Afghan Foreign Minister to Visit India: भारत और अफगानिस्तान के बीच रिश्तों में एक बार फिर से नई हलचल देखने को मिल रही है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को पुष्टि की कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी 9 से 16 अक्टूबर 2025 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह दौरा कई मायनों में अहम है क्योंकि लंबे समय से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियाँ धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं और इस यात्रा से द्विपक्षीय रिश्तों को एक नई दिशा मिलने की संभावना है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस यात्रा की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि अफगान विदेश मंत्री को भारत यात्रा की अनुमति संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की समिति ने दी है। इस समिति ने मुत्ताकी को यात्रा के लिए आवश्यक छूट प्रदान की है। जायसवाल ने कहा, “आप सभी ने देखा होगा कि अफगान विदेश मंत्री की 9 से 16 अक्टूबर तक नई दिल्ली यात्रा के लिए किस प्रकार की छूट दी गई है। यह जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है। हम इस संबंध में आपको आगे अपडेट देते रहेंगे।”
भारत के विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से मुलाकात

अमीर खान मुत्ताकी का यह भारत दौरा बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि अपने प्रवास के दौरान वे भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुत्ताकी कुछ सप्ताह पहले ही भारत आना चाहते थे, लेकिन उस समय उन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से यात्रा छूट नहीं मिल पाई थी। इस वजह से उनकी यात्रा टल गई थी।
अब जबकि उन्हें यूएनएससी से यात्रा की विशेष अनुमति मिल गई है, उनका भारत आना यह दर्शाता है कि नई दिल्ली और तालिबान सरकार के बीच संवाद की प्रक्रिया और मजबूत हो रही है। यह यात्रा पिछले कई महीनों से चल रही कूटनीतिक कोशिशों का नतीजा है।
पहले भी हो चुकी है मुलाकात
यह पहली बार नहीं है जब भारत और अफगानिस्तान के बीच इस तरह के कूटनीतिक संपर्क हुए हों। इस साल जनवरी में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्र की मुलाकात अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी से हुई थी। उस बैठक को भी द्विपक्षीय संबंधों की दृष्टि से अहम माना गया था। उस समय से लेकर अब तक कई स्तरों पर संवाद जारी रहा है।
भारत की यह नीति रही है कि वह अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता को महत्व देता है और वहां की अस्थायी सरकार के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखता है।
भारत-अफगान रिश्तों में नया मोड़
अफगान विदेश मंत्री की यात्रा को भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों में नया मोड़ माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में अफगानिस्तान के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने नई दिल्ली का दौरा किया है। इसमें अफगानिस्तान के चिकित्सा और खाद्य विभाग के उपमंत्री हम्दुल्ला जाहीद का नाम भी शामिल है। वे पिछले महीने नई दिल्ली में आयोजित 11वीं अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में भाग लेने आए थे, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर सेक्टर से जुड़े कई प्रतिनिधि मौजूद थे।
इतना ही नहीं, सुरक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े तालिबान सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने भी हाल ही में नई दिल्ली का दौरा किया था। हालांकि उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह अधिकारी कुछ दिनों तक भारत में रहे और पिछले सप्ताह ही वे काबुल लौटे।
इन दौरों से साफ जाहिर होता है कि भारत और अफगानिस्तान के बीच बातचीत और संपर्क का स्तर धीरे-धीरे गहराता जा रहा है।
दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत अस्थायी अफगान सरकार के साथ निरंतर बातचीत कर रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के बीच टेलीफोन पर बातचीत हो चुकी है।
इसके अलावा भारत के जॉइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी और उनके अफगान समकक्षों के बीच भी संवाद होता रहा है। यह बताता है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चैनल सक्रिय हैं और लगातार नए-नए माध्यमों से संपर्क बनाए रखा जा रहा है।
मानवीय मदद और सहयोग
भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों का एक बड़ा पहलू मानवीय मदद भी रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि हाल ही में जब अफगानिस्तान में भूकंप आया था, उसी दिन भारत ने कुनार प्रांत में राहत सामग्री भेजी थी। इसके बाद भारत ने चाबहार मार्ग से और भी राहत सामग्री अफगानिस्तान तक पहुँचाई।
इस तरह की मदद से यह संदेश जाता है कि भारत केवल राजनीतिक या रणनीतिक स्तर पर ही नहीं बल्कि मानवीय स्तर पर भी अफगान जनता के साथ खड़ा है।
भविष्य की संभावनाएँ
अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की यह यात्रा आने वाले समय में भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान सुरक्षा, व्यापार, मानवीय सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
भारत की चिंता हमेशा से यह रही है कि अफगानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए न हो। वहीं अफगानिस्तान भी चाहता है कि भारत उसकी बुनियादी जरूरतों, विकास परियोजनाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग करता रहे।
अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी का 9 से 16 अक्टूबर तक होने वाला भारत दौरा इस समय बेहद अहम है। एक ओर यह तालिबान सरकार और भारत के बीच बढ़ते रिश्तों को दिखाता है, तो दूसरी ओर इससे यह उम्मीद भी जागती है कि क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग का माहौल बनेगा।
पिछले कुछ महीनों में हुए लगातार दौरों और संपर्कों से साफ है कि दोनों देशों के बीच संवाद की राह खुल चुकी है। चाहे वह मानवीय मदद हो, व्यापारिक सहयोग हो या सुरक्षा संबंधी चर्चा — हर स्तर पर भारत और अफगानिस्तान एक-दूसरे से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
इस यात्रा के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों में किस तरह का ठोस बदलाव आता है और क्या दोनों देश एक नए दौर की ओर कदम बढ़ाते हैं।
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