Car Insurance Kyu Jaruri Hai: भारत में हर महीने हज़ारों सड़क हादसे होते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में कारें शामिल होती हैं। इन हादसों में न सिर्फ जान का खतरा रहता है, बल्कि गाड़ियों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे हालात में कार इंश्योरेंस सबसे बड़ा सहारा बनता है। अगर आपके पास वैध कार इंश्योरेंस है तो नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी करती है, और अगर नहीं है तो सारा खर्च आपकी जेब से जाता है। यही कारण है कि कार इंश्योरेंस सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि ज़रूरी सुरक्षा कवच है।
क्यों है जरूरी कार इंश्योरेंस? Car Insurance Kyu Jaruri Hai
भारत में मोटर व्हीकल एक्ट के तहत हर कार मालिक के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना कानूनी तौर पर अनिवार्य है। इसका मतलब है कि अगर आपकी कार से किसी थर्ड पार्टी को नुकसान पहुंचता है, तो उसका मुआवजा इंश्योरेंस कंपनी देती है।
लेकिन कार इंश्योरेंस का महत्व केवल कानून तक सीमित नहीं है। यह आपको और आपकी गाड़ी को कई तरह से सुरक्षित करता है।
-
चोरी होने पर सुरक्षा: अगर आपकी कार चोरी हो जाती है, तो बीमा कंपनी आपको कार की कीमत का भुगतान करती है।
-
दुर्घटना में नुकसान: हादसे में कार को हुए नुकसान की मरम्मत का खर्च इंश्योरेंस से निकलता है।
-
प्राकृतिक आपदा: बाढ़, भूकंप, आगजनी या तूफान जैसी आपदाओं से कार को नुकसान पहुंचे तो भी इंश्योरेंस मदद करता है।
-
कानूनी बचाव: बिना इंश्योरेंस गाड़ी चलाने पर पुलिस कार्रवाई और भारी जुर्माने से बचने के लिए भी यह ज़रूरी है।
कार इंश्योरेंस के प्रकार
भारत में मुख्य रूप से दो तरह के कार इंश्योरेंस उपलब्ध होते हैं।
1. थर्ड पार्टी इंश्योरेंस
यह न्यूनतम बीमा होता है, जो कानून के तहत अनिवार्य है। इसमें आपकी गाड़ी से किसी तीसरे व्यक्ति को हुए नुकसान या चोट का खर्च कंपनी उठाती है। हालांकि इसमें आपकी अपनी कार को हुए नुकसान का कवरेज नहीं मिलता।
2. कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस
यह सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित विकल्प है। इसमें न सिर्फ थर्ड पार्टी बल्कि आपकी अपनी गाड़ी को भी पूरा कवर मिलता है। चाहे दुर्घटना हो, कार चोरी हो जाए या प्राकृतिक आपदा का असर पड़े – सभी मामलों में यह मददगार साबित होता है।
एड-ऑन कवर क्या होते हैं?
कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी के साथ कंपनियां कई एड-ऑन कवर भी ऑफर करती हैं। ये ऐसे एक्स्ट्रा कवरेज होते हैं, जिन्हें चुनकर आप अपनी कार की सुरक्षा और भी मजबूत बना सकते हैं। हालांकि, जितने ज्यादा एड-ऑन आप चुनते हैं, पॉलिसी का प्रीमियम उतना ही बढ़ जाता है।
प्रमुख एड-ऑन कवर
- Zero Depreciation Cover (Zero Dep): कार के पार्ट्स की रिप्लेसमेंट या रिपेयरिंग पर डेप्रिसिएशन चार्ज नहीं कटता। यानी लगभग पूरा खर्च बीमा कंपनी उठाती है।
- Roadside Assistance: अगर कार रास्ते में खराब हो जाए, तो कंपनी की ओर से तुरंत सहायता मिलती है।
- Engine Protection Cover: बाढ़ या पानी घुसने से इंजन खराब हो जाए तो इसका खर्च कवर होता है।
- Key Replacement Cover: कार की चाबी खोने पर नई चाबी बनवाने का खर्च कवर होता है।
- NCB Protection: नो क्लेम बोनस को सुरक्षित रखने का विकल्प, जिससे अगले साल प्रीमियम कम रहता है।
- Personal Accident Cover: कार मालिक और ड्राइवर को दुर्घटना में चोट लगने या मृत्यु होने की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा।
एड-ऑन कवर क्यों हैं जरूरी?
