Earthquake Today: अफ़ग़ानिस्तान में भूकंप का कहर: 622 से अधिक मौतें, 1500 से ज्यादा घायल, दिल्ली तक हिली धरती

Earthquake Today: 31 अगस्त और 1 सितंबर की आधी रात अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के लिए एक काला सपना बनकर आई। रात 12:47 बजे धरती इतनी जोर से हिली कि लोग नींद से चीखते हुए बाहर निकल आए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.0 दर्ज की गई। यह झटके केवल अफ़ग़ानिस्तान तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि पाकिस्तान और भारत के दिल्ली-एनसीआर तक महसूस किए गए।

इस त्रासदी ने अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में तबाही मचा दी। देखते ही देखते कई घर मलबे में बदल गए। हजारों लोग बेघर हो गए और चारों ओर सिर्फ़ चीख-पुकार सुनाई देने लगी।

मौत और घायल होने वालों की संख्या | Earthquake Today

Earthquake Today Earthquake Today

शुरुआत में केवल कुछ मौतों की खबरें आईं। लेकिन जैसे-जैसे सुबह हुई और राहत दल गाँव-गाँव पहुँचे, हालात की असली तस्वीर सामने आई।

  • 622 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
  • 1500 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।
  • दर्जनों गाँव पूरी तरह मलबे में बदल गए हैं।
  • अस्पतालों में घायलों का तांता लग गया है।

स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता नकीबुल्लाह रहीमी ने बताया कि घायल लोगों का लगातार इलाज किया जा रहा है और कई गंभीर हालत में हैं।

कहाँ था भूकंप का केंद्र?

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक भूकंप का केंद्र जलालाबाद से 27 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। इसकी गहराई जमीन से केवल 8 किलोमीटर थी।

इतनी कम गहराई में आने वाला भूकंप बेहद विनाशकारी होता है क्योंकि उसकी ऊर्जा सीधे सतह पर महसूस होती है। यही वजह रही कि रात में ही गाँव-गाँव घर ढह गए और लोग मलबे में दब गए।

दिल्ली-एनसीआर तक पहुँचे झटके

दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी धरती हिली। आधी रात को अचानक आए इन झटकों ने लोगों को घर से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। हालांकि, भारत में इन झटकों की तीव्रता कम थी और यहाँ किसी प्रकार की जान-माल की हानि नहीं हुई।

क्यों आते हैं बार-बार भूकंप?

अफ़ग़ानिस्तान का यह इलाका भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यह क्षेत्र हिंदूकुश पर्वतीय क्षेत्र में आता है, जहाँ भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट लगातार टकराती रहती हैं।

इन प्लेटों की हलचल की वजह से यहाँ अक्सर भूकंप आते रहते हैं।

  • 2 अगस्त को इसी क्षेत्र में 5.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था।
  • 6 अगस्त को यहाँ 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था।

इससे साफ है कि ज़मीन के नीचे लगातार दबाव बन रहा है और जब यह दबाव बाहर निकलता है तो विनाशकारी भूकंप पैदा होते हैं।

प्रभावित इलाके

सबसे ज्यादा असर नांगरहार और कुनार प्रांतों में देखने को मिला।

  • नर गुल, सॉकी, वाटपुर, मनोगी और चपादरे जैसे इलाके लगभग पूरी तरह बर्बाद हो गए।
  • जलालाबाद में दर्जनों इमारतें ध्वस्त हो गईं।
  • गाँवों में मिट्टी और पत्थरों से बने घर तो पूरी तरह मिट गए।

लोगों पर असर

भूकंप के बाद का मंजर बेहद दर्दनाक था।

  • कई परिवारों ने अपने पूरे घर-परिवार खो दिए।
  • हजारों लोग खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर हो गए।
  • महिलाएँ और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए क्योंकि रात में सब गहरी नींद में थे।

एक चश्मदीद ने बताया, “हम सो रहे थे तभी अचानक ज़मीन हिलने लगी। घर की दीवारें गिर गईं और हम सब मलबे में दब गए। किसी तरह बाहर निकले लेकिन मेरे कई रिश्तेदार अब इस दुनिया में नहीं हैं।”

राहत और बचाव कार्य

तालिबान सरकार ने तुरंत राहत अभियान शुरू किया।

  • अफ़ग़ान रेड क्रिसेंट सोसाइटी को तैनात किया गया।
  • स्वास्थ्य कर्मियों और एंबुलेंसों को गाँव-गाँव भेजा गया।
  • मलबे से लोगों को निकालने के लिए स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में जुट गए।

