Diwali 2025 Special: दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है- भारतीय संस्कृति का सबसे उज्जवल और पवित्र त्योहार है। हर साल यह पर्व खुशियों, प्रेम और प्रकाश का संदेश लेकर आता है। लेकिन 2025 की दिवाली कुछ अलग है, कुछ खास है। इस साल की दिवाली केवल दीपों का त्यौहार नहीं, बल्कि बदलते समय, नई सोच और एकजुट भारत की पहचान बनने जा रही है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है जो 2025 की दिवाली को खास बनाता है।

1. दुर्लभ खगोलीय योग, शुभता का अद्भुत संयोग:
2025 की दिवाली इस बार 29 अक्टूबर (बुधवार) को मनाई जाएगी, और इस दिन अमावस्या तिथि, बुध ग्रह का उच्च स्थिति में होना, और शुभ पुष्य नक्षत्र का संयोग एक साथ बन रहा है। यह संयोग दशकों में बहुत कम देखने को मिलता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह योग घर में लक्ष्मी के स्थायी आगमन और जीवन में समृद्धि का संकेत है।
इस बार दीपावली की रात केवल दीयों से नहीं, बल्कि आकाशीय ऊर्जा से भी जगमगाने वाली है। ग्रहों की स्थिति ऐसी होगी कि यह वर्ष “प्रकाश और प्रगति” का प्रतीक मानी जा रही है।
2. हरित (Green) दिवाली का बढ़ता संदेश:
जहां पहले दिवाली का मतलब था पटाखे और धुआं, वहीं अब लोग जागरूक हो रहे हैं। 2025 की दिवाली में देश के कई हिस्सों में “ग्रीन दिवाली” का आंदोलन जोरों पर है। स्कूलों, समाजों और मंदिरों में पर्यावरण के अनुकूल दीपोत्सव की तैयारियां की जा रही हैं।
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मिट्टी के दीये, गोबर के दीप और प्राकृतिक रंगों से सजावट
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पौधों को उपहार देने की परंपरा
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कम ध्वनि वाले इको-फ्रेंडली पटाखों का प्रयोग
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बिजली बचाने के लिए सोलर लाइट्स का उपयोग
यह सब मिलकर 2025 की दिवाली को धरती और मानवता दोनों के लिए शुभ बना रहे हैं।
3. आत्मनिर्भर भारत की दिवाली:
पिछले कुछ वर्षों में भारत में “वोकल फॉर लोकल” अभियान को खूब बढ़ावा मिला है। इस बार भी दिवाली पर स्वदेशी उत्पादों का बाजार में बोलबाला रहेगा।
चीन के बने उत्पादों की जगह अब स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए दीये, मूर्तियाँ, तोरण और मिठाइयाँ लोगों की पहली पसंद बन रहे हैं।
ग्रामीण महिलाओं के बनाए हस्तनिर्मित दीयों से लेकर पहाड़ों और गाँवों के उत्पाद तक—सब कुछ अब शहरी घरों में जगह पा रहा है।
यह दिवाली आर्थिक स्वावलंबन और लोक संस्कृति की पुनः स्थापना की दिशा में एक बड़ा कदम है।
4. डिजिटल और सोशल दिवाली- तकनीक से जुड़ी परंपरा:
2025 की दिवाली डिजिटल युग की दिवाली होगी। लोग अब केवल घरों में ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन भी दिवाली मना रहे हैं।
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वर्चुअल पूजा आयोजन
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ऑनलाइन दीपदान
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डिजिटली ग्रीटिंग्स और वीडियो कॉल से बधाइयाँ
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सोशल मीडिया पर “#LightOfHope2025” जैसे अभियान
