बैंगन का भरता: धुएँ की खुशबू से जुड़ा देसी स्वाद और परंपरा

बैंगन का भरता: भारतीय खानपान में बैंगन का नाम आते ही ज़ुबान पर सबसे पहले “बैंगन का भरता” का स्वाद उतर आता है। यह सिर्फ़ एक साधारण सब्ज़ी नहीं बल्कि भारतीय रसोई का वह हिस्सा है जो सदियों से गाँव-गाँव और शहर-शहर में अपनी ख़ास जगह बनाए हुए है।

बैंगन का भरता
                     बैंगन का भरता

बैंगन का इतिहास और भरते की परंपरा

बैंगन (Brinjal/Eggplant) मूल रूप से भारत और दक्षिण एशिया का पौधा माना जाता है। संस्कृत में इसे वातिगगम और भंटक जैसे नामों से जाना गया है। प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में भी बैंगन का उल्लेख मिलता है, जहाँ इसे पचने में हल्का और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया गया है।

कहा जाता है कि बैंगन का भरता सबसे पहले उत्तर भारत के गाँवों में बनाया गया। जब लोग तंदूर या लकड़ी की आँच पर बैंगन को भूनकर उसमें प्याज, टमाटर और मसाले मिलाते थे, तब इसका स्वाद ऐसा अनोखा बनता था कि धीरे-धीरे यह पकवान पूरे उत्तर भारत और फिर पूरे देश में लोकप्रिय हो गया।

पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश – लगभग हर राज्य की रसोई में भरते का अलग ही स्वाद देखने को मिलता है। कहीं इसमें सरसों का तेल डाला जाता है तो कहीं देसी घी। कुछ जगह लोग इसे लहसुन और अदरक के साथ तीखा बनाना पसंद करते हैं, तो कहीं इसका स्वाद हल्का और घरेलू रखा जाता है।

बैंगन का भरता बनाने की पारंपरिक विधि

बैंगन का भरता बनाने की असली पहचान इसके भुने हुए स्वाद में छिपी होती है। पहले लोग चूल्हे या अंगीठी की आँच पर बैंगन भूनते थे, जिससे इसमें हल्की-सी धुएँ की खुशबू आ जाती थी। यही इसकी असली जान है।

आवश्यक सामग्री

  • बैंगन – 1 बड़ा (भर्ता बनाने वाला)

  • टमाटर – 2 मध्यम आकार के

  • प्याज – 2 बारीक कटा हुआ

  • हरी मिर्च – 2

  • लहसुन – 5-6 कलियाँ

  • अदरक – 1 इंच टुकड़ा

  • हरा धनिया – थोड़ा-सा

  • हल्दी पाउडर – ½ चम्मच

  • लाल मिर्च पाउडर – 1 चम्मच

  • धनिया पाउडर – 1 चम्मच

  • नमक – स्वादानुसार

  • तेल या सरसों का तेल – 2-3 चम्मच

बनाने की विधि

  1. सबसे पहले बैंगन को अच्छे से धोकर उसमें हल्की-सी चीरे लगाएँ। चाहें तो उसमें 2-3 लहसुन की कलियाँ भर सकते हैं ताकि भुनते समय और भी स्वादिष्ट बने।

  2. अब बैंगन को सीधे गैस की आँच पर या तंदूर/चूल्हे की आँच पर गोल-गोल घुमाते हुए भूनें। जब इसकी बाहरी परत पूरी तरह काली हो जाए और बैंगन नरम हो जाए तो समझिए यह तैयार है।

  3. इसे ठंडा होने दें और फिर हाथ से छिलका उतारकर बैंगन को अच्छे से मैश कर लें।

  4. कढ़ाई में तेल गर्म करें। उसमें प्याज, हरी मिर्च, अदरक और लहसुन डालकर सुनहरा होने तक भूनें।

  5. अब इसमें टमाटर और सारे मसाले डालकर तब तक पकाएँ जब तक मसाला तेल न छोड़ दे।

  6. इसमें मैश किया हुआ बैंगन डालकर अच्छे से मिलाएँ और 5-7 मिनट तक धीमी आँच पर पकाएँ।

  7. ऊपर से हरा धनिया डालें और गरमा-गरम परोसें।

भरते का स्वाद और साथ में परोसे जाने वाले व्यंजन

बैंगन का भरता आमतौर पर रोटी, पराठे या बाजरे की रोटी के साथ परोसा जाता है। पंजाब में इसे सरसों के तेल की महक के साथ खाते हैं, जबकि बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे सरसों के तेल, प्याज और हरी मिर्च के साथ बिना भूनें भी बनाया जाता है जिसे “भर्ता” या “चोखा” कहा जाता है।

सर्दियों में जब ताज़े टमाटर और हरी मिर्च बाज़ार में मिलते हैं, तब इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है।

बैंगन का भरता और लोक संस्कृति

भारतीय गाँवों में बैंगन का भरता केवल एक व्यंजन नहीं बल्कि सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक रहा है। कई जगह पर त्योहारों और पारिवारिक मेलों में लोग एक साथ बैठकर अंगीठी पर बैंगन भूनते और भरता बनाकर खाते हैं।

बिहार और झारखंड में छठ पूजा या होली जैसे अवसरों पर “बैंगन चोखा” को विशेष रूप से परोसा जाता है। वहीं राजस्थान में इसे मोटे-मोटे बाजरे की रोटी और छाछ के साथ खाया जाता है।

लोकगीतों और कहावतों में भी बैंगन और इसके भरते का उल्लेख मिलता है। एक कहावत तो बड़ी मशहूर है – “बैंगन के गुण, गिन न सके कोय” यानी बैंगन इतना बहुमुखी है कि इसके गुण गिन पाना मुश्किल है।

स्वास्थ्य लाभ

बैंगन का भरता स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन के लिए अच्छा है। यह कैलोरी में कम होता है इसलिए डायबिटीज़ और वज़न नियंत्रित करने वालों के लिए भी उपयोगी है। साथ ही, बैंगन में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो शरीर को बीमारियों से बचाते हैं।

बैंगन का भरता केवल एक पकवान नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और स्वाद का आईना है। चूल्हे की धुएँ वाली खुशबू, गाँव के आँगन की यादें और परिवार संग खाने का आनंद – यह सब बैंगन के भरते से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि यह व्यंजन आज भी आधुनिक रसोई से लेकर पारंपरिक देसी घरों तक उतनी ही शिद्दत से बनाया और खाया जाता है।

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