DA Merger 2026: देश के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए साल 2026 एक बड़ा बदलाव लेकर आने वाला है। केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के तहत यह संकेत दे दिया है कि 1 जनवरी 2026 से मौजूदा महंगाई भत्ता यानी डियरनेस अलाउंस का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा मूल वेतन में मर्ज कर दिया जाएगा। यह फैसला सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि सैलरी स्ट्रक्चर, पेंशन कैलकुलेशन और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को पूरी तरह नया रूप देने वाला कदम माना जा रहा है।
करीब 48 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 67 लाख पेंशनर्स इस फैसले से सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि जब महंगाई भत्ता लगातार बढ़कर 70 प्रतिशत के आसपास पहुंच गया है, तो उसे मूल वेतन में शामिल किया जाए, ताकि कर्मचारियों को इसका वास्तविक फायदा मिल सके।
महंगाई भत्ता आखिर क्यों किया जाता है शामिल? DA Merger 2026
महंगाई भत्ता कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए दिया जाता है। समय के साथ जैसे-जैसे रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ते हैं, वैसे-वैसे सरकार DA बढ़ाती है, ताकि कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनी रहे। लेकिन जब DA बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो वह सैलरी का एक बड़ा हिस्सा बन जाता है, जबकि मूल वेतन अपेक्षाकृत कम ही रहता है।
यही वजह है कि हर वेतन आयोग में एक समय ऐसा आता है, जब DA को बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाता है और फिर DA को शून्य से दोबारा शुरू किया जाता है। 2026 में भी कुछ ऐसा ही होने जा रहा है।
8वें वेतन आयोग में DA मर्जर क्यों है खास
8वें वेतन आयोग के तहत प्रस्तावित DA मर्जर इसलिए भी खास है, क्योंकि इस बार महंगाई भत्ता करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन 30 हजार रुपये है, तो उसे लगभग 21 हजार रुपये DA के रूप में मिल रहा है।
जब यह DA मूल वेतन में शामिल होगा, तो वही कर्मचारी का नया बेसिक वेतन करीब 51 हजार रुपये के आसपास पहुंच जाएगा। इसके बाद नया DA फिर से शून्य से गिना जाएगा। इससे न सिर्फ सैलरी बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में मिलने वाले सभी भत्ते, पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स भी उसी बढ़े हुए बेसिक पर आधारित होंगे।
कर्मचारियों की सैलरी पर क्या पड़ेगा असर
DA मर्जर का सबसे बड़ा असर कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी पर पड़ेगा। अभी तक DA अलग से मिलने की वजह से यह सिर्फ महंगाई की भरपाई करता था, लेकिन मूल वेतन में शामिल होने के बाद यह स्थायी आय का हिस्सा बन जाएगा।
इसका मतलब यह है कि HRA, TA और दूसरे अलाउंस, जो बेसिक पे के प्रतिशत के हिसाब से मिलते हैं, उनकी रकम भी अपने आप बढ़ जाएगी। कुल मिलाकर कर्मचारियों की मासिक आय में अच्छा-खासा उछाल देखने को मिल सकता है।
पेंशनर्स के लिए क्यों है यह फैसला राहत भरा
यह फैसला सिर्फ काम कर रहे कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि पेंशनर्स के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होगा। पेंशन की गणना मूल वेतन के आधार पर होती है। जब बेसिक पे बढ़ेगा, तो उसी अनुपात में पेंशन भी बढ़ेगी।
जो कर्मचारी 2026 के आसपास रिटायर होंगे, उन्हें बढ़े हुए बेसिक के हिसाब से पेंशन मिलेगी। वहीं, पहले से रिटायर पेंशनर्स के लिए भी संशोधित पेंशन का रास्ता साफ हो सकता है, जैसा कि पहले के वेतन आयोगों में देखा गया है।
DA रीसेट होने का क्या मतलब है

DA मर्जर के बाद महंगाई भत्ता शून्य हो जाएगा। इसका मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों को DA मिलना बंद हो जाएगा। बल्कि नया DA फिर से शून्य से शुरू होगा और आगे चलकर महंगाई के आंकड़ों के हिसाब से बढ़ेगा।
इस प्रक्रिया से सैलरी स्ट्रक्चर ज्यादा साफ और संतुलित हो जाता है। कर्मचारी को यह समझने में भी आसानी होती है कि उसकी असल सैलरी कितनी है और महंगाई के कारण उसमें कितना इजाफा हो रहा है।
रिटायरमेंट और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा सीधा असर
DA मर्जर का असर सिर्फ मौजूदा सैलरी तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा फायदा रिटायरमेंट के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य लाभों पर भी पड़ेगा।
चूंकि ग्रेच्युटी और पेंशन की गणना अंतिम मूल वेतन के आधार पर होती है, इसलिए बेसिक पे बढ़ने से रिटायरमेंट के समय मिलने वाली रकम भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा होगी। यह उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है, जो रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।
महंगाई के दौर में क्यों जरूरी था यह कदम
पिछले कुछ वर्षों में महंगाई ने आम लोगों की जेब पर भारी दबाव डाला है। खाने-पीने की चीजें हों, बच्चों की पढ़ाई या इलाज का खर्च, हर चीज महंगी हो चुकी है। ऐसे में सिर्फ DA बढ़ाने से पूरी राहत नहीं मिल पा रही थी।
DA को बेसिक में मर्ज करने से कर्मचारियों को एक स्थायी राहत मिलेगी, जिससे उनकी आर्थिक योजना बेहतर हो सकेगी। यह फैसला सरकार की उस सोच को भी दिखाता है, जिसमें वह कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों को समझते हुए कदम उठा रही है।
क्या मिलेगा एरियर का फायदा?

अक्सर जब नया वेतन आयोग लागू होता है, तो सरकार ट्रांजिशन पीरियड का एरियर भी क्लियर करती है। माना जा रहा है कि DA मर्जर के बाद भी सरकार इस पर विचार कर सकती है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला आधिकारिक नोटिफिकेशन आने के बाद ही साफ होगा।
अगर एरियर मिलता है, तो यह कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों के लिए अतिरिक्त राहत का कारण बनेगा।
सरकार के लिए क्या है इसका मतलब?
इस फैसले से सरकार पर वित्तीय बोझ जरूर बढ़ेगा, लेकिन इसके साथ ही कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा। एक संतुष्ट कर्मचारी ज्यादा बेहतर तरीके से काम करता है, जिसका असर सीधे प्रशासन और सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ता है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आय से बाजार में खर्च भी बढ़ेगा, जिससे अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है।
DA Merger 2026 को अगर हाल के वर्षों के सबसे बड़े सैलरी रिफॉर्म में से एक कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। 8वें वेतन आयोग के तहत 70 प्रतिशत DA को मूल वेतन में शामिल करने का फैसला लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाला है।
यह कदम न सिर्फ मासिक आय बढ़ाएगा, बल्कि रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। बढ़ती महंगाई के दौर में यह फैसला समय पर उठाया गया एक जरूरी कदम माना जा रहा है, जिससे देश के करोड़ों परिवारों को सीधी राहत मिलने वाली है।
ऐसे और भी Explainer लेखों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें! Khabari bandhu पर पढ़ें देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरें — बिज़नेस, एजुकेशन, मनोरंजन, धर्म, क्रिकेट, राशिफल और भी बहुत कुछ।
Aadhar PAN Link Status: क्या आपका PAN आधार से लिंक है? जानिए अभी घर बैठे कैसे करें लिंक स्टेटस चेक