यह दिखाता है कि आधुनिकता और परंपरा का मेल कितनी खूबसूरती से हो रहा है। भले ही तकनीक बदल गई हो, लेकिन भावनाओं की रोशनी वही है जो सदियों से दीपावली को जगमगाती आई है।
5. परिवारों का मिलन – दूरियों को मिटाती दिवाली:
कोविड और व्यस्त जीवनशैली के बाद अब लोग फिर से परिवार के साथ समय बिताने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
2025 की दिवाली पर ट्रेनों और हवाई टिकटों की भारी बुकिंग से साफ है कि लोग अपने गाँव, अपने घर लौट रहे हैं।
इस बार दिवाली केवल “लक्ष्मी पूजन” नहीं, बल्कि “परिवार पूजन” का पर्व बन रही है।
लोगों में यह भावना जागी है कि असली रोशनी तब है जब अपने साथ हों।
6. भारत की सांस्कृतिक पहचान को नया सम्मान:
2025 में जब दुनिया भारत की अर्थव्यवस्था और संस्कृति की चर्चा कर रही है, तब दिवाली का महत्व और भी बढ़ जाता है।
अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अरब देशों तक भारतीय समुदायों ने दिवाली को वैश्विक पर्व बना दिया है।
इस साल कई देशों में सरकारी स्तर पर भी “Diwali Day” मनाया जाएगा।
यह भारत की “सॉफ्ट पावर” का प्रमाण है – एक ऐसा देश जो प्रकाश, प्रेम और शांति के संदेश से पूरी दुनिया को जोड़ रहा है।
7. पर्व का आध्यात्मिक अर्थ- अंधकार से प्रकाश की ओर:
भले ही दिवाली की चमक चारों ओर फैली हो, पर इसका मूल संदेश वही है —
“अंधकार पर प्रकाश की विजय, असत्य पर सत्य की विजय, अहंकार पर नम्रता की विजय।”
2025 की दिवाली इस संदेश को और भी गहराई से महसूस करने का अवसर देती है।
जीवन की भागदौड़ में हम अक्सर भीतर के अंधेरे को भूल जाते हैं। यह दिवाली हमें याद दिलाती है कि
अगर हम अपने भीतर एक दीप जलाएं
प्रेम, करुणा और सद्भाव का
तो बाहर की दुनिया अपने आप रोशन हो जाएगी।
8. आर्थिक रूप से भी शुभ- निवेश और समृद्धि का समय:
दिवाली हमेशा से धनतेरस, खरीदारी और नए आरंभ का प्रतीक रही है।
2025 में भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत दिशा में जा रही है, और निवेश के लिए यह समय बेहद शुभ माना जा रहा है।
इस वर्ष की ग्रह दशा और वित्तीय स्थिति बताती है कि व्यापार, नौकरी और नए स्टार्टअप्स के लिए यह दिवाली सौभाग्यशाली हो सकती है।
9. युवाओं की दिवाली- रचनात्मकता और सेवा की भावना:
आज की पीढ़ी दिवाली को केवल त्योहार नहीं, बल्कि अवसर मानती है —
किसी की मदद करने, समाज में बदलाव लाने और खुशी बाँटने का अवसर।
कई युवा इस बार वृद्धाश्रमों, अनाथालयों और पशु संरक्षण केंद्रों में जाकर दिवाली मनाने की योजना बना रहे हैं।
यह दिखाता है कि 2025 की दिवाली केवल अपने घर को नहीं, बल्कि किसी और के जीवन को भी रोशन करने का संकल्प है।
2025 की दिवाली- परिवर्तन की नई किरण:
हर साल दिवाली आती है और चली जाती है, लेकिन कुछ साल इतिहास में दर्ज हो जाते हैं।
2025 की दिवाली ऐसा ही एक अवसर है —
जहाँ धर्म और विज्ञान, परंपरा और तकनीक, परिवार और समाज — सब एक साथ रोशन हो रहे हैं।
यह दिवाली हमें याद दिलाती है कि
“दीप जलाना केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि एक विचार है —
कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो,
एक छोटी सी लौ उसे मिटाने के लिए काफी है।”
तो आइए, इस 2025 की दिवाली पर न केवल घर सजाएँ, बल्कि दिलों को भी रोशन करें।
यह दिवाली सिर्फ त्योहार नहीं, एक बदलाव की शुरुआत है।
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