Fake Supplements in India: रिपोर्ट, खतरे और जरूरी सावधानियाँ

Fake Supplements in India: आज स्वास्थ्य और फिटनेस की बढ़ती मांग के साथ सप्लीमेंट्स (खानपान के पूरक पदार्थ) का कमर्शियल बाजार भारत में तेजी से बढ़ा है। प्रोटीन पाउडर, विटामिन‑मिनरल टैबलेट, ओमेगा‑3, क्रिएटाइन, ब्लाइंडर और अन्य सप्लीमेंट्स अब नियमित तौर पर जिम‑जॉइनर्स, युवा‑व्यायाम प्रेमियों और सामान्य उपभोक्ताओं द्वारा सेवन किए जाते हैं। लेकिन इसी बढ़ती लोकप्रियता ने एक बड़ी समस्या को भी जन्म दिया है – नकली (फेक) सप्लीमेंट्स का प्रचलन

एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 60–70% डाइटरी सप्लीमेंट्स भारतीय बाजार में नकली, काउंटरफिट, बिना लाइसेंस वाले या अप्रूव्ड नहीं होते हैं, और इन्हें पहचानना भी बेहद मुश्किल है।

Fake Supplements in India

नकली सप्लीमेंट्स की बढ़ती समस्या:

भारत में सप्लीमेंट्स का बाजार अरबों डॉलर का है और तेजी से बढ़ रहा है। इसी क्षेत्र में नकली उत्पादों की रोक‑टोक की कमी का फायदा उठाकर कई अवैध आपूर्तिकर्ता सस्ते घटिया सामान बनाकर बेच देते हैं।

कुछ हाल के मामलों ने इस समस्या को और स्पष्ट कर दिया है:

  • उत्तर प्रदेश में पुलिस और विशेष बलों ने **मुजफ्फरनगर में करीब ₹2 करोड़ के नकली हेल्थ सप्लीमेंट्स का रैकेट पकड़ा है, जिसमें प्रोटीन, ओमेगा‑3 कैप्सूल और अन्य सामग्री शामिल थी।

  • बुलंदशहर में भी फेक प्रोटीन, ओमेगा‑3 और विटामिन सप्लीमेंट्स के बड़े स्टॉक के साथ रैकेट पकड़ा गया था।

  • मेरठ में एक सप्लीमेंट सप्लाई चेन को भी STF ने बंद किया, जहां भारी मात्रा में फर्जी विदेशी‑लेबल के सप्लीमेंट्स पकड़े गए।

  • पश्चिमी यूपी के एक घर से भी नकली प्रोटीन‑आधारित सप्लीमेंट्स और स्टैमिना बूस्टर कैप्सूल बरामद हुए।

इन उदाहरणों से साफ है कि नकली सप्लीमेंट सिर्फ बहस का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं।

नकली सप्लीमेंट्स का स्वास्थ्य पर बड़ा असर:

नकली सप्लीमेंट्स असल में न सिर्फ पैसा बर्बाद करते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकते हैं। इनका असली जोखिम मुख्यतः निम्न रूपों में दिखता है:

गलत या भ्रामक लेबलिंग:

कई नकली उत्पादों में गलत जानकारी दी होती है – जैसे पोषण मान, मात्रा या घोषित सामग्री के नाम। इससे उपभोक्ता गलत लाभ की उम्मीद में उन्हें लेते हैं, लेकिन असल में वे इन पोषक तत्वों को नहीं पाते।

हानिकारक पदार्थ मिलना:

कुछ नकली सप्लीमेंट्स में भारी धातु (जैसे लेड, मरकरी), अवांछित रसायन, स्टेरॉयड और अन्य हानिकारक पदार्थ मिल सकते हैं, जो किडनी, लिवर और इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुँचा सकते हैं

एलर्जी और असहजता:

अगर किसी सप्लीमेंट में फेक या अनजानी सामग्री है और वह एलर्जी‑प्रेरक है, तो यह त्वचा पर रैश, सूजन, तकलीफ या साँस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएँ पैदा कर सकता है।

बिना परिणाम के नुकसान:

नकली उत्पाद में जब सही मात्रा में पोषक तत्व नहीं होते, तो आपकी मेहनत और पैसे दोनों बेकार हो जाते हैं।

