Delhi Blast: लाल किला के पास धमाका, पुलवामा-फरीदाबाद ‘व्हाइट-कॉलर’ मॉड्यूल से निकला कनेक्शन, देश हिला दिल्ली कांपी

Delhi Blast: 10 नवंबर 2025 की शाम, दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहर लाल किला के पास अचानक हुए एक तेज़ कार विस्फोट ने पूरे देश को हिला दिया। यह धमाका इतना भयावह था कि कुछ ही सेकंड में आस-पास की कई गाड़ियाँ जल उठीं, सड़क पर अफरा-तफरी मच गई, और लोगों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा। इस दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई और कई गंभीर रूप से घायल हुए।

शुरुआत में इसे एक सामान्य हादसा माना जा रहा था, लेकिन कुछ ही घंटों में यह साफ़ हो गया कि यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि एक संगठित आतंकी साज़िश थी, जिसके तार कश्मीर से लेकर हरियाणा तक फैले हैं।

जांच में निकला चौंकाने वाला सच | Delhi Blast

Delhi Blast

दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को जब कार के नंबर और रजिस्ट्रेशन की जानकारी मिली, तो सारा मामला ही पलट गया। कार का मालिक निकला — डॉ. उमर मोहम्मद, जो जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला है। जांच में सामने आया कि डॉ. उमर किसी साधारण व्यक्ति का नाम नहीं, बल्कि एक ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था।

इसी मॉड्यूल के दो अन्य सदस्य — डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. आदिल रदर — को कुछ दिन पहले फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद ही डॉ. उमर ने घबराहट में कार को लेकर भागने की कोशिश की और लाल किला के पास पहुंचने पर विस्फोट कर दिया।

2,900 किलो विस्फोटक बरामद

हरियाणा के फरीदाबाद में जब पुलिस ने छापेमारी की, तो दो अलग-अलग घरों से करीब 2,900 किलो संदिग्ध विस्फोटक बरामद हुए। ये दोनों घर डॉ. मुजम्मिल शकील के नाम से किराए पर लिए गए थे।

पहले घर में 350 किलो विस्फोटक, टाइमर, हथियार और गोलियाँ मिलीं। दूसरे घर में 2,563 किलो से ज़्यादा अमोनियम नाइट्रेट जैसी सामग्री बरामद की गई। ये वही रासायनिक पदार्थ है जिसका उपयोग लाल किला धमाके में भी हुआ बताया जा रहा है।

यह बरामदगी अपने-आप में एक बड़ा संकेत थी कि यह मॉड्यूल कोई साधारण संगठन नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध आतंकी नेटवर्क था, जो लंबे समय से दिल्ली या किसी अन्य बड़े शहर में हमला करने की तैयारी कर रहा था।

कार की पूरी कहानी

धमाके में इस्तेमाल हुई कार की जांच के दौरान एजेंसियों ने पाया कि इसका स्वामित्व तीन लोगों के बीच बदला गया था।
पहले यह एक व्यक्ति आमिर के नाम पर थी, फिर उसने इसे तारिक को बेचा, और आखिर में डॉ. उमर मोहम्मद ने इसे अपने नाम पर लिया।
यह भी सामने आया है कि कार कुछ दिन से दिल्ली-एनसीआर में घूम रही थी और धमाके से कुछ घंटे पहले ही इसे लाल किला क्षेत्र में देखा गया था।

जांच अधिकारियों का मानना है कि शायद कार को किसी बड़े लक्ष्य तक ले जाया जा रहा था, लेकिन गिरफ्तारी की ख़बर सुनकर मॉड्यूल में शामिल उमर ने घबराकर बीच रास्ते में ही विस्फोट कर दिया।

‘व्हाइट-कॉलर’ मॉड्यूल: जब पढ़े-लिखे लोग बने आतंक के औज़ार

यह घटना इसलिए और भयावह है क्योंकि इसमें शामिल सभी प्रमुख आरोपी उच्च शिक्षित हैं।
डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. आदिल रदर – दोनों मेडिकल पेशे से जुड़े हैं, और उमर मोहम्मद भी डॉक्टर है।
जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क को “व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल” नाम दिया है क्योंकि इसमें शामिल लोग समाज में सम्मानित पेशों से जुड़े हैं, लेकिन मानसिक रूप से कट्टरपंथी सोच से प्रभावित होकर पाकिस्तान और अन्य विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में आए।

