाइल डिवाइस जब्त किए गए हैं जिनसे डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

फरीदाबाद की यह घटना सिर्फ एक शहर की खबर नहीं है – यह हमें याद दिलाती है कि आतंक अब किसी एक क्षेत्र या वर्ग तक सीमित नहीं रहा।
जब डॉक्टर जैसे पेशेवर भी इस जाल में फंस सकते हैं, तो समझिए कि यह लड़ाई कितनी गहरी और पेचीदा है।

दिल्ली-NCR जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में अगर 360 किलो विस्फोटक सक्रिय हो जाता, तो इसका असर विनाशकारी होता।
लेकिन पुलिस और एजेंसियों की समय पर कार्रवाई ने न सिर्फ सैकड़ों जानें बचाईं, बल्कि पूरे देश को हिला देने वाली साज़िश को नाकाम कर दिया।

अब ज़रूरत है सतर्कता की – सरकार, पुलिस और जनता – तीनों को मिलकर इस जाल को तोड़ना होगा।
क्योंकि आतंक का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन उसका मकसद हमेशा एक ही होता है – देश को तोड़ना।
और हम सबका मकसद होना चाहिए – देश को जोड़ना।

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