जर्मन फुटबॉल सीज़न की शुरुआत हमेशा खास होती है और इस बार भी ऐसा ही हुआ। सुपरकप मुकाबले में Bayern Munich ने स्टटगार्ट को 2-1 से हराकर सीज़न का आगाज़ ट्रॉफी जीत के साथ किया। इस जीत में सबसे बड़ी चर्चा नए खिलाड़ी लुइस डियाज़ की रही, जिन्होंने अपने पहले ही मैच में गोल दागा और टीम की जीत के हीरो बन गए।
यह मुकाबला सिर्फ एक ट्रॉफी तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बायर्न की नई यात्रा की शुरुआत भी थी। फुटबॉल लीजेंड फ्रांज बेकेनबॉयर को समर्पित इस सुपरकप ने टीम और फैन्स दोनों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
हैरी केन का शुरुआती गोल और बढ़त की कहानी

मैच के शुरुआती मिनटों से ही Bayern Munich ने खेल पर अपना दबदबा बना लिया था। 18वें मिनट में टीम को बढ़त दिलाई हैरी केन ने, जिन्होंने सही मौके पर गेंद पाकर शानदार गोल किया।
यह गोल केन के करियर का सिर्फ दूसरा खिताब था, और उन्होंने मैच के बाद कहा –
“To start with a trophy is the most important thing.”
उनका यह बयान बताता है कि कैसे बायर्न में उनका आगाज़ एक बड़ी उम्मीद के साथ हुआ है।
स्टटगार्ट की कोशिशें और नॉयर की दीवार
हालांकि Bayern Munich का पलड़ा भारी था, लेकिन स्टटगार्ट ने भी मैच में पूरी ताकत झोंक दी। टीम के खिलाड़ी निक वोल्टेमाडे ने एक शानदार मौका बनाया, लेकिन बायर्न के दिग्गज गोलकीपर मैनुअल नॉयर ने बेहतरीन बचाव करते हुए गोल रोक लिया।
दिलचस्प बात यह रही कि वोल्टेमाडे को बायर्न खरीदना चाहता था, लेकिन ट्रांसफर फीस पर दोनों क्लबों के बीच सहमति नहीं बन पाई। यह भी इस मैच की बड़ी चर्चाओं में से एक रहा।
Luis Díaz का डेब्यू गोल – टर्निंग पॉइंट
दूसरे हाफ में खेल का सबसे अहम पल आया। 77वें मिनट में लुइस डियाज़ ने गोल दागकर टीम की बढ़त को दोगुना कर दिया। यह उनका बायर्न के लिए पहला गोल था और उन्होंने साबित कर दिया कि वह टीम के लिए कितने महत्वपूर्ण खिलाड़ी साबित हो सकते हैं।
हालांकि, इस गोल के वक्त स्टटगार्ट का एक खिलाड़ी चोट की वजह से मैदान से बाहर इलाज करवा रहा था। इस पर स्टटगार्ट के कोच ने नाराज़गी जताई और कहा कि खिलाड़ी को मैदान पर ही तकलीफ़ झेलनी चाहिए थी। लेकिन फैन्स और मीडिया के लिए डियाज़ का यह गोल इस मुकाबले का टर्निंग पॉइंट बन गया।
स्टटगार्ट का संघर्ष और लेवेलिंग का गोल
मैच के आखिरी मिनटों में स्टटगार्ट ने भी गोल दागा। जेमी लेवेलिंग ने हेडर से शानदार गोल किया और अंतर 2-1 तक कम कर दिया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बायर्न ने आखिरी सीटी तक अपनी बढ़त कायम रखी और सुपरकप अपने नाम कर लिया।
11वीं बार सुपरकप विजेता बना Bayern Munich
इस जीत के साथ Bayern Munich ने 11वीं बार सुपरकप ट्रॉफी जीती। यह उपलब्धि दिखाती है कि क्लब जर्मन फुटबॉल में कितना मजबूत और प्रभावशाली है।
फैन्स के लिए यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि यह सीज़न की शुरुआत में आत्मविश्वास और उम्मीदें जगाने वाला नतीजा था।
जर्मन कप के अन्य मुकाबले – एक्शन और सरप्राइज़
सुपरकप के अलावा, जर्मन कप के पहले राउंड में भी कई मुकाबले खेले गए। इनमें बड़े क्लबों ने छोटे क्लबों के खिलाफ मैदान में उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया।
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वोल्फ्सबर्ग ने एक छोटे क्लब को 9-0 से हराकर जोरदार जीत दर्ज की।
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लीपज़िग और हॉफेनहाइम ने भी आसानी से मुकाबले जीते।
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हैम्बर्गर एसवी को एक निचली डिवीज़न टीम के खिलाफ एक्स्ट्रा टाइम तक संघर्ष करना पड़ा और अंत में 2-1 से जीत मिली।
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स्ट. पाउली ने पेनल्टी शूटआउट के ज़रिए जीत हासिल की।
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सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ जब चौथी डिवीजन की एक टीम ने मिरोस्लाव क्लोज़े की टीम को हरा दिया।
इन मुकाबलों ने यह साबित कर दिया कि जर्मन फुटबॉल सीज़न सिर्फ बड़े नामों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरप्राइज़ और एक्शन भरपूर है।
Bayern Munich की जीत का महत्व
बायर्न की इस जीत का मतलब सिर्फ एक ट्रॉफी जीतना नहीं था। यह जीत दिखाती है कि टीम एक नए आत्मविश्वास और रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। लुइस डियाज़ का डेब्यू गोल आने वाले सीज़न में उनके महत्व की ओर इशारा करता है।
हैरी केन और डियाज़ की जोड़ी भविष्य में बायर्न के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। वहीं मैनुअल नॉयर का अनुभव और डिफेंस की मजबूती टीम को संतुलित बनाती है।
आने वाले मुकाबलों के लिए उम्मीदें
सुपरकप जीतने के बाद अब सबकी निगाहें Bayern Munich के अगले मुकाबलों पर होंगी। टीम के पास बुंडेसलीगा और चैंपियंस लीग जैसे बड़े टूर्नामेंट में खिताब जीतने का मौका है।
फुटबॉल एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर बायर्न इसी लय में खेलता रहा, तो यह सीज़न उनके लिए यादगार साबित हो सकता है।
Bayern Munich की सुपरकप जीत सिर्फ एक शुरुआत है। यह मैच साबित करता है कि क्लब के पास प्रतिभाशाली खिलाड़ी और मजबूत रणनीति दोनों मौजूद हैं। लुइस डियाज़ का डेब्यू गोल आने वाले सीज़न के लिए उनकी क्षमता का परिचय है और हैरी केन का अनुभव टीम को और मजबूत बनाता है।
स्टटगार्ट की चुनौती के बावजूद Bayern Munich ने ट्रॉफी जीतकर यह संदेश दिया है कि वह जर्मन फुटबॉल का असली बादशाह है।
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