दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2025: राजनीति, मुद्दे और परिणाम की ओर

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2025: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में छात्र राजनीति फिर से गरमाई है। 18 सितंबर, 2025 को हुए DUSU (Delhi University Students’ Union) चुनावों ने न सिर्फ़ छात्रों को वोट डालने का अवसर दिया बल्कि ये चुनाव इस बात के लिए भी ध्यानी रहे कि अब छात्रों की अपेक्षाएँ, मुद्दे और जनाक्रोश कैसे बदला है। इस लेख में हम चर्चा करेंगे चुनाव की पृष्ठभूमि, मुख्य दलों और उम्मीदवारों की रणनीतियाँ, चुनावी मुद्दे, छात्रों की भागीदारी, और परिणामों की स्थिति।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2025
    दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2025

पृष्ठभूमि:

DUSU चुनाव हर साल होते हैं और चार मुख्य पदों के लिए होते हैं: अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, और संयुक्त सचिव। चुनाव की तैयारियाँ, नामांकन और मतदाता पंजीकरण के बाद ये चुनाव होना तय हुआ था।

इस साल चुनावों में एक नया बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 से प्रेरित नियमों का भी प्रभाव दिखा: तीसरे वर्ष (third year) के छात्र/छात्राएँ अब कुछ प्रमुख पदों के लिए खड़े हो सकते हैं, जिन पदों पर पहले यह अनुमति नहीं थी।

साथ ही, दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया कि जिन छात्रों की उपस्थिति(attendance) 75% से कम है, उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी। इसने छात्रों की शैक्षणिक ज़िम्मेदारी को राजनीति से जोड़ने की कोशिश की।

प्रमुख दल, उम्मीदवार और उनकी रणनीतियाँ:

मुख्य रूप से तीन छात्र संगठन चुनावी मैदान में थे:

  • ABVP (Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad) – प्रत्याशी: Aryan Mann। इनके मुख्य वादे शामिल थे: मेट्रो पास पर सब्सिडी, कॉलेज में फ्री वाई-फाई, खेल सुविधाओं में सुधार।

  • NSUI (National Students’ Union of India) – प्रत्याशी: Joslyn Nandita Choudhary। उन्होंने होस्टल सुविधाएँ बेहतर करने, कैंपस की सुरक्षा और महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान (जैसे menstrual leave) जैसे मुद्दों को उठाया।

  • Left Alliance (SFI-AISA) – प्रत्याशी: Anjali। उनकी अपील थी कि फीस में कटौती हो, कल्याणकारी नेटवर्क बेहतर हो, छात्रों के शिकायत-निवारण की व्यवस्था सुदृढ़ हो और लैंगिक अन्याय के खिलाफ लगातार संघर्ष किया जाए।

इनके अलावा कुछ स्वतंत्र उम्मीदवारों ने भी चुनावी प्रक्रिया में भाग लिया। छात्र संगठनों ने सोशल मीडिया, डिजिटल प्रचार और व्यक्तिगत संपर्क जैसे तरीकों का उपयोग बढ़ाया है।

चुनावी मुद्दे:

इस बार छात्रों को प्रभावित करने वाले कुछ प्रमुख मुद्दे ये रहे:

  1. होस्टल सुविधा की कमी – कई छात्र, विशेषकर दूसरे-राज्यों या दूर-दराज से आने वाले, होस्टल कम होने से परेशान हैं।

  2. फीस वृद्धि और आर्थिक दबाव – कॉलेज और विश्वविद्यालय की फीस, सामग्री, स्टेशनरी आदि की लागत बेहतर आर्थिक सहायता की माँग कर रही है।

  3. महिला सुरक्षा और लैंगिक संवेदनशीलता – महिलाओं के अनुभव, निजी और सार्वजनिक सुरक्षा, और लैंगिक न्याय की आवश्यकता अधिक जोर से उठी।

  4. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की लागू­त और उसकी चुनौतियाँ – पाठ्यक्रम, उपस्थिति नीति, प्रशिक्षण-अवसर आदि में बदलाव की माँग।

  5. चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता – EVMs का इस्तेमाल, मतदान केंद्रों पर निगरानी, प्रचार सामग्री पर नियंत्रण आदि।

वोटिंग, सहभागिता और चुनावी प्रक्रिया:

  • लगभग 2.8 लाख से अधिक छात्र-छात्राएँ इस चुनाव में मतदान के लिए पात्र थे।

  • मतदान दो चरणों में हुआ: सुबह कॉलेज-दिन के छात्रों के लिए और शाम को शाम-क्लास और इलिमेंटेड छात्रों के लिए।

  • EVMs (Electronic Voting Machines) का इस्तेमाल किया गया ताकि मतदान प्रक्रिया तेज़ और विश्वसनीय हो।

  • कॉलेजों और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त की: सीसीटीवी, पुलिस तैनाती, मतदान केंद्रों की मॉनिटरिंग आदि।

  • प्रचार सामग्री-विभाजन (posters, pamphlets) पर नियंत्रण और “anti-defacement” नियमों का पालन कराया गया।

परिणाम की स्थिति और विश्लेषण:

चुनाव 18 सितंबर, 2025 को हुए, और मतगणना की तारीख तय की गई है 19 सितंबर, 2025

फिलहाल (लेखन के समय) पूर्ण परिणाम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन जो प्रमुख उम्मीदवार हैं और जो मुकाबला है, उससे ये साफ है कि राजनीति विश्वविद्यालय की राजनीति से कहीं आगे निकल चुकी है — छात्रों की अपेक्षाएँ, उनकी आवाज और संगठन रणनीतियाँ अधिक मुद्दे-केंद्रित हो रही हैं।

DUSU चुनाव 2025 सिर्फ़ एक छात्रसंघ चुनाव नहीं है; यह एक संकेत है कि युवा राजनीति, शिक्षा नीति और सामाजिक न्याय के मुद्दे किस प्रकार से उच्च शिक्षा संस्थानों में गहराई से पैठ बना रहे हैं। छात्र अब सिर्फ़ ‘नेताओं’ की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे सुधार चाहते हैं — बेहतर सुविधाएँ, आर्थिक न्याय, सुरक्षित माहौल, लैंगिक समानता और सरकार-नीति के प्रति जवाबदेही।

जब परिणाम आएँगे, तो यह देखा जाना चाहिए कि कौन-सी पार्टी छात्रों की अपेक्षाओं के अनुरूप काम करेगी, और किस तरह से विश्वविद्यालय प्रशासन इन आवाज़ों को सुनते हुए नीतियाँ बनाएँगे। छात्र राजनीति वास्तव में एक महत्वपूर्ण जागरूकता और परिवर्तन का जरिया बन रही है – DUSU 2025 इसका एक ताज़ा उदाहरण है।

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