Amul Mother Dairy and Country Delight Fail Lab Tests: टेस्ट रिपोर्ट ने खोली पोल

Amul Mother Dairy and Country Delight Fail Lab Tests: भारत के ज़्यादातर घरों में सुबह की शुरुआत एक ही तरह से होती है – दरवाज़े पर पड़ा दूध का पैकेट, चाय की खुशबू और नाश्ते की तैयारी। दशकों से यह माना जाता रहा है कि अगर दूध अमूल, मदर डेयरी या कंट्री डिलाइट जैसे बड़े और भरोसेमंद ब्रांड का है, तो वह सुरक्षित ही होगा। लेकिन हाल ही में सामने आई एक स्वतंत्र लैब जांच ने इस भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है।

Amul Mother Dairy and Country Delight Fail Lab Tests

TRUSTIFIED की BLIND लैब टेस्ट रिपोर्ट क्या कहती है?

स्वतंत्र उपभोक्ता प्लेटफॉर्म Trustified द्वारा कराई गई एक ब्लाइंड लैब टेस्टिंग में भारत के कुछ प्रमुख दूध ब्रांड्स के नमूनों की माइक्रोबायोलॉजिकल जांच की गई।
इस जांच में दो मुख्य पैरामीटर देखे गए:

  1. Total Plate Count (TPC) – दूध में कुल बैक्टीरिया की मात्रा

  2. Coliform Bacteria – जो गंदगी, अस्वच्छता और फीकल कंटैमिनेशन का संकेत देते हैं

ये दोनों ही मानक FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) द्वारा तय किए गए हैं।

चौंकाने वाले नतीजे: पाउच दूध फेल ❌

लैब रिपोर्ट के अनुसार, जिन दूध के पैकेट्स का रोज़ाना लाखों घरों में इस्तेमाल होता है, वे तय सुरक्षा सीमाओं पर खरे नहीं उतरे।

फेल हुए उत्पाद (पाउच मिल्क):

  • Amul Taaza और Amul Gold
    दोनों में Coliform बैक्टीरिया FSSAI की सुरक्षित सीमा से ज़्यादा पाए गए।

  • Mother Dairy Cow Milk
    सबसे गंभीर मामला – इसका TPC स्तर सुरक्षित सीमा से 8 गुना अधिक पाया गया
    (240,000 CFU/ml बनाम 30,000 CFU/ml की सीमा)

  • Country Delight Cow Milk
    “फार्म-टू-होम” के दावे के बावजूद, इसका TPC स्तर कानूनी सीमा से लगभग दोगुना निकला।

एकमात्र पास हुआ विकल्प: टेट्रा पैक दूध ✅

इस जांच में Amul Tetra Pack (UHT Milk) ही ऐसा उत्पाद रहा जिसमें
👉 शून्य माइक्रोऑर्गेनिज़्म पाए गए।

UHT (Ultra High Temperature) प्रोसेसिंग और पूरी तरह सील्ड पैकेजिंग की वजह से यह दूध पूरी तरह स्टेराइल पाया गया।

क्या दूध उबालने से खतरा खत्म हो जाता है?

अधिकतर भारतीय घरों में पाउच दूध को उबालना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक:

  • उबालने से बैक्टीरिया की संख्या कम ज़रूर होती है

  • लेकिन बैक्टीरिया द्वारा पहले से बनाए गए toxins पूरी तरह नष्ट नहीं होते

  • खासतौर पर coliform जैसे बैक्टीरिया स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं

स्वस्थ वयस्कों में इसका असर सीमित हो सकता है,
लेकिन शिशु, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुज़ुर्गों के लिए यह जोखिम गंभीर हो सकता है।

जब अमूल पर सवाल उठते हैं, तो बात सिर्फ दूध की नहीं रहती:

अमूल सिर्फ एक ब्रांड नहीं है।
यह श्वेत क्रांति, सहकार आंदोलन, और करोड़ों किसानों की मेहनत का प्रतीक है।
इसलिए जब रिपोर्ट्स सामने आईं कि:

  • कुछ अमूल दही सैंपल्स में 2100 गुना ज़्यादा coliform बैक्टीरिया

  • 60 गुना अधिक yeast और mould

  • और कुछ दूध सैंपल्स में 98 गुना ज़्यादा coliform

तो यह सिर्फ चिंता नहीं, बल्कि आक्रोश का कारण बना।

लोगों ने सवाल पूछा –
👉 क्या ब्रांड का नाम अब सुरक्षा की गारंटी नहीं रहा?

एक बड़ी सच्चाई जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता:

आंकड़ों के मुताबिक,
👉 भारत में सिर्फ 58–60% व्यावसायिक पाश्चुरीकृत दूध ही सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है।

इसका मतलब साफ है –
महंगा या मशहूर होना, सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है।

उपभोक्ताओं के लिए बेहतर विकल्प क्या हैं?

अगर आप अपने परिवार की सेहत को लेकर चिंतित हैं, तो कुछ व्यावहारिक कदम मदद कर सकते हैं:

  1. टेट्रा पैक दूध को प्राथमिकता दें
    खासकर बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए यह सबसे सुरक्षित विकल्प है।

  2. अगर पाउच दूध ही लें
    तो:

    • अच्छी तरह उबालें

    • लंबे समय तक स्टोर न करें

    • उबालने के बाद तुरंत इस्तेमाल करें

  3. सिर्फ ब्रांड पर भरोसा न करें
    सवाल पूछना, रिपोर्ट पढ़ना और जागरूक रहना ज़रूरी है।

भरोसा ज़रूरी है, लेकिन आंख बंद करके नहीं:

दूध हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है, और उससे जुड़ा भरोसा भी।
लेकिन यह घटना हमें याद दिलाती है कि
👉 उपभोक्ता जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

ब्रांड्स को भी यह समझना होगा कि
भावनात्मक जुड़ाव से ज़्यादा ज़रूरी है गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही

क्योंकि सवाल अब सिर्फ दूध का नहीं –
हमारे बच्चों की सेहत और हमारे भरोसे का है।

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