Earthquake in Myanmar: म्यांमार में 4.7 तीव्रता का भूकंप, भारत के असम, मणिपुर और नागालैंड में भी हिली धरती

Earthquake in Myanmar: आज सुबह म्यांमार में अचानक धरती कांप उठी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.7 दर्ज की गई। यह झटका सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर आया और इसका केंद्र जमीन से सिर्फ 15 किमी की उथली गहराई पर था।

भूकंप का केंद्र म्यांमार के उस हिस्से में था जो भारत के मणिपुर की सीमा से सटा हुआ है। यही वजह रही कि भारत के कई उत्तर-पूर्वी राज्यों तक इसका असर महसूस हुआ।

भारत में कहां-कहां महसूस हुए झटके | Earthquake in Myanmar

म्यांमार के भूकंप का सबसे ज्यादा असर भारत के असम, मणिपुर और नागालैंड में महसूस किया गया। कई इलाकों में लोगों ने दीवारों और खिड़कियों को हिलते हुए देखा, फर्नीचर डगमगाने लगे।

लोगों में डर जरूर फैला, लेकिन राहत की बात यह है कि अभी तक कहीं से भी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं आई है।

तिब्बत में भी दर्ज हुआ भूकंप

Earthquake in Myanmar

म्यांमार के साथ-साथ आज तिब्बत में भी धरती हिली। वहां आए झटके की तीव्रता 3.3 रिक्टर स्केल पर मापी गई। यह भूकंप लगभग 10 किमी गहराई पर आया और इसका केंद्र अक्षांश 30.19°N और देशांतर 95.23°E पर था।

विशेषज्ञों का कहना है कि उथली गहराई पर आने वाले भूकंपों के बाद आफ्टरशॉक्स यानी अनुगामी झटके आने की संभावना बनी रहती है।

क्यों होते हैं इस इलाके में बार-बार भूकंप?

भारत और म्यांमार का उत्तर-पूर्वी इलाका भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यह क्षेत्र भारतीय प्लेट, यूरेशियन प्लेट और बर्मी प्लेट के संगम पर स्थित है। जब ये टेक्टॉनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं, तो ऊर्जा निकलकर धरती को हिला देती है।

इसी वजह से उत्तर-पूर्व का अधिकांश इलाका भूकंप संभावित जोन-V में आता है, जिसे भारत का सबसे खतरनाक जोन माना जाता है।

हाल के दिनों में बढ़ी भूकंपीय गतिविधि

पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में भूकंपों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

  • हाल ही में म्यांमार में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिससे कई आफ्टरशॉक्स महसूस हुए।
  • महाराष्ट्र के सातारा जिले में 3.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया।
  • उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में भी हल्के झटके महसूस हुए।

ये घटनाएं साबित करती हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप की प्लेटें लगातार सक्रिय हैं और किसी भी समय बड़ा भूकंप आ सकता है।

उथले भूकंप क्यों होते हैं ज़्यादा खतरनाक?

भूकंप की गहराई जितनी कम होती है, उसका असर उतना ही ज़्यादा महसूस होता है। जब भूकंप 10 से 15 किमी गहराई पर आते हैं तो उनकी ऊर्जा सीधे सतह तक पहुंचती है।

इसी वजह से म्यांमार में आया 4.7 तीव्रता का भूकंप भले ही मध्यम श्रेणी का था, लेकिन इसकी वजह से भारत के कई इलाकों में कंपन तेज़ महसूस हुआ।

म्यांमार और भारत का भूकंपीय इतिहास

यह इलाका पहले भी कई बड़े भूकंपों की मार झेल चुका है।

  • 1897 का शिलांग भूकंप (8.1 तीव्रता) — इसमें असम और मेघालय में भारी तबाही हुई थी।

  • 1950 का असम भूकंप (8.6 तीव्रता) — इसे 20वीं सदी के सबसे बड़े भूकंपों में गिना जाता है, इसने ब्रह्मपुत्र नदी का प्रवाह तक बदल दिया था।

  • 2016 का मणिपुर भूकंप (6.7 तीव्रता) — इसमें दर्जनों लोगों की जान गई और कई इमारतें ढह गईं।

इस पृष्ठभूमि में आज का भूकंप लोगों के लिए डर का कारण बना, क्योंकि यहां के लोग पहले ही बड़े भूकंपों का दर्द झेल चुके हैं।

भूकंप से बचाव के उपाय

भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके असर को कम किया जा सकता है। इसके लिए कुछ तैयारी जरूरी है।

  • सभी इमारतों और पुलों का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक से होना चाहिए।
  • लोगों को “ड्रॉप, कवर और होल्ड ऑन” यानी झुकना, सुरक्षित जगह पर छिपना और पकड़ बनाए रखना सिखाया जाना चाहिए।
  • खुले मैदान में रहने की कोशिश करनी चाहिए और बिजली के खंभों या ऊंची इमारतों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
  • सरकार को समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाने चाहिए और अलर्ट सिस्टम को मजबूत करना चाहिए।

सतर्कता ही बचाव है

म्यांमार में आया यह 4.7 तीव्रता का भूकंप भले ही बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा सका, लेकिन इसने एक बार फिर याद दिला दिया कि हमारा इलाका भूकंप संभावित ज़ोन में आता है।

भारत के असम, मणिपुर और नागालैंड में महसूस हुए झटके ने लोगों के मन में डर बैठा दिया है। वहीं तिब्बत में आए 3.3 तीव्रता के भूकंप ने साफ कर दिया कि पूरे एशियाई क्षेत्र में प्लेटों की हलचल तेज़ है।

अब जरूरत है कि सरकार और लोग दोनों मिलकर सतर्क रहें, तैयारी करें और आपदा प्रबंधन पर फोकस बढ़ाएं। क्योंकि भूकंप कभी भी आ सकता है, लेकिन सही तैयारी से नुकसान को कम किया जा सकता है।

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