हालांकि, राहत कार्यों में सबसे बड़ी मुश्किल यह रही कि भूकंप के बाद भी कई आफ्टरशॉक्स आते रहे। इन झटकों की वजह से लोग और बचाव दल दोनों ही डरे हुए थे।

अंतरराष्ट्रीय चिंता

अफ़ग़ानिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। ऐसे में यह भूकंप और भी घातक साबित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश और संगठन मदद की पेशकश कर रहे हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी बड़ी आपदा से उबरने के लिए अफ़ग़ानिस्तान को वैश्विक सहायता की ज़रूरत होगी, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं।

भारत और पाकिस्तान में स्थिति

  • पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में भी झटके महसूस हुए।
  • कई लोग रात को घरों से बाहर आ गए, लेकिन गंभीर नुकसान की खबर नहीं है।
  • भारत के दिल्ली-एनसीआर में हल्के झटके आए, पर कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।

भूकंप और अफ़ग़ानिस्तान का इतिहास

यह पहला मौका नहीं है जब अफ़ग़ानिस्तान ने इतनी भीषण तबाही झेली हो।

  • 2022 में आए एक बड़े भूकंप में 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
  • 1998 में भी एक बड़ा भूकंप आया था जिसमें 4000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

इससे साफ है कि यह देश भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील है।

भूकंप मापने की प्रक्रिया क्या है?

भूकंप मापने के लिए वैज्ञानिक सीस्मोग्राफ (Seismograph) नामक उपकरण का इस्तेमाल करते हैं। यह यंत्र धरती में होने वाली हलचल और कंपन को रिकॉर्ड करता है।

  • सीस्मोग्राफ एक भारी पेंडुलम और रिकॉर्डिंग सिस्टम से मिलकर बना होता है।
  • जब धरती हिलती है तो पेंडुलम स्थिर रहता है लेकिन कागज़ पर लगी सुई हिलने लगती है।
  • इन लहरों की तीव्रता और अवधि को देखकर वैज्ञानिक भूकंप की ताक़त और केंद्र का अनुमान लगाते हैं।

भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए दो मुख्य पैमाने उपयोग में लाए जाते हैं:

  1. रिक्टर स्केल (Richter Scale):
    यह भूकंप की ऊर्जा या शक्ति को मापता है। स्केल पर हर एक अंक बढ़ने का मतलब है कि भूकंप 10 गुना ज्यादा ताक़तवर है। उदाहरण के लिए, 6.0 तीव्रता का भूकंप 5.0 से दस गुना ज़्यादा ताकतवर होता है।

  2. मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल (Moment Magnitude Scale – Mw):
    आधुनिक दौर में इसे ज्यादा सटीक माना जाता है। यह बताता है कि धरती की चट्टानों में कितनी ऊर्जा रिलीज़ हुई।

इसके अलावा, मॉडिफाइड मर्काली इंटेंसिटी स्केल (MMI) यह मापता है कि लोगों ने भूकंप को किस तरह महसूस किया और कितनी तबाही हुई।

                 अफ़ग़ानिस्तान का यह भूकंप केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक मानवीय त्रासदी है। सैकड़ों परिवार उजड़ गए, हजारों लोग घायल हैं और अनगिनत लोग बेघर हो गए हैं।

दिल्ली-एनसीआर और पाकिस्तान में लोग थोड़े समय के लिए जरूर सहम गए, लेकिन असली चोट अफ़ग़ानिस्तान ने झेली है। आने वाले दिनों में राहत और पुनर्वास कार्य इस देश की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

ऐसे और भी Global लेखों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें! Khabari bandhu पर पढ़ें देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरें — बिज़नेस, एजुकेशन, मनोरंजन, धर्म, क्रिकेट, राशिफल और भी बहुत कुछ।

SCO Summit 2025 LIVE: पीएम मोदी-शी चिनफिंग मुलाकात से खुला नया अध्याय, मानसरोवर यात्रा से सीधी उड़ानों तक बढ़ा विश्वास

SCO Summit में मोदी-शी की मुलाक़ात ने खोली उम्मीदों की खिड़की, LAC पर समझौता और भरोसे का संदेश

PM Modi China Visit: सात साल बाद पीएम मोदी चीन में, रिश्तों की नई शुरुआत और बीजिंग की उम्मीदें

Leave a Comment