Arunachal Tawang Landslide: अरुणाचल प्रदेश अपने बर्फ से ढके पहाड़ों, हरे-भरे जंगलों और शांत घाटियों के लिए प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं। लेकिन पहाड़ी इलाकों की खूबसूरती के साथ अक्सर प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी जुड़ा रहता है। यहाँ लगातार हो रही बारिश कई बार भूस्खलन का कारण बनती है, जिससे सड़कें बंद हो जाती हैं और लोग फंस जाते हैं।
3 सितंबर 2025 को तवांग जिले के जंग कस्बे के पास भी ऐसा ही एक हादसा हुआ। लगातार हो रही बारिश के कारण पाँच अलग-अलग जगहों पर भारी भूस्खलन हुआ। इस वजह से जंग बाईपास और बालीपारा–चारदुआर–तवांग राजमार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।
भूस्खलन में फंसे साठ से अधिक लोग | Arunachal Tawang Landslide
इस दौरान लगभग 25 वाहनों में यात्रा कर रहे करीब 60 पर्यटक और स्थानीय निवासी अचानक रास्ते में फंस गए। चारों तरफ अंधेरा, लगातार मूसलाधार बारिश और कीचड़ से भरी सड़कें—स्थिति बेहद डरावनी थी। कई लोग गाड़ियों में ही इंतज़ार करते रहे और कई बाहर निकलकर सुरक्षित जगह तलाशने लगे। लेकिन राहत की बात यह रही कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) तुरंत हरकत में आया।
बीआरओ की मानवीय पहल
बीआरओ के जवानों ने हालात को समझते ही तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। तेज बारिश और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनकी टीम ने सबसे पहले फंसे हुए लोगों तक पहुंच बनाई। उन्होंने उन्हें भोजन और पीने का पानी उपलब्ध कराया ताकि घबराहट और थकान कम हो सके।
फिर भारी मशीनों और जेसीबी की मदद से रातभर काम चलता रहा। पहाड़ से गिरे बड़े-बड़े पत्थरों और मलबे को हटाना आसान नहीं था। कई जगह लगातार बारिश के कारण काम बीच-बीच में रुकता भी रहा, लेकिन बीआरओ ने हार नहीं मानी। आखिरकार, आधी रात तक सड़कें साफ कर दी गईं और यातायात फिर से शुरू हो गया।
#BROArunachalConnectivity #BROServingNation
On 01 Sep midnight, 07 landslides struck Lungro GG–Damteng–Yangtse, Damteng–Selungthi–Lungar–Chuna and Balipara–Charduar–Tawang roads in Arunachal Pradesh.
At 12,000 to 15,000 ft altitude amidst harsh terrain and adverse weather,… pic.twitter.com/ssI8xsFuQ9
— 𝐁𝐨𝐫𝐝𝐞𝐫 𝐑𝐨𝐚𝐝𝐬 𝐎𝐫𝐠𝐚𝐧𝐢𝐬𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧 (@BROindia) September 2, 2025
“श्रमेण सर्वम् साध्यम्” की मिसाल

बीआरओ का आदर्श वाक्य है—“श्रमेण सर्वम् साध्यम्”, यानी परिश्रम से सब कुछ संभव है। तवांग की इस घटना में यह नारा सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत बन गया। कठिन भूभाग, लगातार बारिश और अंधेरे में भी जवानों ने जिस तरह राहत कार्य किया, उसने लोगों का विश्वास और बढ़ा दिया।
क्यों अहम है बालीपारा–चारदुआर–तवांग राजमार्ग
यह राजमार्ग न सिर्फ स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यही रास्ता तवांग को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। सेना की आपूर्ति, दवाइयाँ और रोज़मर्रा का सामान इसी मार्ग से पहुँचता है। अगर यह सड़क लंबे समय तक बंद रहती, तो हालात और भी गंभीर हो सकते थे। इसलिए बीआरओ का काम केवल सड़क खोलना नहीं था, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा को बचाना था।
असम में भी भूस्खलन की मार
इसी हफ्ते की शुरुआत में असम के तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ जिलों में भी लगातार बारिश से कई जगहों पर भूस्खलन हुआ। लेडो–डिब्रूगढ़–यांग्त्से, डिब्रूगढ़–सदिया–लेडो–चबुआ और बोर्डम्सा–चबुआ–तिनसुकिया मार्ग पर सात स्थानों पर सड़कें बंद हो गईं। ये सभी क्षेत्र 763 बीआरटीएफ की ज़िम्मेदारी में आते हैं। यहाँ भी बीआरओ की टीमों ने तेजी से काम करते हुए सड़कों को साफ किया और लोगों को सुरक्षित निकाला।