बाजार में कैसे पहचानें फेक सप्लीमेंट्स:

सुपरमार्केट, जिम शॉप, ऑनलाइन मार्केटप्लेस जैसे Amazon, Flipkart और ब्रांड‑अज्ञात वेबसाइटें सप्लीमेंट्स बेचते हैं, लेकिन कई बार इसी वजह से नकली उत्पादों की संभावना भी बढ़ जाती है।

इन संकेतों पर ध्यान दें:

✔️ FSSAI सर्टिफिकेशन
Product पर FSSAI के 14‑डिजिट लाइसेंस नंबर और लोगो जरूर देखें। अगर यह नहीं है तो वह उत्पाद संदिग्ध हो सकता है।

✔️ लेबल और सामग्री की जाँच
लेबल पर सामग्री, मात्रा और पोषण मान स्पष्ट रूप में दिए होने चाहिए। अस्पष्ट सूची या अन्यायसंगत दावे (जैसे 100 ग्राम प्रोटीन मात्र 20 ग्राम पाउडर में) एक चेतावनी संकेत हैं।

✔️ प्रमाणीकरण और थर्ड‑पार्टी टेस्टिंग
ISO, GMP, या अन्य विश्वसनीय प्रमाणपत्र दिखाने वाले उत्पादों का चयन करें।

✔️ भरोसेमंद स्रोत से खरीदें
आधिकारिक ब्रांड वेबसाइट, अधिकृत खुदरा विक्रेता, या विश्वसनीय पोर्टल से ही खरीददारी करें।

✔️ उचित कीमत और पैकेजिंग देखें
अगर कीमत बहुत कम है या पैकेजिंग घटिया दिखती है तो सावधान रहें।

✔️ QR/स्क्रैच कोड का सत्यापन
बहुत सारे असली उत्पाद प्रमाणीकरण QR कोड या स्क्रैच कोड के साथ आते हैं, जिन्हें आप कंपनी की वेबसाइट पर स्कैन कर सत्यापित कर सकते हैं।

विशेषज्ञ और सरकारी कदम:

FSSAI ने कई सप्लीमेंट्स पर कड़े नियम लागू किए हैं, ताकि गलत दावे, भ्रामक जानकारी और हानिकारक सामग्री वाले उत्पादों को बाजार से हटाया जा सके।

राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी सहित कुछ संस्थान अब सप्लीमेंट परीक्षण केंद्र चला रहे हैं, जहां उत्पादों को सुरक्षा और मानकों के खिलाफ परीक्षण किया जाता है – और कई सेमपल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे नहीं उतरे।

सुरक्षित रहने के लिए सुझाव:

विज्ञान‑आधारित ब्रांड चुनें – सिर्फ आकर्षक विज्ञापन पर भरोसा न करें।
ऑनलाइन ऑर्डर में विक्रेता की जाँच करें – सिर्फ विश्वसनीय और अधिकृत विक्रेता चुनें।
रिव्यू और प्रमाण देखें – उपभोक्ता समीक्षा पर नजर रखें और असामान्य समीक्षा से सावधान रहें।
शक होने पर टेस्ट कराएँ – यदि शक है, तो किसी प्रमाणित प्रयोगशाला में जांच कराएँ।
FSSAI और अन्य प्रमाण देखें – लेबल पर इनकी उपस्थिति जरूरी है।

भारतीय सप्लीमेंट बाजार भविष्य में और अधिक बड़े स्तर पर विकसित होगा, लेकिन जितनी तेजी से यह आगे बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से नकली और हानिकारक सप्लीमेंट्स का प्रसार भी बढ़ा है। उपभोक्ताओं को सतर्क रहने, प्रमाणित स्रोत से सामान खरीदने और हर उत्पाद को बारीकी से जांचने की आवश्यकता है। फर्जी सप्लीमेंट का सेवन सिर्फ आपका पैसा नहीं गायब करता, बल्कि स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचा सकता है

सही जानकारी, सावधानी और भरोसेमंद उत्पाद चुनकर ही आप स्वस्थ और सुरक्षित सप्लीमेंट उपयोग का अनुभव कर सकते हैं।

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