Bardhaman Station Stampede: पश्चिम बंगाल के बर्धमान रेलवे स्टेशन पर सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ जिसने यात्रियों में हड़कंप मचा दिया। शाम करीब 5:30 बजे प्लेटफार्म नंबर 4 और 5 के बीच बने फुटओवरब्रिज पर एक महिला अपना संतुलन खो बैठी और सीढ़ियों से गिर गई। महिला के गिरने से वहां बैठे और नीचे उतर रहे यात्री भी अपना संतुलन खो बैठे, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस अफरातफरी में 8 लोग घायल हो गए, जिनमें 5 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं।
घायलों को तुरंत बर्धमान मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। राहत की बात यह रही कि किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन कुछ लोगों को सिर और पैर में गंभीर चोटें आईं।
हादसे की शुरुआत कैसे हुई | Bardhaman Station Stampede
यह घटना उस वक्त हुई जब एक साथ कई ट्रेनें प्लेटफार्म नंबर 4, 5 और 6 पर आ गईं। यात्रियों की भीड़ फुटओवरब्रिज पर उमड़ पड़ी थी। इसी बीच एक महिला, जो अपने परिवार के साथ पुल से नीचे उतर रही थी, अचानक फिसल गई और गिर पड़ी।
उसके गिरने के बाद उसके पीछे चल रहे लोग एक-दूसरे से टकरा गए। कुछ लोग सीढ़ियों पर बैठे थे, जिन पर गिरने से उनका संतुलन बिगड़ गया और वे भी नीचे गिर पड़े। कुछ यात्रियों ने तुरंत चिल्लाना शुरू किया, जिससे माहौल और ज्यादा अफरातफरी वाला हो गया।
#WATCH | West Bengal | Visuals from Bardhaman railway station, where eight people got injured after a woman travelling from the footoverbridge at the station lost her balance and fell on the footoverbridge stairs. The injured are receiving treatment at the Bardhaman Medical… https://t.co/Srvm8rw4ep pic.twitter.com/AKfVNTF3AN
— ANI (@ANI) October 12, 2025
रेलवे अधिकारियों का बयान
हावड़ा डिवीजन के मंडल रेल प्रबंधक विशाल कपूर ने बताया कि यह हादसा शाम लगभग 5:30 बजे हुआ। आठ लोग घायल हुए हैं, जिनमें पांच महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। सभी घायलों को अस्पताल भेजा गया और रेलवे की मेडिकल टीम ने मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया।
रेलवे की ओर से यह भी कहा गया कि “कोई वास्तविक भगदड़ नहीं हुई।” रेलवे ने स्पष्ट किया कि यह एक आकस्मिक घटना थी, न कि भीड़ के अनियंत्रित होने की वजह से। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचे और भीड़ को नियंत्रित किया।
चश्मदीदों ने बताया क्या हुआ

घटना के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए जिनमें लोगों को सीढ़ियों पर गिरते और एक-दूसरे को संभालने की कोशिश करते देखा जा सकता है। कुछ स्थानीय विक्रेताओं और यात्रियों ने बताया कि जैसे ही महिला गिरी, लोगों ने चिल्लाना शुरू कर दिया, जिससे घबराहट फैल गई।
एक चश्मदीद ने कहा, “महिला नीचे गिरी और उसके ऊपर दो-तीन लोग गिर पड़े। कुछ लोग पीछे से धक्का दे रहे थे क्योंकि ट्रेन छूटने वाली थी। उस वक्त सब कुछ बहुत तेजी से हुआ।”
एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि “सीढ़ियों पर कई लोग बैठे थे, जिससे जगह बहुत कम बची थी। महिला के गिरने के बाद सभी लोग एक-दूसरे पर चढ़ गए। यह पूरी तरह से एक अनियोजित स्थिति थी।”
घायल यात्रियों की स्थिति
रेलवे प्रशासन के मुताबिक, सभी घायलों को इलाज के लिए बर्धमान मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि अधिकतर लोगों को हल्की चोटें आई हैं, जबकि दो यात्रियों के पैर और हाथ में फ्रैक्चर हुआ है।
अस्पताल के एक अधिकारी ने कहा कि “घायलों को तुरंत लाया गया था, उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है और सभी को आवश्यक इलाज मिल रहा है।”
रेलवे ने क्या कदम उठाए
घटना के तुरंत बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्टेशन स्टाफ ने मौके पर पहुंचकर घायलों को बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार दिया। रेलवे ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और अधिकारियों ने कहा कि ऐसी घटनाओं को दोहराने से रोकने के लिए सभी सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा।
रेलवे प्रशासन ने यह भी कहा कि भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती, लाउडस्पीकर से चेतावनी प्रसारण, और सीसीटीवी मॉनिटरिंग जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
