आलू पूरी का इतिहास और बनाने की विधि – स्वाद और परंपरा का अनोखा मेल

आलू पूरी का इतिहास : भारतीय रसोईघर में ऐसी कई व्यंजन परंपराएँ हैं जो न केवल स्वाद के लिए जानी जाती हैं, बल्कि इनके पीछे एक गहरा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी छुपा होता है। उन्हीं लोकप्रिय व्यंजनों में से एक है आलू पूरी। उत्तर भारत से लेकर पश्चिमी भारत तक, त्योहारों से लेकर रोज़मर्रा के भोजन तक, यह व्यंजन हर जगह अपनी खास जगह बनाए हुए है।

आलू पूरी का इतिहास
                 आलू पूरी का इतिहास

आलू पूरी का इतिहास:

पूरी और आलू की सब्ज़ी का मेल सदियों पुराना है।

  • पूरी का उद्भव: पूरी बनाने की परंपरा प्राचीन भारत से चली आ रही है। माना जाता है कि पहले इसे धार्मिक अनुष्ठानों और व्रतों में तैयार किया जाता था। पूरी को खासतौर पर गेहूँ के आटे से तला जाता था ताकि यह लंबे समय तक खराब न हो।

  • आलू का आगमन: भारत में आलू 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों के माध्यम से आया। धीरे-धीरे यह उत्तर भारत की रसोई का हिस्सा बना। चूँकि आलू जल्दी पकता है और मसालों के साथ अच्छी तरह मेल खाता है, इसलिए इसे पूरियों के साथ परोसा जाने लगा।

  • सांस्कृतिक महत्व: बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और दिल्ली की गलियों में नाश्ते का सबसे आसान और पसंदीदा विकल्प आलू पूरी ही रहा है। बंगाल और ओड़िशा में भी आलू दम के साथ पूरियाँ बनाई जाती हैं। त्योहारों जैसे जन्माष्टमी, दशहरा या शादी-ब्याह के मौके पर आलू पूरी परोसना परंपरा का हिस्सा बन चुका है।

इतिहास बताता है कि यह व्यंजन केवल पेट भरने का साधन नहीं था, बल्कि सामाजिक मेलजोल और उत्सव का प्रतीक भी था।

आलू पूरी की विशेषता

  • यह व्यंजन साधारण आटे और आलू जैसी रोज़मर्रा की सामग्री से बनता है।

  • हर राज्य में इसका स्वाद अलग होता है। कहीं आलू की सब्ज़ी में टमाटर और प्याज डाले जाते हैं, तो कहीं बिना प्याज-लहसुन के सिर्फ़ मसालों से बनाया जाता है।

  • आलू पूरी का स्वाद मसालेदार, खट्टा-मीठा और भरपेट होता है, इसलिए इसे नाश्ते, दोपहर या रात्रि भोजन में किसी भी समय खाया जा सकता है।

आलू पूरी बनाने की विधि

सामग्री (4 व्यक्तियों के लिए)

पूरी के लिए:

  • गेहूँ का आटा – 2 कप

  • नमक – स्वादानुसार

  • तेल – 2 चम्मच (मोयन के लिए)

  • पानी – आवश्यकतानुसार

  • तेल – तलने के लिए

आलू की सब्ज़ी के लिए:

  • उबले आलू – 4 मध्यम आकार के

  • टमाटर – 2

  • हरी मिर्च – 2

  • अदरक – 1 इंच टुकड़ा

  • तेल – 3 चम्मच

  • जीरा – 1 चम्मच

  • हल्दी पाउडर – ½ चम्मच

  • लाल मिर्च पाउडर – 1 चम्मच

  • धनिया पाउडर – 1½ चम्मच

  • गरम मसाला – ½ चम्मच

  • हींग – चुटकीभर

  • हरा धनिया – सजाने के लिए

  • नमक – स्वादानुसार

बनाने की विधि

स्टेप 1: पूरी का आटा गूंथना

  1. एक बड़े बर्तन में आटा लें।

  2. उसमें नमक और 2 चम्मच तेल डालकर अच्छी तरह मिलाएँ।

  3. धीरे-धीरे पानी डालते हुए कड़ा आटा गूंथ लें।

  4. आटे को ढककर 15 मिनट तक रख दें।

स्टेप 2: आलू की सब्ज़ी बनाना

  1. टमाटर, अदरक और हरी मिर्च को पीसकर पेस्ट बना लें।

  2. कढ़ाई में तेल गरम करें। उसमें जीरा और हींग डालें।

  3. अब टमाटर का पेस्ट डालकर मसाले (हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर) डाल दें।

  4. मसाला तब तक भूनें जब तक तेल अलग न हो जाए।

  5. उबले आलू को तोड़कर डालें और अच्छी तरह मिलाएँ।

  6. ज़रूरत अनुसार पानी डालकर हल्की-सी ग्रेवी बना लें।

  7. नमक और गरम मसाला डालें। ऊपर से हरा धनिया डालकर गैस बंद कर दें।

स्टेप 3: पूरियाँ तलना

  1. आटे से छोटे-छोटे गोले बनाकर बेल लें।

  2. कढ़ाई में तेल गरम करें।

  3. बेलकर बनाई हुई पूरियों को गरम तेल में डालें और सुनहरी होने तक तलें।

  4. सभी पूरियाँ इसी तरह तल लें।

परोसना

गरमागरम आलू की मसालेदार सब्ज़ी के साथ कुरकुरी पूरियाँ परोसें। चाहें तो साथ में अचार और दही भी रख सकते हैं।

आलू पूरी केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। इसकी लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि साधारण सामग्री से भी स्वाद और आनंद से भरा भोजन तैयार किया जा सकता है। चाहे सुबह का नाश्ता हो, घर का कोई खास मौका या किसी मंदिर का प्रसाद—आलू पूरी हर जगह अपनी जगह बनाए हुए है। यही कारण है कि यह व्यंजन सदियों बाद भी उतना ही प्रिय है जितना पहले हुआ करता था।

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