उत्तराखंड की पारंपरिक रेसिपी भांग की चटनी और सदियों पुराना इतिहास

उत्तराखंड की पारंपरिक रेसिपी भांग की चटनी :

भांग की चटणी, लस्सी का प्याला,
भट्ट की दाल, मडुए का रोटाला,
खालि खालि खाँदा जाँ, मन खुश भई जाला,
पहाड़ का स्वाद, दिल में समा जाला।

ये लोकछंद अक्सर मेलों, त्योहारों और गांव के जमघट में महिलाएं गाती हैं, जब घर में पारंपरिक खाना बन रहा होता है।

भांग की चटनी उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र की एक पारंपरिक और मशहूर चटनी है, जो अपने अलग स्वाद और औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है। यह चटनी भांग के बीज (Hemp Seeds / Cannabis Sativa Seeds) से बनाई जाती है, जिन्हें स्थानीय भाषा में “भांग” या “भंगोरा” भी कहा जाता है। यहाँ यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि इसमें इस्तेमाल होने वाले भांग के बीज नशे वाले पत्तों या फूलों से अलग होते हैं — इन बीजों में नशीला तत्व THC नहीं होता, बल्कि ये अत्यंत पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होते हैं।

उत्तराखंड की पारंपरिक रेसिपी भांग की चटनी
उत्तराखंड की पारंपरिक रेसिपी भांग की चटनी

इतिहास और परंपरा:

भांग की चटनी का इतिहास सदियों पुराना है। हिमालयी क्षेत्रों में भांग के पौधे स्वाभाविक रूप से पाए जाते थे और इनके बीज स्थानीय आहार का हिस्सा बन गए। पुराने समय में पहाड़ी लोग नमक, हरी मिर्च और भांग के बीज को पीसकर एक तीखी-खट्टी चटनी बनाते थे, जो मोटे अनाज (झंगोरा, मडुआ, गहत की दाल) और बाजरे की रोटियों के साथ खाई जाती थी।

कुमाऊं और गढ़वाल में भांग की चटनी को सिर्फ खाने के स्वाद के लिए नहीं, बल्कि इसके औषधीय लाभों के लिए भी खाया जाता था। बुजुर्ग कहते थे कि यह पाचन में मदद करती है, शरीर में गर्माहट बनाए रखती है और लंबे समय तक भूख को नियंत्रित रखती है। पर्वतीय जीवन की कठिन परिस्थितियों में यह एक तरह से “एनर्जी फूड” का काम करती थी।

त्योहारों और पारंपरिक भोज (जैसे शादी-ब्याह, हरेला, इगास-बग्वाल) में भांग की चटनी एक खास डिश के रूप में बनाई जाती थी। इसे “भात” (चावल) के साथ या “भट्ट की दाल” के साथ परोसना एक पुरानी परंपरा है।

भांग के बीज के फायदे:

भांग के बीज पोषण से भरपूर होते हैं। इनमें प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। ये शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं और दिल के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होते हैं।

भांग की चटनी बनाने की पारंपरिक विधि:

सामग्री (4-5 लोगों के लिए)

  • भांग के बीज – 4 बड़े चम्मच

  • हरी मिर्च – 2-3 (स्वादानुसार तीखी या हल्की)

  • लहसुन – 2-3 कलियां (वैकल्पिक)

  • नींबू का रस – 1-2 छोटे चम्मच

  • धनिया पत्ती – एक मुट्ठी (ताज़ा)

  • नमक – स्वादानुसार

  • पानी – आवश्यकतानुसार

बनाने की विधि:

  1. भांग के बीज भूनना
    सबसे पहले एक तवे या कढ़ाई में भांग के बीज को धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। ध्यान रखें कि ये जलने न पाएं, वरना चटनी में कड़वाहट आ जाएगी। भूनते समय इनकी हल्की-सी खुशबू आनी शुरू हो जाएगी — यही सही समय है।

  2. मसालों को पीसना
    अब सिल-बट्टे या मिक्सर में भुने हुए भांग के बीज डालें। इसके साथ हरी मिर्च, लहसुन और थोड़ा-सा नमक डालकर दरदरा पीस लें। पारंपरिक स्वाद के लिए सिल-बट्टे पर पीसना बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे एक अलग मिट्टी-सी खुशबू आती है।

  3. धनिया और नींबू मिलाना
    पिसे हुए मिश्रण में ताज़ा धनिया पत्तियां डालकर फिर से पीस लें। अंत में नींबू का रस डालें और थोड़ा पानी मिलाकर अपनी पसंद की गाढ़ी या पतली चटनी तैयार करें।

  4. परोसना
    भांग की चटनी को गर्म-गर्म चावल, रोटी, पराठा या पहाड़ी दाल के साथ परोसें। यह चाय-नाश्ते के साथ भी बेहद स्वादिष्ट लगती है।

भांग की चटनी का आधुनिक रूप:

आजकल कुछ लोग इसमें टमाटर, पुदीना या दही भी डालकर एक नया स्वाद तैयार करते हैं। हालांकि, पहाड़ी लोग मानते हैं कि असली स्वाद सिर्फ भांग, मिर्च, नमक, धनिया और नींबू से ही आता है।

भांग की चटनी सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक जीवनशैली का प्रतीक है। यह हमें बताती है कि पहाड़ी लोग कैसे प्रकृति के साधनों का उपयोग करके स्वाद और सेहत दोनों का ध्यान रखते थे।

जब आप अगली बार भांग की चटनी बनाएं, तो इसे सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि सदियों पुरानी उस विरासत के रूप में देखें जो आज भी पहाड़ के हर घर के स्वाद में बसती है।

ऐसे और भी Recipe लेखों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें! Khabari bandhu पर पढ़ें देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरें — बिज़नेस, एजुकेशन, मनोरंजन, धर्म, क्रिकेट, राशिफल और भी बहुत कुछ।

Sandwiches for Breakfast: सुबह के नाश्ते में ट्राई करें ये 5 मजेदार वेज सैंडविच, हेल्दी भी और टेस्टी भी

Leave a Comment