बर्धमान स्टेशन क्यों रहता है भीड़भाड़ वाला

बर्धमान जंक्शन पश्चिम बंगाल के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है। यह स्टेशन पूर्वी रेलवे जोन का एक बड़ा केंद्र है, जहाँ से हावड़ा, आसनसोल, दुर्गापुर और कटवा की ओर दर्जनों ट्रेनें रोजाना गुजरती हैं।
यहाँ लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनों की बड़ी संख्या के कारण हमेशा भीड़ रहती है। कई बार एक साथ तीन से चार ट्रेनें प्लेटफार्म पर आने के कारण यात्रियों की भीड़ फुटओवरब्रिज पर बढ़ जाती है। यही स्थिति इस हादसे में भी देखी गई।
रेलवे सुरक्षा को लेकर बढ़ते सवाल
हाल के वर्षों में रेलवे स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। देशभर में ऐसे हादसे पहले भी हो चुके हैं जहाँ एक छोटी सी गलती बड़ी दुर्घटना में बदल गई।
2017 में मुंबई के एलफिंस्टन स्टेशन पर भगदड़ में 22 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के दावे किए थे, लेकिन आज भी कई स्टेशन ऐसे हैं जहाँ सुरक्षा प्रबंधन नाकाफी है।
बर्धमान स्टेशन की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रेलवे ने भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को लेकर पर्याप्त तैयारी की है या नहीं।
क्या थी स्टेशन पर सुरक्षा में कमी?
इस घटना ने यह स्पष्ट किया है कि रेलवे स्टेशनों पर कुछ बुनियादी सुरक्षा खामियाँ अब भी बनी हुई हैं।
- फुटओवरब्रिज की चौड़ाई कई जगह कम है।
- यात्रियों के बैठने और चलने के रास्ते में कोई स्पष्ट विभाजन नहीं होता।
- प्लेटफार्म पर सुरक्षा कर्मियों की संख्या सीमित होती है।
- अचानक आने वाली ट्रेनों से यात्रियों में जल्दबाजी और धक्का-मुक्की बढ़ जाती है।
अगर इन बिंदुओं पर सुधार किया जाए, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
प्रशासन की अगली कार्यवाही
रेलवे प्रशासन ने इस मामले में एक आंतरिक जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही, सुरक्षा उपायों को बढ़ाने के लिए कुछ तात्कालिक कदम उठाए जा रहे हैं। फुटओवरब्रिज और प्लेटफार्म पर यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए नए गेट लगाए जाएंगे।
साथ ही, स्टेशन पर अधिक आरपीएफ कर्मियों की तैनाती और यात्रियों को दिशा-निर्देश देने के लिए डिजिटल सूचना प्रणाली को बेहतर बनाया जाएगा।
स्थानीय लोगों की मांग
स्थानीय लोगों और नियमित यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि बर्धमान स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। यात्रियों ने कहा कि प्लेटफार्म और ब्रिज पर अक्सर लोग बैठ जाते हैं, जिससे रास्ता संकरा हो जाता है।
उनका कहना है कि रेलवे को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी यात्री सीढ़ियों पर न बैठे, और भीड़ के समय यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों से निकाला जाए।
बर्धमान स्टेशन की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि रेलवे सुरक्षा सिर्फ ट्रेनों के संचालन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यात्रियों की भीड़, संरचना और व्यवहार को भी ध्यान में रखना चाहिए।
भले ही रेलवे का कहना है कि यह कोई “भगदड़” नहीं थी, लेकिन इस घटना ने दिखा दिया है कि छोटी सी लापरवाही भी कितनी बड़ी समस्या बन सकती है। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, और इसके लिए रेलवे को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रबंधन में लगातार सुधार करने होंगे।
अगर ऐसे हादसों से सीख ली जाए और समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएं, तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं को पूरी तरह टाला जा सकता है।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार रिपोर्टों, चश्मदीदों के बयान और रेलवे के आधिकारिक बयानों पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल पाठकों तक तथ्यात्मक जानकारी पहुँचाना है। किसी भी व्यक्ति, संस्था या संगठन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का उद्देश्य नहीं है। इस समाचार में उल्लिखित विवरणों में बाद में परिवर्तन संभव है, क्योंकि जांच प्रक्रिया जारी है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले रेलवे या संबंधित विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करें।
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