अगस्त में भी हुआ बड़ा हादसा
इससे पहले अगस्त 2025 में पश्चिम कामेंग जिले के दिरांग उपखंड में एक बड़ा भूस्खलन हुआ था। सैपर कैंप इलाके में 120 मीटर तक सड़क मलबे से भर गई थी। उस दौरान दो वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे। हालांकि, गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई। उस समय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें लोग डर के मारे गाड़ियों को पीछे मोड़ते और हॉर्न बजाते नज़र आए थे।
स्थानीय लोगों की चिंता
स्थानीय लोग लगातार इस बात को लेकर चिंता जता रहे हैं कि इस राजमार्ग पर भूस्खलन बार-बार क्यों हो रहा है। उनका कहना है कि नियमित देखभाल और मज़बूत चेतावनी प्रणाली की ज़रूरत है। कई बार मौसम विभाग बारिश की चेतावनी देता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर तैयारी उतनी प्रभावी नहीं होती।
पर्यटकों के लिए सबक
तवांग और अरुणाचल प्रदेश हर साल हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में सफर करने वालों को सावधानी बरतनी चाहिए। बरसात के मौसम में यात्रा की योजना बनाते समय मौसम का पूर्वानुमान देखना बहुत ज़रूरी है। साथ ही, स्थानीय प्रशासन और सेना की सलाह को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
भविष्य के लिए ज़रूरी कदम
भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से पूरी तरह बच पाना मुश्किल है। लेकिन वैज्ञानिक तकनीक और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से नुकसान को कम किया जा सकता है। कुछ सुझाव:
-
संवेदनशील जगहों पर भूस्खलन की पूर्व चेतावनी प्रणाली लगाना।
-
सड़कों की नियमित देखभाल और मज़बूत निर्माण।
-
आपात स्थिति में राहत सामग्री और मेडिकल सुविधा तुरंत उपलब्ध कराने की व्यवस्था।
-
पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए जागरूकता अभियान।
बीआरओ की भूमिका पर रोशनी
सीमा सड़क संगठन केवल सड़क बनाने वाला विभाग नहीं है। यह संगठन कठिन से कठिन हालात में लोगों की जीवनरेखा को बचाने का काम करता है। चाहे हिमालयी इलाकों में बर्फ हटाना हो या भूस्खलन से सड़कें खोलना—बीआरओ हमेशा सबसे आगे खड़ा दिखता है। तवांग की इस घटना ने फिर साबित कर दिया कि बीआरओ का महत्व केवल सामरिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी बहुत बड़ा है।
तवांग का भूस्खलन हमें यह याद दिलाता है कि प्रकृति की ताकत के सामने इंसान कभी-कभी असहाय हो जाता है। लेकिन मानवीय साहस, परिश्रम और सेवा की भावना हर संकट को पार कर सकती है। बीआरओ के जवानों ने जिस साहस और तत्परता से काम किया, उसने न सिर्फ फंसे हुए लोगों की जान बचाई, बल्कि पूरे देश का विश्वास भी जीत लिया।
भविष्य में ज़रूरत है कि इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए और मज़बूत व्यवस्था बनाई जाए। ताकि अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियाँ हमेशा सुरक्षित रहें और यहाँ आने वाले पर्यटक बेखौफ होकर प्रकृति का आनंद ले सकें।
ऐसे और भी National लेखों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें! Khabari bandhu पर पढ़ें देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरें — बिज़नेस, एजुकेशन, मनोरंजन, धर्म, क्रिकेट, राशिफल और भी बहुत कुछ।
GST Council Meeting 2025: घर बनाने के सामान पर भारी टैक्स, क्या मिलेगा आम लोगों को राहत?
Wednesday सीज़न 2 पार्ट 2: रिलीज़ डेट, प्लॉट और लेडी गागा की धमाकेदार एंट्री