DIG Harcharan Singh Bhullar News: वर्दी में लिपटा भ्रष्टाचार

DIG Harcharan Singh Bhullar News: पंजाब पुलिस की साख पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और रूपनगर रेंज (रूपनगर रेंज) के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) हरचरण सिंह भुल्लर को भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया है। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा 16 अक्टूबर 2025 को की गई इस कार्रवाई ने पूरे पुलिस महकमे में सनसनी फैला दी है। यह मामला सिर्फ एक रिश्वत का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की जड़ तक झकझोरने वाला है जहाँ कानून की रक्षा करने वाला अधिकारी ही कानून को बेचने का आरोप झेल रहा है।

DIG Harcharan Singh Bhullar News

घटना की शुरुआत: एक कबाड़ी व्यापारी की शिकायत से खुला मामला:

CBI को यह मामला तब मिला जब एक कबाड़ी व्यापारी ने शिकायत की कि DIG भुल्लर ने उससे ₹8 लाख की रिश्वत मांगी। यह रिश्वत 2023 में दर्ज एक FIR को “सेटल” करने और आगे कोई कार्रवाई न करने के बदले मांगी गई थी। व्यापारी ने बताया कि उसे लगातार अधिकारी के माध्यम से दबाव डाला जा रहा था कि “काम” करवाना है तो “सेवा पानी” देना पड़ेगा।

CBI ने जब इस शिकायत पर प्राथमिक जांच की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आरोपों की पुष्टि के बाद CBI ने जाल बिछाया और भुल्लर को रिश्वत मामले में गिरफ्तार कर लिया।

CBI की छापेमारी में चौंकाने वाले खुलासे:

गिरफ्तारी के बाद जब CBI ने DIG भुल्लर के ठिकानों पर छापेमारी की, तो जांचकर्ताओं के होश उड़ गए। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को निम्नलिखित वस्तुएँ मिलीं:

  • करीब ₹7.5 करोड़ नकद, जो कई अलमारियों और लॉकरों में भरा हुआ था।

  • लगभग 2.5 किलोग्राम सोना, जिसमें सोने की ईंटें, सिक्के और ज्वेलरी शामिल थी।

  • 22 महंगी घड़ियाँ, जिनमें कुछ इंटरनेशनल ब्रांड की थीं।

  • मर्सिडीज और ऑडी जैसी लग्जरी कारें।

  • कई हथियार और गोला-बारूद, जिनके लाइसेंस की जांच जारी है।

  • 50 से अधिक संपत्तियों के दस्तावेज, जिनका मूल्य करोड़ों में आंका जा रहा है।

CBI सूत्रों का कहना है कि इन संपत्तियों में से कई “बेनामी” हो सकती हैं, यानी किसी और के नाम पर खरीदी गई हों लेकिन वास्तविक मालिक खुद भुल्लर हों।

DIG Harcharan Singh Bhullar News: भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी?

यह मामला इस बात की ओर संकेत करता है कि पुलिस तंत्र में भ्रष्टाचार कितनी गहराई तक पहुंच चुका है। एक DIG स्तर का अधिकारी, जिसे ईमानदारी और अनुशासन का प्रतीक होना चाहिए, जब खुद घूसखोरी में लिप्त पाया जाता है, तो यह जनता के भरोसे पर सीधा प्रहार है।

रिपोर्टों के अनुसार, भुल्लर पर “मासिक सेवा शुल्क” लेने के भी आरोप हैं — यानी कुछ कारोबारी या अन्य लोग नियमित रूप से उन्हें पैसे देते थे ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई न हो। CBI को एक व्हाट्सएप कॉल रिकॉर्डिंग भी मिली है जिसमें भुल्लर कथित तौर पर अपने एक बिचौलिए को “सेवा-पानी” इकट्ठा करने के निर्देश दे रहे हैं।

सरकार की कार्रवाई और प्रतिक्रिया:

भुल्लर की गिरफ्तारी के तुरंत बाद पंजाब सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। सरकार ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम 3(2) के तहत कार्रवाई की, जिसके अनुसार अगर कोई अधिकारी 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रहता है तो वह स्वतः निलंबित माना जाता है।

राजनीतिक स्तर पर भी इस पूरे मामले ने हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने तो यहाँ तक कहा कि “मुख्यमंत्री की चुप्पी इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं सरकार भी इसमें जिम्मेदार है।”

CBI की जांच आगे कहाँ तक पहुँची?

CBI ने भुल्लर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और अब एजेंसी उनकी संपत्तियों और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है।
जांच में अब तक यह पता चला है कि उनकी कुछ संपत्तियाँ पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में हैं, जबकि कुछ जमीनें हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में भी हो सकती हैं।

CBI अब यह जांच कर रही है कि क्या इन संपत्तियों की खरीद उनके वेतन या ज्ञात आय स्रोतों से मेल खाती है या नहीं। इसके अलावा, एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी इस मामले को देख रही है।

जनता में आक्रोश और पुलिस पर सवाल:

भुल्लर प्रकरण ने जनता के बीच गहरा असंतोष पैदा किया है। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि “अगर एक DIG इतनी संपत्ति छिपा सकता है, तो निचले स्तर पर क्या हो रहा होगा?”
यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की ग़लती नहीं बल्कि उस पूरी व्यवस्था की विफलता को उजागर करता है जो ऐसे लोगों को वर्षों तक फलने-फूलने देती है।

कई पूर्व पुलिस अधिकारियों ने भी माना कि पुलिस बल के अंदर एक “मौन संस्कृति” विकसित हो गई है — जहाँ वरिष्ठ अधिकारी गलत कार्यों पर आंखें मूंद लेते हैं क्योंकि कहीं न कहीं सब कुछ “सिस्टम का हिस्सा” बन चुका है।

न्याय और जवाबदेही की राह:

अब सवाल यह है कि क्या यह मामला सिर्फ एक “उदाहरण” बनकर रह जाएगा या वास्तव में पंजाब पुलिस में सुधार की प्रक्रिया शुरू होगी?
भुल्लर जैसे वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई निश्चित रूप से एक बड़ा कदम है, लेकिन असली सुधार तब होगा जब पुलिस विभाग के भीतर पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।

अगर इस मामले की जांच निष्पक्ष और गहराई से होती है, तो यह कई और छिपे हुए चेहरों को भी उजागर कर सकती है।

DIG हरचरण सिंह भुल्लर का मामला पंजाब पुलिस के लिए एक बड़ा सबक है। यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ़्तारी नहीं, बल्कि उस सोच का पतन है जो सत्ता और वर्दी को निजी लाभ का साधन मानती है।
जनता उम्मीद कर रही है कि सरकार और जांच एजेंसियाँ इस मामले को उदाहरण बनाकर यह संदेश देंगी — “भ्रष्ट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं।”

LIVE : Punjab Police DIG Harcharan Singh Bhullar को CBI ने अरेस्ट क‍िया, 5 लाख की र‍िश्वत का आरोप

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