अक्सर लोग सिर्फ बेसिक इंश्योरेंस पॉलिसी ले लेते हैं, लेकिन बाद में जब कार को बड़ा नुकसान होता है, तो उन्हें एहसास होता है कि एड-ऑन कवर कितने जरूरी हैं।
- अगर आपके पास Zero Dep Cover है, तो कार का बंपर टूटने या डेंट पड़ने पर भी रिपेयरिंग का खर्च लगभग पूरा कंपनी देगी।
- Roadside Assistance से आपको टॉइंग, बैटरी जंप-स्टार्ट या पंचर बदलने जैसी सुविधाएं तुरंत मिल जाती हैं।
- Engine Protection Cover खासकर मॉनसून वाले इलाकों में बेहद जरूरी है, जहां पानी से इंजन खराब होना आम बात है।
- Key Replacement Cover आजकल स्मार्ट चाबियों के महंगे होने की वजह से काफ़ी काम आता है।
इन एड-ऑन को चुनकर आप हजारों रुपये तक बचा सकते हैं और बेफिक्र होकर गाड़ी चला सकते हैं।
कार इंश्योरेंस न लेने के नुकसान
कई लोग पैसे बचाने के चक्कर में कार इंश्योरेंस नहीं करवाते या सिर्फ थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पर ही भरोसा कर लेते हैं। लेकिन ऐसा करना भारी नुकसानदेह हो सकता है।
- कार चोरी हो जाने पर पूरा नुकसान खुद उठाना होगा।
- हादसे में कार पूरी तरह डैमेज हो जाए तो लाखों रुपये अपनी जेब से खर्च करने पड़ेंगे।
- बिना वैध इंश्योरेंस गाड़ी चलाने पर ₹2000 तक का जुर्माना और बार-बार पकड़े जाने पर लाइसेंस तक रद्द हो सकता है।
- कानूनी मामलों में भी इंश्योरेंस एक सहारा देता है, वरना लंबे केस और भारी मुआवजे का बोझ उठाना पड़ सकता है।
भारत में कार इंश्योरेंस का ट्रेंड
IRDAI (Insurance Regulatory and Development Authority of India) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 4.5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें से 1.5 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है।
कार इंश्योरेंस क्लेम में सबसे बड़ा हिस्सा दुर्घटना और चोरी से जुड़ा होता है। वहीं, पिछले कुछ सालों में मॉनसून के दौरान बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से इंजन डैमेज के क्लेम तेजी से बढ़े हैं। यही वजह है कि आज इंजन प्रोटेक्शन और जीरो डेप्रिसिएशन जैसे एड-ऑन बेहद लोकप्रिय हो गए हैं।
सही कार इंश्योरेंस कैसे चुनें?
- हमेशा कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस चुनें।
- अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से एड-ऑन कवर लें।
- विभिन्न कंपनियों के प्रीमियम और क्लेम सेटलमेंट रेश्यो की तुलना जरूर करें।
- पॉलिसी खरीदते समय शर्तें ध्यान से पढ़ें ताकि बाद में परेशानी न हो।
कार इंश्योरेंस सिर्फ कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि आपकी गाड़ी और आर्थिक सुरक्षा का मजबूत कवच है। सही पॉलिसी और एड-ऑन चुनकर आप हजारों रुपये तक बचा सकते हैं और हर सफर को बेफिक्र होकर तय कर सकते हैं।
अगर आप भी कार के मालिक हैं और अभी तक सिर्फ थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पर भरोसा कर रहे हैं, तो अब समय है कि कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी के साथ एड-ऑन कवर भी शामिल करें। यह आपके और आपकी गाड़ी दोनों के लिए एक सुरक्षित निवेश है।
ऐसे और भी ऑटो सम्बन्धी टॉपिक के ऊपर लेखों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें! Khabari bandhu पर पढ़ें देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरें — बिज़नेस, एजुकेशन, मनोरंजन, धर्म, क्रिकेट, राशिफल और भी बहुत कुछ।
Maruti E Vitara Production: भारत की पहली ग्लोबल इलेक्ट्रिक SUV विदेशों के बाजारों के लिए तैयार