Active Learning vs Passive Learning: आज के समय में सीखने के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। पहले जहाँ कक्षा में शिक्षक बोलते थे और विद्यार्थी चुपचाप सुनते थे, वहीं अब पढ़ाई को अधिक सहभागितापूर्ण और अनुभवात्मक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी संदर्भ में दो महत्वपूर्ण शब्द सामने आते हैं – सक्रिय अधिगम (Active Learning) और निष्क्रिय अधिगम (Passive Learning)।

इस ब्लॉग में हम इन दोनों पद्धतियों के बीच अंतर, उनके लाभ-हानि और यह समझेंगे कि कौन-सी पद्धति कब और क्यों अधिक प्रभावी होती है।
सक्रिय अधिगम (Active Learning) क्या है?
🔹 सक्रिय अधिगम की विशेषताएँ:
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विद्यार्थी केंद्रित पद्धति
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संवाद और सहभागिता पर जोर
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वास्तविक जीवन की समस्याओं से जुड़ाव
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आलोचनात्मक और रचनात्मक सोच का विकास
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अनुभव के माध्यम से सीखना
उदाहरण के लिए, यदि विज्ञान की कक्षा में शिक्षक केवल प्रकाश संश्लेषण की परिभाषा समझाएँ तो यह निष्क्रिय अधिगम होगा। लेकिन यदि विद्यार्थी स्वयं पौधे पर प्रयोग करें, चार्ट बनाएं और चर्चा करें कि यह प्रक्रिया कैसे होती है, तो यह सक्रिय अधिगम कहलाएगा।
🔹 सक्रिय अधिगम के लाभ:
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विषय की गहरी समझ विकसित होती है।
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आत्मविश्वास बढ़ता है।
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संचार कौशल में सुधार होता है।
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दीर्घकालिक स्मरण शक्ति बेहतर होती है।
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समस्या समाधान क्षमता विकसित होती है।
🔹 संभावित चुनौतियाँ:
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समय अधिक लगता है।
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बड़े वर्ग में लागू करना कठिन हो सकता है।
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शिक्षक को अतिरिक्त तैयारी करनी पड़ती है।
निष्क्रिय अधिगम (Passive Learning) क्या है?
🔹 निष्क्रिय अधिगम की विशेषताएँ:
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शिक्षक केंद्रित पद्धति
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एकतरफा संवाद
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नोट्स बनाना और रटने पर जोर
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कम सहभागिता
उदाहरण के लिए, यदि विद्यार्थी केवल व्याख्यान सुनते हैं या किताब पढ़ते हैं और प्रश्न पूछने या चर्चा का अवसर नहीं मिलता, तो वह निष्क्रिय अधिगम है।
🔹 निष्क्रिय अधिगम के लाभ:
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कम समय में अधिक जानकारी दी जा सकती है।
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बड़े वर्गों के लिए उपयुक्त।
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संरचित और व्यवस्थित जानकारी मिलती है।
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परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी।
🔹 संभावित सीमाएँ:
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समझ सतही रह सकती है।
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विद्यार्थियों की रुचि कम हो सकती है।
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आलोचनात्मक सोच का विकास सीमित होता है।
सक्रिय और निष्क्रिय अधिगम में मुख्य अंतर:
| आधार | सक्रिय अधिगम | निष्क्रिय अधिगम |
|---|---|---|
| भूमिका | विद्यार्थी केंद्रित | शिक्षक केंद्रित |
| सहभागिता | अधिक | कम |
| संवाद | दो-तरफा | एक-तरफा |
| सोच का स्तर | विश्लेषणात्मक और रचनात्मक | याद रखने पर आधारित |
| प्रभाव | दीर्घकालिक सीख | अल्पकालिक याददाश्त |
🎯 कौन-सी पद्धति बेहतर है?
यह कहना गलत होगा कि एक पद्धति पूरी तरह सही है और दूसरी गलत। दोनों की अपनी-अपनी उपयोगिता है।
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यदि लक्ष्य है मूलभूत जानकारी देना, तो निष्क्रिय अधिगम प्रभावी हो सकता है।
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यदि उद्देश्य है गहरी समझ, कौशल विकास और समस्या समाधान, तो सक्रिय अधिगम अधिक उपयुक्त है।
आज की आधुनिक शिक्षा प्रणाली में “ब्लेंडेड लर्निंग” (मिश्रित अधिगम) का प्रयोग किया जा रहा है, जिसमें दोनों पद्धतियों का संतुलित उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, पहले शिक्षक विषय समझाते हैं (निष्क्रिय), फिर विद्यार्थी उस पर चर्चा और प्रोजेक्ट करते हैं (सक्रिय)।
वास्तविक जीवन में उपयोग:
कॉर्पोरेट ट्रेनिंग, ऑनलाइन शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी सक्रिय अधिगम का महत्व बढ़ रहा है। केस स्टडी, रोल प्ले, क्विज़ और समूह चर्चा जैसे तरीकों से सीखना अधिक प्रभावी बन रहा है।
वहीं, ऑनलाइन वीडियो लेक्चर और ई-बुक्स निष्क्रिय अधिगम के उदाहरण हैं, जो प्रारंभिक जानकारी प्राप्त करने में सहायक हैं।
सक्रिय अधिगम और निष्क्रिय अधिगम दोनों ही शिक्षा की महत्वपूर्ण पद्धतियाँ हैं। अंतर केवल इतना है कि एक में विद्यार्थी सक्रिय भागीदार होता है और दूसरे में श्रोता।
आज के प्रतिस्पर्धी और कौशल-आधारित युग में केवल जानकारी याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे समझना, लागू करना और विश्लेषण करना भी आवश्यक है। इसलिए शिक्षा प्रणाली को अधिकाधिक सक्रिय अधिगम की ओर बढ़ना चाहिए, जबकि निष्क्रिय अधिगम को आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
अंततः, सबसे प्रभावी तरीका वही है जिसमें विद्यार्थी की जिज्ञासा, सहभागिता और रचनात्मकता को बढ़ावा मिले। क्योंकि सही मायनों में सीखना तभी होता है जब हम केवल सुनते नहीं, बल्कि समझते और करते भी हैं।
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