ये लोग सोशल मीडिया और एनक्रिप्टेड चैट ऐप्स के ज़रिए आपस में संवाद करते थे। इनके हैंडलर उन्हें न केवल फंडिंग और तकनीकी सहायता देते थे बल्कि “जिहादी कंटेंट” के ज़रिए लगातार ब्रेनवॉश भी करते थे।

धमाके की रात की घटनाएँ

सोमवार शाम करीब 6:45 बजे, लाल किला मेट्रो स्टेशन के बाहर ट्रैफिक सामान्य था। सिग्नल पर गाड़ियाँ रुकी थीं कि तभी एक सफेद कार से तेज़ धमाके की आवाज़ आई। कुछ ही सेकंड में लपटें उठीं और आस-पास खड़ी छह कारें व कुछ ऑटो-रिक्शा आग की चपेट में आ गए।
लोगों में भगदड़ मच गई, दुकानें बंद होने लगीं, और धुआँ पूरे इलाके में फैल गया।

दमकल विभाग ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाई, घायलों को अस्पताल ले जाया गया। कुछ की मौत मौके पर ही हो गई। दृश्य बेहद वीभत्स था — सड़क पर खून के धब्बे, जली हुई गाड़ियाँ, और दहशत में भागते लोग।

जांच एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई

धमाके के कुछ ही घंटों में दिल्ली पुलिस, NIA, NSG, IB, जम्मू-कश्मीर पुलिस और हरियाणा पुलिस ने संयुक्त जांच टीम गठित कर दी।
साथ ही, फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने घटना स्थल से बम के अवशेष, टाइमर, धातु के टुकड़े, और जले कपड़ों के सैंपल जुटाए।

अब तक मिले साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि बम में अमोनियम नाइट्रेट, डीजल, और टाइम डिटोनेटर का मिश्रण था — बिलकुल वैसा ही जैसा फरीदाबाद के घरों से मिला था।

गृह मंत्रालय और पुलिस का बयान

दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा ने बताया कि,

“एक धीमी गति से चल रही कार सिग्नल पर रुकी थी। तभी उसमें जोरदार धमाका हुआ, जिससे आसपास की गाड़ियाँ भी प्रभावित हुईं। मौके पर तुरंत पुलिस और दमकल की टीमें पहुंचीं।”

गृह मंत्री अमित शाह ने देर रात ट्वीट कर कहा,

“किसी भी संभावना को नकारा नहीं गया है। सभी एंगल्स पर जांच हो रही है, चाहे वह आतंकी साजिश हो या किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा मामला।”

कश्मीर से फरीदाबाद तक फैला नेटवर्क

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि यह मॉड्यूल पिछले 26 दिनों से उनकी निगरानी में था।
टीम ने सुरागों के आधार पर कई जगहों पर छापेमारी की — सहित श्रीनगर, अनंतनाग, गांदरबल, शोपियां, और फरीदाबाद।
इन छापों में न सिर्फ विस्फोटक बल्कि 20 टाइमर, असॉल्ट राइफलें, पिस्टलें, और सैकड़ों कारतूस बरामद हुए।

सूत्रों के मुताबिक, मॉड्यूल को पाकिस्तान से संचालित किया जा रहा था। हैंडलर्स इन डॉक्टरों और पेशेवरों को आतंक की विचारधारा में ढालने के साथ उन्हें “लो-प्रोफाइल सेल” के रूप में प्रयोग कर रहे थे ताकि सुरक्षा एजेंसियों को शक न हो।

दिल्ली हाई अलर्ट पर

धमाके के बाद राजधानी दिल्ली में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
भीड़-भाड़ वाले इलाकों — चांदनी चौक, कश्मीरी गेट, कनॉट प्लेस, और लाजपत नगर में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।
CCTV कैमरों की जांच की जा रही है, और कई जगह क्विक रिस्पॉन्स टीम्स को तैनात किया गया है।

नोएडा, गाज़ियाबाद और गुरुग्राम में भी पुलिस ने सख़्ती बढ़ा दी है ताकि कोई दूसरी घटना न हो सके।

लोगों में डर, सवाल और आक्रोश

लाल किला जैसी ऐतिहासिक और भीड़भाड़ वाली जगह पर ऐसा हमला आम लोगों में गुस्सा और भय का कारण बना हुआ है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाए हैं — आखिर कैसे इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री दिल्ली की सीमा तक पहुंच गई?
क्या सुरक्षा एजेंसियों को पहले कोई खुफिया इनपुट नहीं मिला?

स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाके के समय बाजार में सैकड़ों लोग थे, अगर कार कुछ मीटर आगे बढ़ जाती तो मौतों की संख्या कई गुना ज़्यादा होती।

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